गोनोरिया का ‘सुपरबग’ रूप, दवाएं फेल हो रही हैं

EGASP (एन्हांस्ड गोनोकोकल एंटीमाइक्रोबियल सर्विलांस प्रोग्राम) के ताजा आंकड़ों से साफ है कि यह 'सुपरबग' वैश्विक स्वास्थ्य को झकझोर सकता है

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नई दिल्ली: कल्पना कीजिए, एक ऐसा संक्रमण जो सालों से चुपके से फैलता रहा हो, लेकिन अब डॉक्टरों की जेब से निकलने वाली दवाओं को भी चुनौती दे रहा हो। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ठीक यही चेतावनी दी है, गोनोरिया, जो यौन संपर्क से फैलने वाला एक आम बीमारी है, तेजी से एंटीबायोटिक्स के खिलाफ बगावत कर रहा है। EGASP (एन्हांस्ड गोनोकोकल एंटीमाइक्रोबियल सर्विलांस प्रोग्राम) के ताजा आंकड़ों से साफ है कि यह ‘सुपरबग’ वैश्विक स्वास्थ्य को झकझोर सकता है। विश्व एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) जागरूकता सप्ताह के बीच आई यह रिपोर्ट देशों को हिलाकर रख देने वाली है। WHO ने साफ कहा – निगरानी बढ़ाओ, जांच मजबूत करो, वरना इलाज के विकल्प सूख जाएंगे।

2022-2024: दवाओं पर बढ़ता हमला, आंकड़े जो डराते हैं

गोनोरिया के इलाज की लाइनफाइनल दवाएं अब हार मान रही हैं। EGASP के सर्वे से पता चला कि पिछले दो सालों में रेसिस्टेंस की दरें आसमान छू रही हैं:

सेफ्ट्रियाक्सोन: 0.8% से कूदकर 5% पर पहुंची – मतलब हर 20 में से एक केस में यह फेल हो सकती है।

सेफिक्सिम: 1.7% से 11% तक उछाल, जो इलाज को जटिल बना रहा।

एजिथ्रोमाइसिन: 4% पर स्थिर, लेकिन खतरा बरकरार।

सिप्रोफ्लोक्सासिन: 95% रेसिस्टेंट – यह दवा तो लगभग बेकार।

कंबोडिया और वियतनाम जैसे देशों में यह समस्या सबसे तीव्र है, जहां रेसिस्टेंट स्ट्रेन तेजी से फैल रही हैं। WHO का अनुमान: अगर यूं ही चला, तो लाखों मरीजों को नई दवाओं की तलाश करनी पड़ेगी।

12 देशों की रिपोर्ट: भारत भी लिस्ट में, 3,615 केसों का खुलासा

यह पहली बार नहीं कि EGASP ने आंकड़े जुटाए, लेकिन 2024 में स्केल चौंका देने वाला है। 2022 में सिर्फ 4 देशों से डेटा आया था, अब 12 देशों ने शेयर किया – कुल 3,497 मरीजों में 3,615 गोनोरिया केस। इनमें भारत भी शामिल है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया का हिस्सा बनकर नजर आया।

क्षेत्रीय ब्रेकडाउन:

पश्चिमी प्रशांत: 52% केस (फिलीपींस 28%, वियतनाम 12%, कंबोडिया 9%, इंडोनेशिया 3%)।

अफ्रीका: 28% (मलावी, दक्षिण अफ्रीका, युगांडा)।

दक्षिण-पूर्व एशिया: 13% (थाईलैंड, भारत)।

पूर्वी भूमध्यसागरीय: 4% (कतर)।

अमेरिका: 2% (ब्राजील)।

यूरोप: स्वीडन से योगदान।

ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या अब सीमाओं से परे है। एशिया से अफ्रीका तक, हर कोने में घुसपैठ।

मरीजों की प्रोफाइल: युवा, एक्टिव, लेकिन जोखिम में

जिन मरीजों का डेटा आया, वे ज्यादातर युवा हैं। औसत उम्र 27 साल (12 से 94 तक रेंज)। चौंकाने वाली बातें:

20% पुरुष जो पुरुषों के साथ रिलेशनशिप में हैं (MSM)।

42% ने पिछले महीने में एक से ज्यादा पार्टनर बताए।

8% ने हाल में एंटीबायोटिक्स ली थीं, जो रेसिस्टेंस को और बढ़ावा देती हैं।

19% ने हाल में ट्रैवल किया, जो संक्रमण फैलाने का बड़ा फैक्टर।

यह ट्रेंड साफ करता है: शहरी जीवनशैली और ग्लोबल मूवमेंट रेसिस्टेंस को ईंधन दे रहे हैं। महिलाओं के डेटा की कमी एक बड़ी खाई है, जो समस्या को और गहरा बनाती है।

WHO के प्रयास: जीनोमिक ट्रैकिंग से नई दवाओं तक

WHO ने 2024 में गति पकड़ी है। 8 देशों से 3,000 सैंपल्स का जीनोमिक एनालिसिस किया गया। फोकस नई दवाओं पर: जोलिफ्लोडासिन, गेपोटिडासिन जैसी उम्मीदें। टेट्रासाइक्लिन रेसिस्टेंस पर स्टडीज चल रही हैं, और डॉक्सीसाइक्लिन को प्रिवेंटिव टूल के तौर पर टेस्ट हो रहा। EGASP का विस्तार: नए मेंबर्स जैसे ब्राजील, कोटे डी’इवोअर, कतर। भारत 2025 से नेशनल HIV/STI प्रोग्राम के तहत रिपोर्टिंग शुरू करेगा। ये कदम डेटा को मजबूत बनाएंगे, ताकि रेसिस्टेंस के फैलाव को रोका जा सके।

बड़ी बाधाएं और रोडमैप: क्या करें देश?

चुनौतियां कड़ी हैं: फंडिंग की तंगी, अधूरी रिपोर्टिंग, महिलाओं और जननांग साइट्स से डेटा का घोर अभाव। WHO की सलाह साफ:

नेशनल सर्विलांस सिस्टम को अपग्रेड करो।

टेस्टिंग और डायग्नोसिस को हर जगह पहुंचाओ।

नई दवाओं को सभी के लिए उपलब्ध कराओ।

गोनोरिया मॉनिटरिंग को STI प्रोग्राम्स में घोल दो।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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