गिद्ध हो रहे गायब, फूड चेन पर छाया संकट

गिद्धों की घटती आबादी पर पर्यावरणविद सुमित डूकिया कहते हैं पुराने और बड़े पेड़ों का न होना, खनन और आवारा कुत्तों की संख्या में वृद्धि, गिद्धों की कमी के मुख्य कारण हैं...

Share This Article:

गिद्धों को “प्राकृतिक सफाईकर्मी” कहा जाता है। वे मृत जानवरों का भोजन करते हैं और फूड चेन की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। लेकिन फूड चेन की इस कड़ी पर लगातार अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।  एक अध्ययन बताता है कि गिद्धों की 90 प्रतिशत से ज्यादा आबादी कम होने के बावजूद संकट कम नहीं हो रहे हैं। भोजन की कमी, खनन, बिजली की तारों से करंट लगना जैसे संकट गिद्धो की संख्या कम कर रहे हैं। इसी अध्ययन के अनुसार गिद्धों के घोंसले की संख्या भी काफी घट गई है। उदाहरण के लिए, पुराने अध्ययन में जिस जगह 36 घोंसले मिले थे, उसी क्षेत्र में अब सिर्फ 14 घोंसले मिले।

गिद्धों की घटती आबादी से बढ़ती महामारी

इस बारे में पर्यावरणविद सुमित डूकिया कहते हैं “एक समय में जो मृत मवेशी चंद घंटों में गिद्धों द्वारा पिंजर में बदल दिए जाते थे, अब वह कई दिनों तक मानव बस्ती की सरहदों पर सड़ते देखे जा सकते हैं”। मृत पशुओं को खाने वाले ये गिद्ध, अन्य जानवरों और मनुष्यों के संपर्क में आने वाले रोगजनकों जैसे एंथ्रेक्स, क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम और रेबीज़ जैसे रोगाणुओं के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। लेकिन अगर ये शव ज़मीन पर पड़े रहते हैं तो कुत्ते और चूहे जैसे जानवर उन्हें खाते हैं, जिस कारण रोग फैलने की ज्यादा संभावना होती है।

कैसे कम हुई गिद्धों की आबादी

सुमित डूकिया बताते हैं “गिद्धों की भारत में 9 प्रजातियां पाई जाती हैं और लगभग सभी प्रजातियों को संकटग्रस्त और अति संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में दर्ज किया गया है, जिसका अर्थ है कि इनके अस्तित्व को लेकर संकट व्याप्त है। वर्ष 1999 में प्रकाशित हुए शोध परिणाम में यह निकलकर सामने आया कि कुछ प्रजातियों की संख्या में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा कमी आई है”।  

इनके इस स्थिति के पीछे मुख्य कारण है मवेशियों में लगाई जाने वाली दर्द निवारक दवा डायक्लोफेनाक (Diclofenac) जिसके खाने से गिद्धों की किडनी फेल हो जाती है और वे मर जाते थे। इसके अलावा (क) पुराने और बड़े पेड़ों का नहीं होना, (ख) पहाड़ी भूभागों में अनवरत खनन और (ग)पिछले कुछ वर्षों से आवारा कुत्तों की संख्या में वृद्धि जिस कारण बचे हुए गिद्धों को कुत्तों के साथ भोजन प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है, कारण हैं।

भारत के गिद्ध बचाने के लिए प्रयास

1993 से 2003 के बीच भारत की गिद्ध आबादी में 96% की गिरावट से चिंतित होकर केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर गिद्धों की रक्षा के लिए दो कार्य योजनाएं बनाईं- पहली 2006 में और दूसरी 2020-25 के लिए। इन कार्य योजनाओं के तहत कई प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे गिद्ध प्रजनन केंद्रों की स्थापना, डायक्लोफेनाक के प्रयोग पर रोक, गिद्धों के अनुकूल क्षेत्र (Vulture Safe Zones) का निर्माण, प्रजनन और पुनर्वास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

गिद्ध संरक्षण में समुदाय का योगदान है महत्वपूर्ण

शोधकर्ता मानते हैं गिद्धों के संरक्षण में समुदाय की भागीदारी बहुत जरूरी है। स्थानीय महिलाएँ, युवा और समुदाय समूह सर्विलांस, शिक्षा और जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन्हें प्रशिक्षण और संसाधन देकर “वन हेल्थ” नजरिए को अपनाया जा सकता है, जहाँ इंसानों, जानवरों और पर्यावरण का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा होता है।

WWF इंडिया, UNDP और अन्य संस्थाएँ इस तरह के कार्यक्रम चला रही हैं, जो गिद्धों को बचाने के साथ-साथ महामारी की रोकथाम में मदद कर सकते हैं।

भारत में गिद्धों की कुल 9 प्रजातियों के नाम 

गिद्धों की कुल 9 प्रजातियाँ भारत में पाई जाती हैं, जिसमें से 6 प्रजातियाँ भारत की निवासी हैं, जो निम्न हैं – 1 सफ़ेद दुम वाले गिद्ध, 2 भारतीय गिद्ध, 3. पतले चोंच वाले गिद्ध, 4. लाल सिर वाले गिद्ध, 5. दाढ़ी वाले गिद्ध,  6. मिस्र के गिद्ध।

इसमे तीन प्रवासी प्रजातियाँ हैं:- 1.सिनेरियस गिद्ध, 2.ग्रिफ़ॉन गिद्ध,  3.हिमालयन गिद्ध।

इन 9 प्रजातियों में से अधिकांश के विलुप्त होने का खतरा है।

आभार : डॉ सुमित डूकिया, एसोसिएट प्रोफेसर
पर्यावरण प्रबंधन विभाग,
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय,
नई दिल्ली

Kuldeep Dwivedi

kuldeepd999@gmail.com

NewG India का अनुभवी चेहरा, 2017 में RGPV से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। सिविल सर्विसेज कोच और लेखक के तौर पर शिक्षाकुल, एग्जामपुर, कॉसमॉस पब्लिकेशन जैसे अनेक संस्थानों में काम करने का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में NewG India में एंकर एवं रिसर्च स्कॉलर के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.