हेपेटाइटिस डे स्पेशल: भारत बना वायरल हेपेटाइटिस का गढ़, इलाज फिर भी सीमित

WHO की 2024 रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 4 करोड़ से ज्यादा लोग हेपेटाइटिस से पीड़ित हैं। बावजूद इसके, जांच और इलाज की पहुंच अब भी सीमित है।

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नई दिल्ली: हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है, जिससे इस खतरनाक और अक्सर ‘साइलेंट किलर’ मानी जाने वाली बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वायरल हेपेटाइटिस का सबसे ज्यादा बोझ है। यहां करीब 4 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी और 60 से 120 लाख लोग हेपेटाइटिस-सी से ग्रसित हैं। चिंताजनक बात यह है कि अब भी भारत में टेस्टिंग और इलाज की पहुंच बेहद सीमित है।

भारत में कहां सबसे ज्यादा मामले?
विभिन्न राज्य सरकारों और मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के जिन राज्यों में वायरल हेपेटाइटिस के मामले अधिक सामने आते हैं, वे हैं:
पंजाब: यहां खासकर हेपेटाइटिस-C के मामलों में तेजी देखी गई है। WHO की एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में कुछ जिलों में हेपेटाइटिस-C की सर्प्राइजिंग हाई प्रेवलेंस पाई गई है।
उत्तर प्रदेश: गंगा किनारे बसे शहरों में, जैसे वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर, वहां गंदा पानी और खराब स्वच्छता के चलते HAV और HEV के मामले अधिक होते हैं।
राजस्थान: जयपुर, उदयपुर जैसे शहरों में हेपेटाइटिस-A और E की कई स्थानीय रिपोर्टेड आउटब्रेक देखी गई हैं।
दिल्ली: शहरी झुग्गी इलाकों में संक्रमण की संभावना अधिक रहती है। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में हेपेटाइटिस के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
हरियाणा और हिमाचल प्रदेश: यहां दूषित पानी से HAV और HEV के कई केस सामने आ चुके हैं, खासकर मानसून के बाद।

हेपेटाइटिस के प्रकार और कारण

  • हेपेटाइटिस A और E: ये मुख्यतः फीकल-ओरल रूट से फैलते हैं। दूषित पानी, खराब स्वच्छता और खुले में शौच जैसी आदतें इसके लिए जिम्मेदार हैं।
  • हेपेटाइटिस B और C: ये ब्लड-बॉर्न वायरस हैं जो संक्रमित खून, सुई, असुरक्षित यौन संबंध और माँ से शिशु को जन्म के समय संक्रमित कर सकते हैं।
  • अन्य कारण: शराब का अत्यधिक सेवन, कुछ आयुर्वेदिक दवाएं, लंबी अवधि की दवाएं और फैटी लिवर डिजीज भी हेपेटाइटिस को जन्म दे सकते हैं।

क्यों है चिंता की बात?
बिना लक्षणों के सालों तक शरीर में रहने वाला हेपेटाइटिस B और C धीरे-धीरे लिवर को खराब करता है, जिससे लिवर सिरोसिस और कैंसर जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में अधिकांश लोग इस बीमारी से अनजान रहते हैं और इलाज न होने से यह गंभीर रूप ले लेती है। डॉ. राकेश कोचर, पूर्व प्रमुख, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के अनुसार, “जब तक लिवर सिरोसिस या फेलियर नहीं होता, तब तक कई बार हेपेटाइटिस पकड़ में नहीं आता।”

राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP)
भारत सरकार ने 2018 में NVHCP की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य है:

  • 2030 तक हेपेटाइटिस-C का पूर्ण उन्मूलन।
  • हेपेटाइटिस B और C से जुड़ी मृत्यु, बीमारी और संक्रमण को कम करना।
  • हेपेटाइटिस A और E से जुड़ी मृत्यु दर को नियंत्रित करना।
  • मुफ्त टेस्टिंग, इलाज और बर्थ डोज वैक्सीनेशन की सुविधा देना।
  • हाई-रिस्क समूहों और हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए मुफ्त हेपेटाइटिस B टीकाकरण।

रोकथाम के उपाय

  • स्वच्छ पीने का पानी और बेहतर सीवर व्यवस्था
  • व्यक्तिगत साफ-सफाई और हाथ धोने की आदत
  • सुरक्षित खून चढ़ाना और इंजेक्शन का सही उपयोग
  • जन्म के समय हेपेटाइटिस B का टीका लगवाना
  • जागरूकता अभियान और समय पर टेस्टिंग

निष्कर्ष
भारत में हेपेटाइटिस एक चुपचाप बढ़ती महामारी बन चुकी है। खराब स्वच्छता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं और जागरूकता की कमी के चलते यह समस्या और भी गंभीर होती जा रही है। हालांकि भारत सरकार ने इसे खत्म करने का मजबूत संकल्प लिया है, लेकिन जब तक समाज का हर वर्ग सतर्क नहीं होता और समय पर जांच नहीं कराता, तब तक इसका उन्मूलन मुश्किल है।

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