नई दिल्ली: हाल ही में नेपाल में हुए तख्तापलट ने दुनिया का ध्यान खींचा है। युवाओं के गुस्से और हिंसक प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने और देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया, जिसमें कई लोग हताहत हुए। यह घटना नेपाल की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरा सवाल उठाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में तख्तापलट का इतिहास कितना पुराना है और पहली बार यह कहां हुआ था? आइए इसकी कहानी जानते हैं।
दुनिया का सबसे पहला तख्तापलट
इतिहास में दर्ज पहला तख्तापलट अफ्रीकी देश टोगो में 13 जनवरी 1963 को हुआ। इस दौरान राष्ट्रपति सिल्वानस ओलंपियो की असंतुष्ट सैनिकों ने हत्या कर दी, जिसे अफ्रीका में स्वतंत्रता के बाद सत्ता के असंवैधानिक हस्तांतरण का पहला उदाहरण माना जाता है। यह घटना अफ्रीकी देशों में तख्तापलट की शुरुआत थी। सूडान, नाइजीरिया और बुर्किना फासो जैसे देशों में भी बाद में कई बार सत्ता का उलटफेर हुआ। टोगो का यह तख्तापलट सैन्य असंतोष और राजनीतिक अस्थिरता का परिणाम था, जो बाद में अन्य देशों में भी देखा गया।
भारत के पड़ोस में तख्तापलट की घटनाएं
भारत के पड़ोसी देशों में तख्तापलट कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान में 1958, 1977 और 1999 में सैन्य तख्तापलट हुए, जिनमें 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ की सरकार को हटाया। बांग्लादेश में भी कई बार सत्ता परिवर्तन हिंसक तरीकों से हुआ। श्रीलंका में 2022 में आर्थिक संकट के कारण जनता का आक्रोश सरकार के पतन का कारण बना। अब नेपाल भी इस सूची में शामिल हो गया है, जहां युवा आंदोलन ने सत्ता को चुनौती दी।
तख्तापलट के कारण और प्रभाव
तख्तापलट अक्सर राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट और सैन्य हस्तक्षेप के कारण होते हैं। कमजोर लोकतांत्रिक संस्थाएं और सत्ता का केंद्रीकरण इसे और बढ़ावा देता है। ये घटनाएं न केवल देश की स्थिरता को प्रभावित करती हैं, बल्कि आम जनता को भी लंबे समय तक प्रभावित करती है।



