Vitamin D और जिंक की कमी से भारत में बच्चों का भविष्य प्रभावित

भारत में बच्चों में Vitamin D और जिंक की कमी तेजी से बढ़ रही है। जीवनशैली और पोषण संबंधी समस्याओं के कारण किशोरों में शुगर, कोलेस्ट्रॉल और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।

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नई दिल्ली: केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की हालिया रिपोर्ट “Children in India” ने बच्चों में बढ़ती कुपोषण (Child Malnutrition India) की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 से 14 साल के बच्चों में विटामिन डी (Vitamin D Deficiency) और जिंक की कमी (Zinc Deficiency) तेजी से बढ़ रही है।

विटामिन डी की कमी

रिपोर्ट बताती है कि भारत में 1-4 साल के 14%, 5-9 साल के 18% और 10-19 साल के 24% बच्चे विटामिन डी की कमी से (Children’s Health) जूझ रहे हैं। विटामिन डी हड्डियों की मजबूती, रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है। इसकी कमी से बच्चों में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।वैसे देश में धूप प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, फिर भी बच्चों में विटामिन डी की कमी का कारण क्या है?

  • बच्चे पर्याप्त समय धूप में नहीं बिताते
  • आहार में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी
  • प्रदूषण की वजह से सूरज की किरणें कम पहुंच पाती हैं
  • मोटापा और आनुवंशिक कारण
  • फाइटेट और फॉस्फेट का अधिक सेवन, कैफीन, त्वचा का गहरा रंग

जिंक की कमी

रिपोर्ट के अनुसार, जिंक की कमी सबसे ज्यादा किशोरों में है। 10-19 साल के 32% किशोर, 1-4 साल के 19% और 5-9 साल के 17% बच्चे जिंक की कमी से पीड़ित हैं। जिंक बच्चों की वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसकी कमी से नाटेपन (stunting) और बार-बार बीमार होने का खतरा बढ़ता है। 2021 के अध्ययन के अनुसार, दुनिया में छोटे बच्चों की बीमारियों और मौतों का लगभग 4% कारण जिंक की कमी है।

जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां

10-19 साल के किशोरों में शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियां भी बढ़ रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार:

  • प्री-डायबिटीज: 10.4%
  • डायबिटीज: 0.6%
  • हाई कोलेस्ट्रॉल: 3.7%
  • हाई ब्लड प्रेशर: 4.9%

5-9 साल के एक तिहाई (34%) बच्चों में हाई ट्राइग्लिसराइड का खतरा है। किशोरों में यह 16% है। विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन से बढ़ा ट्राइग्लिसराइड भविष्य में दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम और असम में छोटे बच्चों में यह समस्या अधिक देखी गई, जबकि किशोरों में पश्चिम बंगाल, सिक्किम और मणिपुर शीर्ष पर हैं।

शिशु और बच्चों की मृत्यु दर

रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में शिशु मृत्यु दर (IMR) 25 प्रति हजार जन्म रही, जो 2022 में 26 थी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 28 जबकि शहरी क्षेत्रों में 18 है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 29 प्रति हजार रही। सबसे अधिक मृत्यु दर मध्य प्रदेश (44), उत्तर प्रदेश (42) और छत्तीसगढ़ (41) में रही, जबकि केरल में यह सबसे कम 8 दर्ज की गई।

भारत में बच्चों में विटामिन डी और जिंक की कमी, बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां और असमान स्वास्थ्य सुविधाएं बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और जीवनशैली सुधार ही इन बच्चों को स्वस्थ भविष्य दे सकता है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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