WHO: 265 रुपये सालाना निवेश से बच सकती हैं करोड़ो जिंदगियां

WHO के रिपोर्ट के अनुसार, हर देश केवल 3 डॉलर (265 रुपये) गैर-संक्रामक रोगों के उपचार में निवेश करे, तो 2030 तक 1.2 करोड़ लोगों की जान बचाई जा सकती है।

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नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने अपनी ताजा रिपोर्ट जीवन बचाएं, कम खर्च करें में एक क्रांतिकारी खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि हर देश प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष केवल 3 डॉलर (लगभग 265 रुपये) गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) की रोकथाम और उपचार में निवेश करे, तो 2030 तक 1.2 करोड़ लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसके साथ ही, हृदय रोग, स्ट्रोक, कैंसर और मधुमेह जैसे रोगों से होने वाले 2.8 करोड़ मामलों को रोका जा सकता है और वैश्विक स्तर पर 15 करोड़ स्वस्थ जीवन वर्ष जोड़े जा सकते हैं। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि तंबाकू और शराब पर कर बढ़ाना, बच्चों को हानिकारक विज्ञापनों से बचाना, उच्च रक्तचाप का इलाज, और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच जैसे किफायती उपायों से यह संभव है।

छोटा निवेश, बड़ा बदलाव

डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि गैर-संक्रामक रोग, जैसे हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, और फेफड़ों से संबंधित बीमारियां, विश्व भर में हर साल 3.2 करोड़ लोगों की असमय मृत्यु का कारण बनती हैं। इनमें से 75% मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे अवसाद, चिंता और तनाव भी 100 करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित कर रही हैं। इन बीमारियों से निपटने के लिए सस्ते और प्रभावी उपाय मौजूद हैं, जिन्हें अपनाकर न केवल लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक का लाभ भी हो सकता है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस गेब्रेयेसस ने कहा, “गैर-संक्रामक रोग और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं चुपके से लोगों की जान ले रही हैं। हमारे पास समाधान हैं, लेकिन इसे लागू करने के लिए देशों को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।”

प्रगति में सुस्ती, खतरा बढ़ा

रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि 2010 से 2019 के बीच 82% देशों ने गैर-संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों में कमी दर्ज की थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में 60% देशों में इस दिशा में प्रगति धीमी पड़ गई है। चीन, दक्षिण कोरिया और डेनमार्क जैसे देशों ने उल्लेखनीय सुधार दिखाया है, लेकिन कई अन्य देशों में इन बीमारियों से मृत्यु का खतरा फिर से बढ़ रहा है। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि तंबाकू, शराब और अति-प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग अक्सर इन जीवनरक्षक उपायों को लागू करने में बाधा डालते हैं। संगठन ने सरकारों से अपील की है कि वे मुनाफे से ज्यादा लोगों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

न्यूयॉर्क में होगी अहम बैठक

25 सितंबर 2025 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की चौथी उच्च-स्तरीय बैठक (एचएलएम4) होगी, जहां विश्व के नेता गैर-संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य पर एक साहसिक नीतिगत घोषणा को अपनाने पर विचार करेंगे। डॉ. गेब्रेयेसस ने कहा, “जो देश अभी कार्रवाई करेंगे, वे न केवल लाखों जिंदगियां बचाएंगे, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगे। देरी करने वाले देश जीवन और विकास दोनों से हाथ धो बैठेंगे।”

क्या हैं जरूरी कदम?

डब्ल्यूएचओ ने कुछ प्रमुख उपाय सुझाए हैं, जो लागू करने में आसान और कम खर्चीले हैं:

तंबाकू और शराब पर कर: इनके उपयोग को कम करने के लिए कर बढ़ाना।

विज्ञापनों पर नियंत्रण: बच्चों को अस्वास्थ्यकर उत्पादों के विज्ञापनों से बचाना।

स्वास्थ्य जांच: उच्च रक्तचाप और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की नियमित जांच।

जागरूकता अभियान: स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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