नयी दिल्ली: पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। मामला नरसिंगदी जिले का है, जहां शुक्रवार की रात एक 23 वर्षीय हिंदू युवक, चंचल चंद्र भौमिक को उसकी दुकान के भीतर जिंदा जला दिया गया। परिजनों और स्थानीय लोगों का दावा है कि यह एक सोची-समझी साजिश थी, जिसे धार्मिक नफरत के चलते अंजाम दिया गया है।
साजिश के तहत दुकान को किया आग के हवाले
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंचल चंद्र पिछले छह वर्षों से एक स्थानीय गैरेज में काम करता था और वहीं रहता था। चश्मदीदों ने बताया कि हमलावर ने पहले दुकान का शटर बाहर से बंद किया, फिर चारों तरफ पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। दिल दहला देने वाली बात यह है कि हमलावर तब तक बाहर खड़ा रहा जब तक चंचल पूरी तरह जल नहीं गया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
परिवार का इकलौता सहारा था चंचल
चंचल अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था। पिता की मृत्यु के बाद, वह अपनी बीमार माँ, दिव्यांग बड़े भाई और छोटे भाई की देखभाल कर रहा था। स्थानीय लोगों और गैरेज मालिक ने उसे एक सीधा और ईमानदार व्यक्ति बताया है, जिसकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हिंदू अल्पसंख्यकों के बीच डर और दहशत का माहौल है।
बढ़ती हिंसा पर उठते सवाल
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की क्रूरता सामने आई है। इससे पहले भी दीपू चंद्र दास और खोकन चंद्र दास जैसे हिंदू नागरिकों को भीड़ द्वारा जिंदा जलाने या पीट-पीटकर मारने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
- हालिया घटनाएं: 31 दिसंबर को शरीयतपुर में दवा दुकानदार खोकन दास की भीड़ ने हत्या कर शव जला दिया था।
- आंकड़ों का खेल: हालांकि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार (यूनुस प्रशासन) का दावा है कि 2025 में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई 645 घटनाओं में से केवल 71 ही सांप्रदायिक थीं, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट नजर आ रही है।
भारत में तीखी प्रतिक्रिया
इस जघन्य हत्याकांड की गूँज भारत में भी सुनाई दे रही है। पश्चिम बंगाल भाजपा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे बंगाली हिंदुओं को निशाना बनाने का एक व्यवस्थित पैटर्न बताया है। मानवाधिकार संगठनों ने भी बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।



