World Stroke Day: आयुष मंत्रालय ने स्ट्रोक प्रबंधन के लिए दिखाई राह

आयुष मंत्रालय ने स्ट्रोक रोकथाम और पुनर्वास के लिए आयुर्वेद-होम्योपैथी पर जोर दिया। शोध और जागरूकता से जीवन गुणवत्ता बेहतर करने का लक्ष्य।

Share This Article:

नई दिल्ली: आयुष मंत्रालय ने विश्व स्ट्रोक दिवस के मौके पर स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए पारंपरिक और समग्र उपायों पर जोर दिया है। यह बीमारी भारत में मौत और अक्षमता का प्रमुख कारण है। मंत्रालय का कहना है कि आयुष प्रणालियां पारंपरिक इलाज के साथ मिलकर स्ट्रोक की रोकथाम और पुनर्वास में मदद कर सकती हैं।

आयुष का समग्र दृष्टिकोण

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने बताया कि स्ट्रोक की बढ़ती समस्या के लिए व्यापक और एकीकृत स्वास्थ्य रणनीति जरूरी है। आयुष प्रणालियां रोकथाम और लंबे समय तक पुनर्वास पर ध्यान देती हैं, जो पारंपरिक इलाज को मजबूत कर सकती हैं। हम शोध और जागरूकता बढ़ाकर स्ट्रोक को कम करने और मरीजों की जिंदगी बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वैज्ञानिक शोध और सहयोग

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने बताया कि स्ट्रोक की बढ़ती समस्या के लिए व्यापक और एकीकृत स्वास्थ्य रणनीति जरूरी है। आयुष प्रणालियां रोकथाम और लंबे समय तक पुनर्वास पर ध्यान देती हैं, जो पारंपरिक इलाज को मजबूत कर सकती हैं। हम शोध और जागरूकता बढ़ाकर स्ट्रोक को कम करने और मरीजों की जिंदगी बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

स्ट्रोक और आयुर्वेद

स्ट्रोक को ‘मस्तिष्काघात’ भी कहते हैं, जो रक्त प्रवाह रुकने या फटने से होता है। आयुर्वेद में इसे वात दोष के असंतुलन से जोड़ा जाता है, जो शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या लकवा पैदा करता है। आयुर्वेद में संतुलन बहाल करने, रक्त संचार और तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने के उपाय किए जाते हैं।

होम्योपैथी का योगदान

होम्योपैथी स्ट्रोक प्रबंधन में सहायक साबित हुई है। कई अध्ययनों से पता चला है कि यह तंत्रिका सुधार, मोटर रिकवरी और जीवन गुणवत्ता में सुधार करता है।शरीर और मन का सामंजस्यआयुष प्रणालियां शरीर, मन और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर देती हैं। इनका लक्ष्य बीमारी का इलाज ही नहीं, बल्कि पुनरावृत्ति रोकना और जीवन स्तर बेहतर करना है। इससे गैर-संक्रामक बीमारियों का बोझ कम होगा।

शरीर और मन का सामंजस्य

आयुष प्रणालियां शरीर, मन और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर देती हैं। इनका लक्ष्य बीमारी का इलाज ही नहीं, बल्कि पुनरावृत्ति रोकना और जीवन स्तर बेहतर करना है। इससे गैर-संक्रामक बीमारियों का बोझ कम होगा। 

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.