भारत में इस बार कड़ाके की सर्दी की आशंका, La Nina लाएगा ठंडी लहरें

विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर 2025 से लेकर फरवरी 2026 तक ला नीना (la Nina) का असर देखने को मिल सकता है, जिससे उत्तर भारत में ठंडी लहरें और हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी होने की संभावना है।

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नई दिल्ली: इस साल सर्दियों में भारत में ठंड का प्रकोप बढ़ सकता है, क्योंकि मौसम वैज्ञानिकों ने ला नीना (La Nina) की स्थिति बनने की चेतावनी दी है। ला नीना के कारण प्रशांत महासागर का तापमान ठंडा हो जाता है, जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करता है और भारत में सर्दियों को और सर्द बना सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्टूबर 2025 से लेकर फरवरी 2026 तक ला नीना का असर देखने को मिल सकता है, जिससे उत्तर भारत में ठंडी लहरें और हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी होने की संभावना है।

ला नीना क्या है और इसका भारत पर असर

ला नीना एक ऐसी जलवायु स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है। यह मौसम के पैटर्न को बदल देता है, जिसका असर भारत सहित पूरी दुनिया पर पड़ता है। अमेरिका की नेशनल वेदर सर्विस के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने 11 सितंबर 2025 को बताया कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच ला नीना बनने की 71% संभावना है। यह संभावना दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक थोड़ी कम होकर 54% हो सकती है, लेकिन इसका प्रभाव बना रहेगा। भारत में ला नीना का मतलब है लंबी और तीव्र ठंडी लहरें, खासकर उत्तर भारत, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल जैसे राज्यों में।

भारत मौसम विभाग की भविष्यवाणी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपनी हालिया ENSO (एल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन) रिपोर्ट में बताया कि अभी मौसम तटस्थ है, यानी न तो एल नीनो और न ही ला नीना की स्थिति है। लेकिन मॉनसून के बाद, यानी अक्टूबर से, ला नीना की संभावना बढ़ सकती है। IMD के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि उनके मॉडल्स 50% से ज्यादा संभावना दिखा रहे हैं कि इस साल के अंत में ला नीना विकसित हो सकता है। इसका मतलब है कि सर्दियां सामान्य से ज्यादा ठंडी हो सकती हैं। हालांकि, ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण कुछ गर्मी का असर रहेगा, लेकिन ठंडी हवाएं और बर्फबारी बढ़ने की आशंका है।

निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट का अनुमान

निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काइमेट के प्रमुख जीपी शर्मा ने कहा कि प्रशांत महासागर का तापमान पहले ही सामान्य से नीचे जा चुका है। अगर यह तापमान लगातार तीन तिमाहियों तक -0.5 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है, तो इसे ला नीना घोषित किया जा सकता है। शर्मा के मुताबिक, 2024 के अंत में भी ऐसी ही स्थिति देखी गई थी, जब नवंबर से जनवरी तक हल्का ला नीना प्रभाव रहा। इस बार भी भारत में ठंडी सर्दियां, खासकर हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी की संभावना है। उन्होंने यह भी बताया कि ला नीना का असर अमेरिका में सूखे की स्थिति ला सकता है, जबकि भारत में ठंड और बर्फबारी बढ़ाएगा।

वैज्ञानिक अध्ययन भी दे रहे चेतावनी

आईआईएसईआर मोहाली और ब्राजील के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च के एक हालिया अध्ययन ने भी ला नीना के प्रभावों की पुष्टि की है। इस अध्ययन के अनुसार, ला नीना के दौरान उत्तरी गोलार्ध से ठंडी हवाएं भारत की ओर आती हैं, जिससे उत्तर भारत में ठंडी लहरें लंबी और तीव्र हो जाती हैं। खासकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में सर्दियों का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। हिमालयी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी का स्तर बढ़ सकता है, जो पर्यटन के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए चुनौतियां भी लाएगा।

तैयार रहें: ठंड से बचाव के उपाय

ला नीना की वजह से इस बार सर्दियां कठिन हो सकती हैं। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि लोग समय से पहले गर्म कपड़े, हीटर और अन्य जरूरी चीजें तैयार कर लें। खासकर बुजुर्गों और बच्चों का ध्यान रखना जरूरी होगा, क्योंकि ठंडी लहरें स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। साथ ही, हिमालयी क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को मौसम की जानकारी रखनी चाहिए।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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