नई दिल्ली: वैज्ञानिक समुदाय लंबे समय से मंगल ग्रह पर जीवन के अवशेषों की तलाश में लगा हुआ है। अरबों वर्ष पुरानी इस लाल ग्रह (Mars) पर कभी बहते नद-नालों और झीलों के प्रमाण पहले ही मिल चुके हैं, लेकिन अब नासा के पर्सिवियरेंस रोवर ने एक ऐसी खोज की है जो इस सवाल को नई ऊंचाई दे रही है, क्या मंगल पर कभी सूक्ष्म जीव फले-फूले होंगे? टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी की अगुवाई वाली अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने जेजेरो क्रेटर के ब्राइट एंजेल इलाके में चट्टानों से मिले रासायनिक निशानों का विश्लेषण किया है, जो जीवन से जुड़े हो सकते हैं। यह अध्ययन हाल ही में प्रतिष्ठित नेचर जर्नल में छपा है।
ब्राइट एंजेल: पानी की पुरानी यादें संजोए क्षेत्र
जेजेरो क्रेटर के इस हिस्से में हल्के रंग की चट्टानें हैं, जो बारीक मिट्टी जैसे कणों से बनी लगती हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये संरचनाएं प्राचीन जल स्रोतों से जुड़ी हैं, जब अरबों साल पहले यहां नदियां बहती थीं और एक बड़ा तालाब फैला हुआ था। रोवर ने यहां गहन जांच की, जिसमें लोहे के ऑक्साइड, फॉस्फोरस, सल्फर के अलावा जैविक कार्बन के स्पष्ट संकेत मिले। जैविक कार्बन को जीवन का मूल तत्व माना जाता है, हालांकि यह उल्कापिंडों या अन्य गैर-जीवित स्रोतों से भी उत्पन्न हो सकता है।
रसायनिक प्रक्रियाओं में जीवन का इशारा
रोवर के अध्ययन से चट्टानों में असामान्य आकृतियां सामने आईं, जैसे छोटे गोलाकार कण (जिन्हें ‘पॉपी सीड्स’ कहा गया) और धब्बेदार निशान (‘लेपर्ड स्पॉट्स’)। इनमें विवियनाइट और ग्रेगाइट जैसे खनिज पाए गए, जो सामान्यत: ठंडे, पानी वाले वातावरण में बनते हैं। पृथ्वी पर ये खनिज अक्सर सूक्ष्म जीवों की क्रियाओं से जुड़े होते हैं। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि ये रेडॉक्स प्रतिक्रियाओं (इलेक्ट्रॉनों के हस्तांतरण वाली प्रक्रिया) से बने होंगे, जो पृथ्वी पर बैक्टीरिया जैसी संरचनाओं द्वारा संचालित होती हैं।
कार्बन बंधनों का अनोखा संयोग
रोवर के सेंसरों ने चट्टानों में जी-बॉन्ड जैसे संकेत कैद किए, जो कार्बन-आधारित जैविक संरचनाओं की पहचान हैं। यह खासतौर पर अपोलो टेम्पल नामक स्थान पर प्रमुख था, जहां ये खनिज भी प्रचुर मात्रा में थे। वैज्ञानिकों का मत है कि जैविक तत्वों और खनिजों का यह संयोजन जीवन की उपस्थिति की ओर इशारा करता है, हालांकि जैविक का मतलब हमेशा जीवित प्रक्रिया नहीं होता, यह केवल कार्बन बंधनों की मौजूदगी दर्शाता है, जो प्राकृतिक तरीकों से भी बन सकते हैं।
भूगर्भीय या जैविक? बहस का नया दौर
खोज के दो मुख्य व्याख्या हैं: या तो ये संरचनाएं शुद्ध भूगर्भीय घटनाओं से बनीं, या सूक्ष्म जीवों ने इनमें योगदान दिया। चुनौती यह है कि सल्फर से जुड़े निशान ऊंचे तापमान पर बनने वाले होते हैं, लेकिन मंगल की इन चट्टानों में गर्मी के कोई चिह्न नहीं हैं। इससे सवाल उठता है कि क्या प्राचीन मंगल झीलों में बैक्टीरिया जैसे जीव सक्रिय थे? यह बहस वैज्ञानिकों को गहन जांच के लिए प्रेरित कर रही है।
सैंपल वापसी: अगला बड़ा कदम
रोवर ने ब्राइट एंजेल से ‘सफायर कैन्यन’ नामक कोर नमूना संग्रहित किया है, जो अब सुरक्षित ट्यूब में रखा है। भविष्य की मिशन से इसे पृथ्वी पर लाने की योजना है, जहां उन्नत लैब में आइसोटोप विश्लेषण, खनिज संरचना और संभवत: सूक्ष्म जीवाश्मों की पड़ताल संभव होगी। इससे मंगल पर जीवन का रहस्य सुलझाने में बड़ी मदद मिलेगी।
पृथ्वी-मंगल की समानताएं: एक सबक
शोध में उल्लेख है कि अरबों वर्ष पूर्व दोनों ग्रहों पर समान रासायनिक क्रियाएं चल रही थीं। पृथ्वी पर सूक्ष्म जीव लोहे-सल्फर से ऊर्जा ग्रहण करते थे, लेकिन प्लेट टेक्टॉनिक्स ने पुराने प्रमाणों को नष्ट कर दिया। मंगल पर ये सुरक्षित हैं, इसलिए यह खोज संभावित बायोसिग्नेचर है। अगर पुष्टि हुई, तो यह मानव इतिहास की क्रांतिकारी घटना होगी, जो पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति और ब्रह्मांड में अन्य जीवन संभावनाओं को समझने में सहायक बनेगी।



