नई दिल्ली: अमेरिका में चल रहे सरकारी शटडाउन (US Government Shutdown) ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस संकट के बीच संघीय बजट को अपने राजनीतिक विरोधियों पर दबाव डालने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। खबरों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने डेमोक्रेटिक शासन वाले शहरों और राज्यों को मिलने वाली 27 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग (Federal Funding) रोक दी है, जिससे अमेरिकी राजनीति में हलचल मच गई है।
डेमोक्रेटिक राज्यों पर खास निशाना
शटडाउन के दौरान ट्रंप प्रशासन ने कम से कम 16 डेमोक्रेट-शासित राज्यों की संघीय सहायता या तो पूरी तरह रोक दी है या स्थगित कर दी है। इन राज्यों में अधिकांश वे हैं जहां ट्रंप की नीतियों का विरोध खुलकर किया जाता रहा है। राष्ट्रपति की इस कार्रवाई को उनके राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देखा जा रहा है।
न्यूयॉर्क इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है, जहां व्हाइट हाउस ने करीब 7.6 अरब डॉलर की हरित ऊर्जा परियोजना निधि रद्द कर दी। ओरेगन को दी जाने वाली फंडिंग का एक हिस्सा पहले ही वापस लिया जा चुका है, जबकि अब पोर्टलैंड को मिलने वाली सहायता भी खतरे में बताई जा रही है। इस पर न्यूयॉर्क की डेमोक्रेटिक गवर्नर कैथी होचुल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “यह स्पष्ट है कि ट्रंप डेमोक्रेट शासित राज्यों को सीधे निशाना बना रहे हैं।”
फंडिंग रोकने पर कानूनी जंग
ट्रंप के इस फैसले के खिलाफ कई राज्यों ने अदालत का रुख किया है। मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस द्वारा पारित बजट को रोककर संविधान और संघीय कानून का उल्लंघन किया है। हाल ही में एक अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन को आदेश दिया कि वह न्यूयॉर्क के लिए 187 मिलियन डॉलर की आतंकवाद-रोधी निधि वापस जारी करे।
हालांकि, कानूनी चुनौतियों के बावजूद ट्रंप अपने फैसलों पर अडिग हैं। उन्होंने इसे “प्रशासनिक सुधार की दिशा में आवश्यक कदम” बताते हुए कहा है कि वे नौकरशाही ढांचे को पुनर्गठित करने के लिए ‘प्रोजेक्ट 2025’ पर काम शुरू कर चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना राष्ट्रपति के एकतरफा नियंत्रण को और मजबूत कर सकती है, जिससे संघीय ढांचे में असंतुलन की स्थिति पैदा हो सकती है।
आर्थिक असर और सरकारी तंत्र पर दबाव
अमेरिकी कांग्रेस के बजट कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, शटडाउन के चलते करीब 7.5 लाख संघीय कर्मचारी रोजाना बिना काम के छुट्टी पर भेजे जा रहे हैं। इन कर्मचारियों के वेतन और मुआवजे पर सरकार को प्रतिदिन लगभग 40 करोड़ डॉलर का खर्च उठाना पड़ रहा है।
पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) और शिक्षा विभाग के लगभग 90% कर्मचारी प्रभावित हुए हैं, जबकि न्याय विभाग के करीब 10% कर्मचारियों पर असर पड़ा है। इसके कारण कई आवश्यक सेवाएं ठप पड़ गई हैं और नागरिकों के रोजमर्रा के कामकाज पर असर देखने को मिल रहा है।
राजनीतिक संकट के बीच आर्थिक अनिश्चितता
शटडाउन के इस दौर ने न केवल प्रशासनिक तंत्र को प्रभावित किया है, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर भी दबाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गतिरोध लंबा खींचा, तो अमेरिका की वित्तीय साख पर भी असर पड़ सकता है।
ट्रंप के आलोचक इसे उनके “राजनीतिक बदले” की रणनीति बता रहे हैं, जबकि उनके समर्थक इसे “कठोर लेकिन आवश्यक सुधार” कह रहे हैं। फिलहाल, शटडाउन की मार आम लोगों और सरकारी कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा पड़ रही है, जबकि अमेरिकी राजनीति एक बार फिर शक्ति और नियंत्रण की रस्साकशी में उलझी दिख रही है।



