नई दिल्ली: 79वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने लगातार 12वीं बार शुक्रवार लाल किले की प्राचीर से देश का संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया का सख्त संदेश दिया है। खासतौर पर पाकिस्तान से बार-बार आने वाली परमाणु धमकियों पर। पीएम मोदी ने कहा कि भारत परमाणु ब्लैकमेल बर्दाश्त नहीं करेगा। इसका करारा जवाब दिया जाएगा।
इसके साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने सिंधु जल संधि को लेकर कहा कि भारत का पानी दुश्मनों की धरती को सींचता था, जबकि हमारी धरती प्यास थी। अब भारत और उसके किसानों को अपने पानी का अधिकार होगा। किसानों और राष्ट्र के कल्याण के लिए हम सिंधु जल संधि से सहमत नहीं हैं।
भारत ने पाक को चेताया, ‘दुस्साहस का अंजाम बुरा होगा’
इससे पहले बृहस्पतिवार भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को अपनी बयानबाजी पर संयम रखने की चेतावनी दी और कहा कि अगर कोई भी दुस्साहस किया गया तो उसके ‘दर्दनाक परिणाम’ होंगे, जैसा कि हाल ही में देखने को मिला। यह बयान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और बिलावल भुट्टो के भारत विरोधी बयानों के बाद आया है।
पाकिस्तानी नेताओं की गीदड़भभकी
पिछले कुछ दिनों में, पाकिस्तान के कई शीर्ष नेताओं ने भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए हैं।
शहबाज शरीफ: सिंधु जल संधि को लेकर शरीफ ने धमकी दी थी कि अगर भारत पाकिस्तान का एक भी बूंद पानी रोकने की कोशिश करेगा तो उसे ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि वह कान पकड़ने पर मजबूर हो जाएगा।
आसिम मुनीर: पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने अमेरिका दौरे के दौरान परमाणु हमले की धमकी देते हुए कहा था कि अगर भविष्य में भारत के साथ युद्ध होता है और पाकिस्तान के अस्तित्व पर खतरा मंडराता है तो वह अपने साथ ‘आधी दुनिया’ को भी ले जाएगा।
बिलावल भुट्टो: बिलावल भुट्टो ने भी भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला था।
भारत का कड़ा जवाब
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने पाकिस्तानी नेतृत्व द्वारा भारत के खिलाफ लगातार जारी लापरवाह, युद्धोन्मादी और घृणास्पद टिप्पणियों की खबरें देखी हैं। उन्होंने आगे कहा, “अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार भारत-विरोधी बयानबाजी करना पाकिस्तानी नेतृत्व की जानी-मानी आदत है। पाकिस्तान को अपनी बयानबाजी पर संयम रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि किसी भी दुस्साहस के दर्दनाक परिणाम होंगे, जैसा कि हाल ही में देखने को मिला।”
इस बयान में भारत ने मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी जिक्र किया, जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक भीषण संघर्ष हुआ था। इस दौरान, भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान पर कई हवाई हमले किए थे।
सिंधु जल संधि और परमाणु धमकी
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया था। इस फैसले से पाकिस्तान तिलमिला गया था। पहले तो उसने भारत से पानी देने की मांग की, लेकिन बाद में धमकी भरी बयानबाजी पर उतर आया।
मुनीर के परमाणु हमले की धमकी पर भारत ने अमेरिका को भी एक संदेश दिया था, जिसमें कहा गया था कि यह खेदजनक है कि ये टिप्पणियाँ एक मित्रवत तीसरे देश की धरती से की गई हैं। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि परमाणु हथियारों की धमकी देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है और भारत अपनी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
सिंधु जल संधि पर भारत का ‘नो’ मूड, फैसले को किया खारिज
भारत ने स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) के उस फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें भारत से संधि का पालन करने और पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया था। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत इस तथाकथित न्यायालय की वैधता को स्वीकार नहीं करता है और यह फैसला भारत के जल इस्तेमाल के अधिकारों पर कोई असर नहीं डालेगा। पीएम ने लाल किले से भी यही बात दुहराई कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।
इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता में पाकिस्तान द्वारा दिए गए बयानों और न्यायालय के फैसले पर भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया। जायसवाल ने कहा, “भारत इस तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय की वैधता, औचित्य या क्षमता को कभी स्वीकार नहीं करता। न्यायालय के फैसले का कोई आधिकारिक आधार नहीं है और यह भारत के जल इस्तेमाल के अधिकारों पर कोई असर नहीं डालता।”
क्या है सिंधु जल संधि
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक (World Bank) की मध्यस्थता से हुई थी। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज) के जल के उपयोग को नियंत्रित करती है।
पश्चिमी नदियां: सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान को मिला था। हालांकि, भारत को पश्चिमी नदियों के पानी का इस्तेमाल बिजली उत्पादन जैसे “गैर-उपभोग” उद्देश्यों के लिए करने की अनुमति है, लेकिन इसके लिए कुछ खास शर्तें हैं।
पूर्वी नदियां: रावी, ब्यास, और सतलुज का उपयोग भारत के लिए था।
हाल के वर्षों में, भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रातले जैसी जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई थी, जिसे उसने संधि का उल्लंघन बताया। पाकिस्तान ने इसी के चलते मध्यस्थता न्यायालय में शिकायत दर्ज की थी, जिसका फैसला अब भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है।
हाल के विवाद की जड़ क्या है?
आतंकवादी हमला: इस पूरे विवाद की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बर्बर आतंकवादी हमले से हुई। इस हमले में कई भारतीय नागरिकों की जान चली गई थी। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया।
भारत का निर्णय: इस हमले के जवाब में, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला किया। इसी कड़ी में भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित (suspend) करने का संप्रभु निर्णय लिया। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता, तब तक वह इस संधि का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है।
पाकिस्तान की आपत्ति: पाकिस्तान ने भारत के इस कदम का विरोध किया और इसे संधि का उल्लंघन बताया। पाकिस्तान ने भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रातले जैसी जलविद्युत परियोजनाओं पर भी आपत्ति जताई और दावा किया कि ये परियोजनाएं संधि के नियमों का उल्लंघन करती हैं।
स्थायी मध्यस्थता न्यायालय और भारत का रुख
पाकिस्तान की शिकायत: पाकिस्तान ने अपनी आपत्तियों को लेकर हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय में शिकायत दर्ज की। न्यायालय ने हाल ही में फैसला सुनाया कि भारत को पश्चिमी नदियों के पानी को पाकिस्तान के लिए सुनिश्चित करना चाहिए।
भारत ने खारिज किया फैसला: भारत ने इस फैसले को मानने से साफ इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत इस तथाकथित न्यायालय की वैधता और अधिकार क्षेत्र को कभी स्वीकार नहीं करता। भारत का मानना है कि इस तरह के मामलों को हल करने के लिए तटस्थ विशेषज्ञ तंत्र (neutral expert mechanism) का इस्तेमाल होना चाहिए, न कि न्यायालय का।
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भारत का कड़ा संदेश: वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल मुनीर द्वारा दिए गए भड़काऊ बयानों की भी आलोचना की है और कहा है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाता रहेगा।
भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी जल परियोजनाओं को राष्ट्रीय हितों और विकास की आवश्यकताओं के अनुरूप जारी रखेगा और किसी भी तीसरे पक्ष के दबाव में नहीं आएगा।



