सतत भविष्य की ओर कदम—भारत ने ‘बॉन चैलेंज’ के तहत 21.76 मिलियन हेक्टेयर बंजर भूमि को फिर से उपजाऊ बनाया।
आज, 17 जून को ‘विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस’ के अवसर पर नई दिल्ली के इंदिरा पर्यावरण भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने पर्यावरण बहाली के भारत के शानदार सफर को दुनिया के सामने साझा किया।
भारत का संकल्प और उपलब्धियाँ
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया के सबसे बड़े बहाली संकल्पों में से एक को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है:
- बॉन चैलेंज (Bonn Challenge): भारत ने 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि को बहाल करने का लक्ष्य रखा है। गर्व की बात है कि हम अब तक 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पुनर्जीवित कर चुके हैं।
- रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था: यह सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, यह आजीविका का भी जरिया है। बहाली गतिविधियों ने अब तक लगभग 1.22 बिलियन मानव-दिवस का रोजगार पैदा किया है।
- सामुदायिक जुड़ाव: ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की सफलता ने एक जन आंदोलन का रूप ले लिया है, जिसके तहत देशभर में 266 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
- आधुनिक तकनीक का साथ: ‘भुवन’, ‘वेदस’ (VEDAS) और ‘युक्तधारा’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग अब वैज्ञानिक तरीके से वनीकरण और जल प्रबंधन की निगरानी के लिए किया जा रहा है।
क्यों खास है ‘रेंजलैंड्स‘ पर फोकस?
इस साल का विषय—“रेंजलैंड्स: पहचानें। सम्मान करें। बहाल करें।” है। भारत के लगभग 228 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में फैले शुष्क भूमि और घास के मैदान (Rangelands) कृषि, पशुपालन और ग्रामीण आजीविका की रीढ़ हैं। इनका संरक्षण जल चक्र को विनियमित करने और कार्बन सोखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सरकार की अन्य महत्वपूर्ण पहलें
- अरावली ग्रीन वॉल इनिशिएटिव: पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए एक विशाल हरित दीवार का निर्माण।
- मिष्टी (MISHTI) कार्यक्रम: 2028 तक 54,000 हेक्टेयर मैंग्रोव क्षेत्र को बहाल करने का लक्ष्य।
- मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड: 260 मिलियन से अधिक कार्ड वितरित किए गए, ताकि किसान अपनी मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर समझ सकें।
- संयुक्त वन प्रबंधन: 81.53 मिलियन हेक्टेयर भूमि को कवर करने वाला यह विश्व के सबसे बड़े सामुदायिक-आधारित प्रबंधन प्रणालियों में से एक है।
एक सुरक्षित कल की ओर
केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता ‘लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रलिटी’ (भूमि क्षरण तटस्थता) प्राप्त करना है। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान ‘इंडियन फॉरेस्टर‘ का विशेष संस्करण और ‘बॉन चैलेंज पर भारत की दूसरी प्रगति रिपोर्ट‘ भी जारी की।
यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि मरुस्थलीकरण को रोकना केवल सरकारी नीति का हिस्सा नहीं, बल्कि हम सभी की जिम्मेदारी है। चलिए, मिलकर अपनी धरती को फिर से हरा-भरा बनाएं।



