नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 2025-26 शैक्षणिक सत्र से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए “हब एंड स्पोक काउंसलिंग मॉडल” शुरू किया है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसका लक्ष्य हर छात्र को समय पर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहायता प्रदान करना है। बढ़ते शैक्षिक दबाव, तनाव और चिंता के बीच यह मॉडल बच्चों को उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढने में मदद करेगा।
मॉडल का उद्देश्य
इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में एक सहयोगी नेटवर्क बनाना है, ताकि प्रत्येक बच्चे को मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से मिल सकें। यह न केवल छात्रों को तनाव, चिंता और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं से निपटने में सहायता देगा, बल्कि स्कूलों की परामर्श क्षमता को भी मजबूत करेगा। इसके जरिए जीवन कौशल और आत्मविश्वास को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
हब और स्पोक मॉडल की कार्यप्रणाली
इस मॉडल में स्कूलों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
- हब स्कूल: ये मुख्य केंद्र होंगे, जहां प्रशिक्षित काउंसलर और स्वास्थ्य शिक्षक होंगे।
- स्पोक स्कूल: ये हब स्कूलों से जुड़े रहेंगे और उनके मार्गदर्शन में गतिविधियां लागू करेंगे।
हब और स्पोक स्कूल मिलकर कार्यशालाएं, समूह परामर्श और व्यक्तिगत काउंसलिंग सत्र आयोजित करेंगे। ये गतिविधियां बच्चों को तनाव प्रबंधन, सहपाठी सहयोग और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करेंगी।
प्रिंसिपल और काउंसलर की जिम्मेदारी
स्कूल प्रिंसिपल इस मॉडल की रीढ़ होंगे। वे सभी गतिविधियों की निगरानी करेंगे और काउंसलरों को दिशा-निर्देश देंगे। काउंसलर बच्चों की समस्याएं सुनेंगे और उन्हें समाधान की दिशा में मार्गदर्शन करेंगे, जैसे कि परीक्षा का दबाव कम करना या सामाजिक तालमेल बनाना।
रिपोर्टिंग और निगरानी
सीबीएसई ने पारदर्शी निगरानी के लिए गूगल फॉर्म आधारित रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया है। स्पोक स्कूल अपनी मासिक रिपोर्ट हब स्कूल को भेजेंगे, जो इसे हर महीने की 5 तारीख तक सीबीएसई को प्रेषित करेंगे। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि काउंसलिंग गतिविधियों का प्रभावी मूल्यांकन हो।



