नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बार फिर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने न्याय विभाग (DOJ) से चुनाव के दौरान हुई कथित धांधली की जांच करने की मांग (DOJ Investigation) की है। उन्होंने इसे “अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला” बताया है।
ट्रंप ने कहा कि 2020 का चुनाव अमेरिका (US Election 2020) के लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “2020 का राष्ट्रपति चुनाव जिसमें धांधली और चोरी हुई, वो एक बहुत बड़ा स्कैंडल है। देखो हमारे देश का क्या हुआ जब एक बदमाश बेवकूफ हमारा ‘प्रेसिडेंट’ बन गया। अब DOJ को इसे पूरे जोश के साथ जांचना चाहिए, वरना आने वाले मिडटर्म चुनावों में भी यही दोहराया जाएगा।”
मेल-इन वोटिंग और प्रपोजल 50 पर साधा निशाना
ट्रंप ने मेल-इन और अर्ली वोटिंग सिस्टम को खत्म करने की अपील की है। उनका कहना है कि यह व्यवस्था चुनावी धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए वोटर आईडी को अनिवार्य किया जाना चाहिए। ट्रंप ने कैलिफोर्निया के प्रपोजल 50 की भी आलोचना की, जिसका मकसद कांग्रेस जिलों का पुनर्गठन करना है। उन्होंने इस प्रपोजल को “बेईमान कदम” करार दिया और कहा कि लाखों बैलेट्स को गलत तरीके से भेजा जा रहा है।
उनका कहना है, “कोई मेल-इन या अर्ली वोटिंग नहीं, वोटर आईडी के लिए हां कहो। देखो कैलिफोर्निया प्रोप कितना बेईमान है! लाखों बैलेट्स भेजे जा रहे हैं। रिपब्लिकन जागो, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।”
ओबामा ने मतपत्र पहल का किया समर्थन
दूसरी ओर, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी मतपत्र पहल मतदान (Ballot Initiative Voting) का समर्थन किया है। इस पहल के लिए 4 नवंबर को वोटिंग होनी है, जबकि अर्ली वोटिंग पहले ही शुरू हो चुकी है। ओबामा का कहना है कि यह पहल मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
चुनावी धांधली के दावों पर विवाद जारी
गौरतलब है कि 2020 के चुनाव में जो बाइडेन की जीत के बाद ट्रंप ने बार-बार दावा किया था कि चुनाव में धांधली हुई थी। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों और अदालतों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया था।
इसके बावजूद ट्रंप लगातार इस मुद्दे को जिंदा रखे हुए हैं और अब उन्होंने फिर से DOJ पर दबाव बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह रणनीति 2024 और आगामी मिडटर्म चुनावों के लिए उनकी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश है।



