आखिर कहां से आया ‘जंगलराज’, विपक्ष का बना हथियार

बिहार को चुनाव हो और 'जंगलराज' शब्द न गूंजे, ऐसा नहीं हो सकता। विपक्ष हमेशा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाता है। वहीं महागठबंधन इस मुद्दे पर मौन हो जाता है। सवाल है इस जंगलराज की शुरुआत कहां से हुई। किसने इस मुद्दे पर बल दिया। विश्लेषण करती यह रिपोर्ट।

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पटना: एनडीए का कोई नेता बिहार जाता है। वह जंगलराज का जिक्र करना नहीं भूलता। समस्तीपुर के अपनी पहली चुनावी जनसभा में पीएम मोदी ने जंगलराज की याद दिलायी। उन्होंने कहा कि ‘फिर एक बार एनडीए सरकार, सुशासन सरकार; जंगलराज वालों को दूर रखेगा बिहार।’ वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन के नेता तेजस्वी के उपमुख्यमंत्री रहते हुए युवाओं को दी जाने वाली नौकरियों की याद दिलाते हैं।

इसको दूसरे शब्दों में कह सकते हैं, बिहार में दोनों गठबंधन दो धूरी पर इस चुनाव को ले जाना चाहते हैं। एनडीए जंगलराज की याद दिलाकर नीतीश के सुशासन की तुलना करना चाहता है, तो वहीं महागठबधन लालू के काल को याद ही नहीं करना चाहता। वह तेजस्वी के युवाओं में तेज को बढ़ाना चाहता है। महागठबंधन का जोर है कि तेजस्वी युवाओं में लोकप्रिय हो जाएं। आइए जानते हैं कि आखिर जंगलराज की उत्पत्ति कैसे हुई।

पटना में हुई बारिश से बढ़ी परेशानी पर कोर्ट ने की थी टिप्पणी

इस जंगलराज का इतिहास 1997 तक जाता है। उस समय के एक नागरिक के मामले में पटना हाईकोर्ट के जस्टिस वीपी सिंह और जस्टिस धर्मपाल सिन्हा की खंडपीठ ने राजद सरकार की आलोजना करते हुए जंगलराज शब्द का इस्तेमाल किया था। यह शब्द आते ही विपक्षी दलों ने इसको अपने प्रचार में इस्तेमाल करना शुरु कर दिया। आज भी इस शब्द का इस्तेमाल विपक्षी दल करना नहीं भूलते। हर भाषण में इसका इस्तेमाल कर लोगों को जंगलराज का याद दिलाते रहते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता ने डाली थी याचिका

उस समय एक सामाजिक कार्यकर्ता ने पटना में बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या, नालों की सफाई न होने को लेकर अदालत में याचिका दायर की थी। इस पर अपनी टिप्पणी में नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि ‘हालात जंगलराज से भी खराब हैं और कोर्ट के निर्देशों और जनहित की भी कोई परवाह नहीं की जा रही है।’ इस वक्तव्य के आते ही विपक्ष ने इसको खूब उठाया और आमजन में इसी बात को मुद्दा बना दिया।

सुशील मोदी सबसे ज्यादा उठाते थे मुद्दा

सुशील कुमार मोदी हमेशा लालू प्रसाद यादव के शासनकाल की खराब व्यवस्था और अराजकता को उठाते थे। ऐसी स्थिति में विपक्ष के लिए यह शब्द ही मुख्य मुद्दा बन गया। भाजपा के दिवंगत नेता सुशील कुमार ने लालू यादव सरकार को निशाने पर लेते हुए सबसे ज्यादा इस शब्द का इस्तेमाल किया और एक तरह से इसे चर्चित किया। जब 2000 में बिहार में विधानसभा चुनाव होने थे तो राजद सरकार भारी दबाव में थी।

हर चुनाव में गुंजने लगा मुद्दा

अब लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा, हर चुनाव में जंगलराज शब्द गुंजने लगता है। यह शब्द जहां विपक्ष को साहस देता है, वहीं राजद के लिए कलंक के रूप में साबित होता है। यही कारण है कि विपक्ष आम तौर पर राजद सरकार के 15 साल के शासन की आलोचना के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

प्रधानमंत्री व गृहमंत्री दिला रहे याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में चुनाव प्रचार के जोर पकड़ते ही फिर से इस जंगलराज शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। पीएम मोदी ने समस्तीपुर की पहली जनसभा में ही जंगलराज की याद दिलाई। बिहार के समस्तीपुर से पीएम मोदी ने विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार की शुरुआत की और अपनी पहली ही जनसभा में जंगलराज की याद दिला दी।

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

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