नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड (India-New Zealand FTA) के बीच एफटीए को लेकर चौथे दौर की वार्ता हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस वार्ता का नेतृत्व भारत की ओर से वाणिज्य उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) और न्यूजीलैंड की ओर से व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले (Todd McClay) ने किया। दोनों देशों का कहना है कि यह समझौता केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग की दिशा में बढ़ते कदम
रोटोरुआ में हुई वार्ता के बाद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों में चौतरफा सुधार देखने को मिल रहा है। मार्च 2025 में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुली हैं। अब दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग, सूचनाओं का आदान-प्रदान और सामरिक साझेदारी की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है।
सप्लाई चेन और तकनीकी सहयोग पर फोकस
भारत की कोशिश है कि न्यूजीलैंड के साथ एक व्यापक सप्लाई चेन सहयोग स्थापित किया जाए। हालिया वार्ता में आपूर्ति श्रृंखला यानी उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल और उपकरणों की उपलब्धता पर विशेष चर्चा हुई। एफटीए के बाद दोनों देशों की कंपनियों के बीच तकनीकी व औद्योगिक सहयोग में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
वाणिज्य मंत्री गोयल का कहना है कि न्यूजीलैंड जैसे छोटे लेकिन विकसित देशों के साथ व्यापारिक समझौते भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच पर एक सकारात्मक संदेश देंगे कि भारत व्यापार के लिए खुला और भरोसेमंद देश है।
कृषि, शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाएं
न्यूजीलैंड को दुनिया के सबसे विकसित और खुले व्यापारिक देशों में गिना जाता है। भारत के साथ एफटीए से वहां की कंपनियों का निवेश भारत में बढ़ेगा, जिससे किसानों, छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नए अवसर मिलेंगे। कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार में 50 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा रही है।
भारत की न्यूजीलैंड में राजदूत नीता भूषण के मुताबिक, “यह समझौता भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और इंडो-पैसिफिक में मजबूत साझेदारी की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा।”
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भविष्य की दिशा
हालांकि न्यूजीलैंड का चीन के साथ करीब 40 अरब डॉलर का व्यापार है, लेकिन भारत के साथ एफटीए के बाद आने वाले वर्षों में तस्वीर बदलने की उम्मीद है। भारत इस साझेदारी के माध्यम से दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के बाजारों तक अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है, वहीं न्यूजीलैंड को भी भारत जैसे विशाल बाजार का लाभ मिलेगा।
दोनों देशों के मंत्री बार-बार यह दोहरा रहे हैं कि एफटीए केवल आर्थिक नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और रणनीतिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।



