11 हजार फ़ीट की ऊंचाई पर योग कार्यक्रम हो या सोवा रिग्पा चिकित्सा पद्धति पर अस्पताल का लोकार्पण; 2014 से सत्ता में आने के बाद बीजेपी सरकार ने इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को ख्याति दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इन्ही उद्देश्यों की खातिर नवम्बर 2019 में राष्ट्रीय सोवा रिग्पा संस्थान की भी स्थापना की गई थी। यह संस्थान एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) के तहत स्कूल बस दान की है।
क्या है CSR ?
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) एक ऐसा बिज़नेस मॉडल है जिसमें कंपनियाँ न केवल अपने मुनाफ़े के लिए बल्कि समाज, पर्यावरण और अपने शेयर होल्डर के प्रति भी ज़िम्मेदार होती हैं। सीएसआर पहलों का मूल उद्देश्य दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव डालना है, और इसके तहत कंपनियाँ परोपकार, नैतिक व्यावसायिक प्रथाओं, पर्यावरण के अनुकूल संचालन और सामाजिक न्याय के लिए प्रयास करती हैं।
सोवा-रिग्पा के बारे में
सोवा-रिग्पा चिकित्सा की एक प्रणाली है जो दुनिया भर में सबसे पुरानी चिकित्सा परंपराओं में से एक है। सोवा-रिग्पा शब्द का अर्थ है हीलिंग ऑफ नॉलेज। यह प्रणाली लद्दाख, हिमाचल प्रदेश (स्पीति और लाहौल), जम्मू और कश्मीर, पश्चिम बंगाल, दार्जिलिंग, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे हिमालयी समाजों में लोकप्रिय है। इसे अमची चिकित्सा पद्धति के रूप में भी जाना जाता है।

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सोवा-रिग्पा, भारत के साथ चीन, मंगोलिया, नेपाल, रूस और भूटान में भी प्रचलित है। सोवा- रिग्पा को आयुर्वेदिक दर्शन के समान माना जाता है। 75 प्रतिशत से अधिक सोवा-रिग्पा परीक्षण आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध प्रदर्शनी अष्टांग हृदय से प्राप्त किए गए हैं। भारतीय मूल की कई दवाएं जैसे अश्वगंधा, गुग्गुल, त्रिफला, अशोक, हरिद्रा, आदि का उपयोग सोवा-रिग्पा प्रणाली में उपचार के लिए किया जाता है।



