गया, बिहार (18 जून 2026): भारत के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। गया के सर्किट हाउस में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जब यह घोषणा की कि भारत ने नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, तो यह केवल एक प्रशासनिक जीत नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए शांति और सुरक्षा के एक नए युग का उदय था।
पिछले 12 वर्षों की विकास यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब इरादे नेक हों और नेतृत्व निर्णायक, तो देश की तस्वीर बदलते देर नहीं लगती। आज हमारा भारत, जो कभी सुरक्षा और आंतरिक कलह की चुनौतियों से जूझ रहा था, अब अपनी रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भर है और वैश्विक पटल पर एक ‘डिसीजन मेकर’ के रूप में खड़ा है।
आंतरिक सुरक्षा: नक्सलवाद की समाप्ति और शांति का उदय
नक्सलवाद, जो दशकों तक भारत के विकास के रास्ते में एक बड़ा अवरोध था, अब अतीत की बात हो गया है। नित्यानंद राय ने स्पष्ट किया कि यह सफलता सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का परिणाम है।
- सशक्त रणनीति: सरकार ने सुरक्षा बलों का आधुनिकीकरण किया, स्थानीय पुलिस के साथ तालमेल बिठाया और प्रभावित क्षेत्रों में विकास की योजनाओं को तेज गति से लागू किया।
- विकास का संदेश: जब नक्सल प्रभावित इलाकों में पक्की सड़कें, बिजली, और स्कूल पहुंचे, तो लोगों का सरकार और लोकतंत्र पर विश्वास लौटा। आज भारत का हर कोना सुरक्षित है।
रक्षा क्षमता: ₹8 लाख करोड़ की अभूतपूर्व सुरक्षा ढाल
किसी भी देश की संप्रभुता उसकी रक्षा तैयारियों पर टिकी होती है। पिछले 12 वर्षों में भारत ने अपनी रक्षा नीतियों में जो बदलाव किए हैं, वे क्रांतिकारी हैं।
- बजट में छलांग: रक्षा बजट को ₹2.5 लाख करोड़ से ₹8 लाख करोड़ तक ले जाना सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।
- आत्मनिर्भर भारत: ‘मेक इन इंडिया’ के तहत आज भारत अपनी मिसाइलें, तोपें, और आधुनिक हथियार स्वयं बना रहा है। हम न केवल अपनी सीमाएं सुरक्षित कर रहे हैं, बल्कि विश्व को यह दिखा रहे हैं कि भारत रक्षा सामग्री का निर्यातक भी बन सकता है।
वैश्विक पटल पर भारत: ‘Modi is Strong’
आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज सुनी जाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना कि “मोदी मजबूत हैं,” कोई साधारण टिप्पणी नहीं है। यह भारत की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति का परिचायक है। प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व अब केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है; वैश्विक जलवायु परिवर्तन, आर्थिक नीतियों और सुरक्षा चुनौतियों के हर मंच पर भारत की सहमति अनिवार्य मानी जाती है।
12 वर्ष का परिवर्तन: कल्याणकारी योजनाओं का महायज्ञ
पिछले 12 वर्षों में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मंत्र देश की धड़कन बन गया है।
- गरीब कल्याण: प्रधानमंत्री आवास योजना ने करोड़ों लोगों को उनका अपना घर दिया है।
- भोजन और स्वास्थ्य: 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त राशन और ‘आयुष्मान भारत’ के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा ने गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ा है।
- वित्तीय समावेशन: जन धन योजना और डिजिटल इंडिया ने गांव-गांव में बैंकिंग और तकनीक की क्रांति पहुंचा दी है।
बिहार का नया सूरज: विकास की नई इबारत
बिहार की विकास यात्रा पर बात करते हुए नित्यानंद राय ने कहा कि राज्य अब देश के टॉप-परफॉर्मिंग राज्यों में शामिल होने के लिए अग्रसर है।
- राष्ट्रीय मखाना बोर्ड: मिथिला मखाना को GI टैग मिलने और राष्ट्रीय बोर्ड के गठन से बिहार के किसानों की आय में सीधे वृद्धि हुई है।
- शिक्षा का केंद्र: पूसा कृषि विश्वविद्यालय का केंद्रीय विश्वविद्यालय बनना बिहार के छात्रों के लिए शोध और शिक्षा के नए अवसर खोल रहा है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: पटना मेट्रो, एक्सप्रेस-वे और बेहतर रेल नेटवर्क ने बिहार के आर्थिक भूगोल को बदल दिया है।
डिजिटल इंडिया और युवा शक्ति
‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ के जरिए आज भारत का युवा नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन रहा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से भी यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स का निकलना यह साबित करता है कि भारतीय युवाओं की मेधा को अब सही मंच मिल रहा है। तकनीक के जरिए पारदर्शी शासन ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है और हर योजना का लाभ सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच रहा है।
महिला सशक्तीकरण: एक मजबूत नींव
पिछले 12 वर्षों में महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए जो कदम उठाए गए, वे अभूतपूर्व हैं। उज्ज्वला योजना से रसोई तक गैस पहुंचाना हो, या जन धन खातों से आर्थिक आजादी देना, आज भारत की नारी न केवल परिवार का सहारा है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की भी मजबूत स्तंभ है।
निष्कर्ष: ‘विकसित भारत’ का संकल्प
18 जून 2026 की यह प्रेस वार्ता केवल उपलब्धियों का बखान नहीं थी, बल्कि यह भारत के भविष्य का खाका थी। हमने पिछले 12 वर्षों में जो हासिल किया, वह ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में केवल एक पड़ाव है। हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं, अर्थव्यवस्था मजबूत है और जनमानस का उत्साह चरम पर है।
हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ भारत ‘विश्वगुरु’ की अपनी प्राचीन भूमिका को पुनः प्राप्त करेगा। चुनौतियां अभी भी आएंगी, लेकिन पिछले 12 वर्षों का आत्मविश्वास बताता है कि हम हर चुनौती को अवसर में बदलने की क्षमता रखते हैं।



