दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों ने कहा, हेल्थ डेटा एक-दूसरे से बात करेगा

दक्षिण-पूर्व एशिया के 8 देशों ने दिल्ली में खुले मानकों (FHIR) पर आधारित डिजिटल हेल्थ सिस्टम बनाने का मजबूत संकल्प दिखाया। सभी देश एक-दूसरे के साथ मरीजों का डेटा आसानी से शेयर कर सकें, इसके लिए एक ही भाषा में सिस्टम बनाने पर सहमति बनी।

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नई दिल्ली: दिल्ली में चल रहे रीजनल ओपन डिजिटल हेल्थ समिट-2025 के दूसरे दिन (21 नवंबर) बड़ा फैसला हुआ। भारत, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड और तिमोर-लेस्ते ने एक स्वर में कहा, अब हम अपने-अपने देश में ऐसा डिजिटल हेल्थ सिस्टम बनाएंगे जो एक ही मानक (FHIR) पर चलेगा, ताकि एक देश का मरीज दूसरे देश में इलाज कराने जाए तो उसका पूरा मेडिकल रिकॉर्ड तुरंत मिल जाए।

पुराना सिस्टम धीरे-धीरे बदलेगा

सभी देशों ने माना कि अभी उनके यहां अलग-अलग तरह के पुराने सॉफ्टवेयर चल रहे हैं। इन्हें एक झटके में बदलना मुश्किल है। इसलिए एडाप्टरबल की मदद से धीरे-धीरे नया FHIR सिस्टम जोड़ा जाएगा। इससे नुकसान भी नहीं होगा और काम भी चलता रहेगा।

भारत ने दिखाया अपना सफल मॉडल

भारत ने अपना HMIS, Care Expert और Care 3.0 सॉफ्टवेयर दिखाया जो पहले से ही खुला और बदलने लायक है। श्रीलंका ने बताया कि उसने बीमारी निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड में FHIR, SNOMED और ICD-11 मानक अपना लिए हैं। बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और मालदीव ने बताया कि वे छोटे-छोटे मॉड्यूल बनाकर धीरे-धीरे पूरा सिस्टम जोड़ रहे हैं। थाईलैंड ने कहा कि अलग-अलग बीमारियों के पुराने प्रोग्राम को एक साथ लाना चुनौती है, लेकिन हो जाएगा।अब पायलट नहीं, पूरा सिस्टम चाहिए

अब पायलट नहीं, पूरा सिस्टम चाहिए

विशेषज्ञों ने कहा कि अब छोटे-छोटे पायलट प्रोजेक्ट का समय गया। पूरा का पूरा डिजिटल हेल्थ सिस्टम एक साथ बनाना होगा। इसमें टेलीमेडिसिन, ड्रोन से दवा पहुंचाना, मौत के कारण का डिजिटल रिकॉर्ड, बीमारी की निगरानी सब एक ही प्लेटफॉर्म पर आएंगे।

निगरानी सिस्टम को एक करना बड़ी चुनौती

बीमारियों की निगरानी में अभी हर देश का अपना अलग डेफिनिशन और अलग सिस्टम है। WHO के SMART गाइडलाइंस और FHIR मानक अपनाने से यह समस्या दूर हो जाएगी।

कानून और भरोसा सबसे जरूरी

आखिरी सेशन में साफ कहा गया, तकनीक से ज्यादा जरूरी है भरोसा और कानून। इस दौरान मरीज का डेटा सुरक्षित रहने, प्राइवेसी का कानून मजबूत होने, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता मिलने की बातें कही, जिससे तब ही लोग डिजिटल सिस्टम पर भरोसा करेंगे।

सभी देशों ने वादा किया कि वे खुला प्लेटफॉर्म बनाएंगे, किसी एक कंपनी के सॉफ्टवेयर में नहीं फसेंगे और आने वाली AI-हेल्थ टेक्नोलॉजी को भी नियंत्रित करेंगे। समिट का संदेश साफ है, अब दक्षिण-पूर्व एशिया में हेल्थ डेटा की कोई दीवार नहीं रहेगी। एक देश का सिस्टम दूसरे देश के साथ आसानी से बात करेगा और मरीज को जहां भी इलाज चाहिए, उसका पूरा इतिहास एक क्लिक पर मिलेगा।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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