जल्द खत्म हो जाएगा जंगल का लाल आतंक!

जंगल में चारों तरफ से घिर चुके माओवादी अब बाहर निकलने के लिए तड़फड़ा रहे हैं। उनमें पैदा हुआ यह डर अमन-चैन के लिए बेहतर है। जल्द ही सुकुन मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

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छत्तीसगढ़: केन्द्रीय फोर्स व स्थानीय पुलिस का भयंकर दबाव, जनता के बीच अब पकड़ न रह जाना, नया कैडर चार वर्षों से तैयार न होना, धीरे-धीरे आर्थिक अवैध उगाही पर प्रतिबंध, इन तमाम अवरोधों से जंगल में कभी आतंक मचाने वाले माओवादी जल्द ही इतिहास बन जाएंगे। हाल में जारी माड डिविजन कमेटी की सचिव सणिता ऊर्फ रनीता के पत्र ने माओवादियों के दो फाड़ की सूचना तो दे ही रही है। इसके साथ ही इस बात को यह पत्र जाहिर कर रहा है कि उन पर सरकार की कार्रवाई भारी पड़ रही है। अब माओवादियों में डर पैदा हो गया है।
हालांकि माओवादी संगठन का रास्ता इतना जटिल रहा है कि वहां जाने के बाद यदि बाहर आते हैं तो माओवादियों की गोली खाते और भीतर रहने पर पुलिस गोली से जाना होता था। इसी आतंक के कारण एक बार आतंक के दलदल में फंस जाने के बाद तड़फाड़हट महसूस करने के बावजूद बाहर नहीं निकल पाते थे और उनका अंत गोलियों से ही होता था। वर्तमान में सरकार ने चारों तरफ से घेर लिया है। इस कारण माओवादी एक्टिव मोड में नहीं रह गये हैं। अब वे सिर्फ अपनी सुरक्षा के लिए पनाह खोजते फिरते हैं। पुलिस उनको घेरती चल रही है।

पहले 17 सितंबर को अभय ने जारी किया पत्र

इसी का नतीजा है कि माओवादियों के उच्च स्तरीय नेताओं द्वारा लगातार समझौता के लिए पत्र जारी हो रहे हैं। उन्हीं पत्रों में एक माड डिविजन के सचिव का पत्र भी है। पहले 17 सितंबर को माओवादियों का एक पत्र जारी होता है, जिसमें हथियार त्यागने की बात की गयी थी। यह पत्र 15 अगस्त को कामरेड अभय द्वारा लिखा गया था, लेकिन यह बाद में जारी किया गया। इसमें आत्मसमर्पण के लिए सरकार से एक माह का समय मांगा गया था। अभी सरकार इसके प्रांसगिकता पर विचार कर ही रही थी कि सोशल मीडिया पर तेलंगाना स्टेट कमेटी के प्रतिनिधि जगन ने इसे अभय की निजी राय बता दी।

पोलित ब्यूरो के सदस्य सोनू का किया है समर्थन

इसके बाद चार अक्टूबर को माड डिविजन कमेटी के सचिव सणीता उर्फ रणीता की तरफ से पत्र जारी कर आत्म समर्पण की बात कही गयी। इसमें सणीता ने लिखा है कि हमारे पोलित ब्यूरो सदस्य कामरेड सोनू के नेतृत्व में लिए गये सशस्त्र संघर्ष त्यागने का निर्णय को हमारी माड़ डिविजनल कमेटी समर्थन कर रही है। हमारे डिविजन में मौजूद कई विभागों के साथी भी इसके पक्ष में हैं। इससे पहले भी शांतिवार्ता की कोशिशों का समर्थन किये थे। उसने आगे लिखा है कि देश और दुनिया में बदलते परिस्थितियों को सही पहचान कर उसके मुताबिक क्रांतिकारी आंदोन में जरूरी बदलाव करने में हमारी केंद्रीय कमेटी विफर रही। इस कारण आंदोलन लगातार कमजोर होते आया।

सणिता ने लिखा है, आंदोलन में जनता की सक्रिय भागीदारी हुई कम

उसने लिखा है कि आंदोलन में जनता का सक्रिय भागीदारी भी कम हुई। आंदोलन को मजबूत करने व आगे बढ़ाने के कई मौके मिले, लेकिन हम इस्तेमाल नहीं कर सके। इस स्थिति में सशस्त्र संघर्ष को त्यागकर सभी मित्र संगठनों से मिलकर जनता के बीच में काम करने का निर्णय हमने लिया है। इसके लिए सणीता ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि इस निर्णय को डिविजन में मौजूद पार्टी और जन निर्माणों के साथियों को समझाने की जरूरत है। लगातार जारी दमन अभियानों के बीच इस काम को पूरा नहीं कर सकेंगे। इसके लिए कुछ समय के लिए पुलिस गश्त अभियानों को स्थगित करे, इसी महीना की 15 तारीख से पहले इस काम को पूरा करेंगे।

कुछ वर्ष के लिए हो जाएगा शांत

अब सवाल यह है कि सणिता के हथियार त्यागने से माड डिविजन नक्सल मुक्त हो जाएगा? इसका उत्तर बताना अभी कठिन है, लेकिन इतना तो तय है कि कुछ वर्षों के लिए यह शांत हो जाएगा। आमजन सुकुन की जिंदगी जी सकेंगे। नक्सलियों का दबाव तो अभी से खत्म हो चुका है। यही कारण है कि आए दिन नक्सली या तो मारे जा रहे हैं या सरेंडर कर रहे हैं। जंगल में एक तरह से नक्सलियों के बीच हाहाकार मचा हुआ है।

अभय ने हथियार छोड़ने के लिए मांगा था एक माह का समय

केंद्रीय कमेटी प्रवक्ता अभय ने जो पत्र जारी किया था, उसमें लिखा गया था कि ” मार्च 2025 के आखिरी सप्ताह से हमारी पार्टी सरकार के साथ शांति की वार्ता के लिए प्रयास कर रही है। पार्टी ने हथियार छोड़ने के लिए सीनियर नक्सली कामरेड से सलाह मशविरा के लिए एक माह का समय मांगते हुए सीजफायर की मांग की थी, लेकिन केंद्र की तरफ से इसका कोई जवाब नहीं आया, बल्कि इस दौरान हमले और तेज कर दिए गए।”
अभय के पत्र के बाद चर्चा तेज हो गई कि नक्सली अब मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। हालांकि अंत तक यह तय नहीं हो पाया कि केंद्रीय कमेटी प्रवक्ता अभय द्वारा ही भेजा गया है। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री सह गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी पत्र की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया था। साथ ही यह भी कहा था कि यदि हथियार छोड़कर नक्सली वार्ता के लिए आते हैं तो निश्चित तौर पर बात की जाएगी।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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