बिहार चुनाव: BJP ने सवर्णों को दी तवज्जो, तो JDU ने पिछड़ों पर लगाया दांव

एनडीए के पांच घटकों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसमें भाजपा ने सबसे अधिक सवर्णों को टिकट दिया है। संख्या के हिसाब से देखें तो एनडीए में सर्वाधिक राजपूतों को 37 और भूमिहारों को 32 टिकट आवंटित किए गए हैं। आइए देखते हैं वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र नाथ राय की यह रिपोर्ट।

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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने 10.56 प्रतिशत आबादी वाले सवर्णों को 35 प्रतिशत टिकट दिया है, यानी हर तीसरा प्रत्याशी सवर्ण है। इस गठबंधन से 85 उम्मीदवार सवर्ण हैं। इसमें भी राजपूत समाज के 37 प्रत्याशियों के साथ उनकी संख्या सबसे ज्यादा है। वहीं, भूमिहार प्रत्याशी 32 और ब्राह्मण उम्मीदवारों की संख्या 14 है, जबकि कायस्थ समाज के दो उम्मीदवार हैं।

एनडीए में 37 राजपूत (जिनकी आबादी 3.45 प्रतिशत है) और 23 कुशवाहा/कोरी (जिनकी आबादी 4.21 प्रतिशत है)। 2.86 प्रतिशत आबादी वाले भूमिहारों को भी 32 सीटें मिली हैं। ब्राह्मणों की आबादी 3.65 प्रतिशत है, जो राजपूतों से ज्यादा है, लेकिन उन्हें 14 सीटें मिली हैं।

सवर्णों में भी राजपूत समाज को ज्यादा तवज्जो

सवर्णों को टिकट देने में भाजपा सबसे आगे है। 101 सीटों में से 49 उम्मीदवार इन्हीं चार जातियों से हैं। जेडीयू ने 22, लोजपा (रामविलास) ने 10, हम (Hindustani Awam Morcha) और रालोमो (Rashtriya Lok Morcha) ने 2-2 सवर्ण उम्मीदवार उतारे हैं। राजपूत समाज के प्रत्याशियों में भाजपा ने 21, जेडीयू ने 10, लोजपा (रामविलास) ने पाँच और रालोमो ने एक उम्मीदवार उतारा है। हम ने अपने कोटे में दो भूमिहार चाचा-भतीजा को उतारा है।

एनडीए में 77 उम्मीदवार पिछड़े समाज से, कुशवाहा की संख्या 24

वहीं, 77 उम्मीदवार पिछड़ा समाज से हैं, यानी पिछड़ा समाज के लोगों को 31.68 प्रतिशत टिकट मिले हैं। इसमें भी कुशवाहा समाज के 24, वैश्य समाज के 20, यादव समाज के 19 और कुर्मी समाज के 14 उम्मीदवार हैं। 40 कैंडिडेट महादलित और अनुसूचित जनजाति से हैं। राज्य में 40 सीटें अनुसूचित जाति और 2 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। एनडीए ने पाँच मुस्लिम कैंडिडेट को भी टिकट दिए हैं। इसमें चार जदयू ने और एक चिराग की पार्टी ने दिया है।

भाजपा ने 50% प्रतिशत टिकट सवर्णों को दिए

अब बात करें एनडीए के पांचों पार्टियों की तो भाजपा के हिस्से में 101 सीटें हैं। इसमें लगभग 50 प्रतिशत, यानी 49 सवर्णों को टिकट दिए हैं। इसमें भी सबसे ज्यादा राजपूत को 21, भूमिहार को 16, ब्राह्मण को 11 और कायस्थ को एक सीट दिया गया है। भाजपा से ओबीसी समाज के 30 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसमें भी 15 वैश्य, सात कुशवाहा, छह यादव और दो कुर्मी बिरादरी से हैं। वहीं 12 दलित और 10 अति पिछड़ा वर्ग को टिकट दिया गया है।

जदयू से सर्वाधिक पिछड़े समाज के उम्मीदवार

जदयू ने सबसे ज़्यादा 37, यानी 36.63 प्रतिशत, पिछड़े समाज के उम्मीदवारों को उतारा है। उनमें भी सर्वाधिक कुशवाहा या कोयरी समाज के 13, कुर्मी 12, यादव आठ, और वैश्य समाज के चार लोगों को टिकट दिया है। जदयू ने 22-22 टिकट सवर्ण और अति पिछड़ा समाज को दिया है। अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) में सबसे अधिक धानुक समाज को आठ, इसके अलावा मल्लाह समाज के तीन कैंडिडेट हैं। दलित और अनुसूचित जनजाति के 16 कैंडिडेट को टिकट दिया है।

चिराग ने 10 सवर्ण और आठ दलित समाज के उम्मीदवार उतारे

वहीं चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) कुल 29 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उन्होंने 10 सवर्ण, छह ओबीसी, चार ईबीसी और आठ दलित समाज के उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं एक सीट पर मुस्लिम समाज का प्रत्याशी उतारा है। सवर्णों में भी पाँच राजपूत समाज, चार भूमिहार और एक ब्राह्मण समाज के व्यक्ति को टिकट दिया है।

जीतन राम मांझी ने दो भूमिहारों को दिया टिकट

जीतन राम मांझी के हिस्से में छह सीटें आई हैं। इसमें उन्होंने दो भूमिहार और चार दलितों को टिकट दिए हैं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम के हिस्से में भी सीटें हैं। इसमें उन्होंने दो सवर्ण, जिसमें एक भूमिहार और एक राजपूत को टिकट दिया है। वहीं चार ओबीसी में तीन कुशवाहा व एक वैश्य समाज से टिकट दिया है।

सवर्ण को एनडीए मानती है अपना कोर मतदाता

जानकारों की मानें तो सवर्णों को ज़्यादा टिकट दिए जाने के पीछे यह कारण है कि एनडीए सवर्णों को अपना कोर वोटर मानती है। पिछली बार के चुनाव में 50 प्रतिशत से ज़्यादा सवर्णों ने एनडीए को वोट किया था, जबकि महागठबंधन के पक्ष में 20 प्रतिशत से भी कम सवर्ण मतदाता रहे। इसमें भी चार सवर्ण बिरादरियों को देखें तो कायस्थ समाज ने 59 प्रतिशत एनडीए को, जबकि 19 प्रतिशत महागठबंधन को वोट किया था।

भूमिहार समाज के 51 प्रतिशत लोग थे एनडीए के पक्ष में

इसके बाद राजपूत समाज ने 55 प्रतिशत एनडीए को व नौ प्रतिशत महागठबंधन को वोट किया था, वहीं चार प्रतिशत राजपूत समाज के लोगों ने चिराग को वोट दिया था। भूमिहार समाज ने 51 प्रतिशत एनडीए को, 19 प्रतिशत ने महागठबंधन को व तीन प्रतिशत ने चिराग पासवान की पार्टी को वोट दिया था। ब्राह्मण समाज ने 52 प्रतिशत एनडीए को और 15 प्रतिशत ने महागठबंधन को वोट किया था। वहीं चिराग की पार्टी को भी सात प्रतिशत लोगों ने वोट दिया था।

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

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