नई दिल्ली: झीलें (Lakes) हमारे पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये ताजे पानी का स्रोत हैं, जैव विविधता को समृद्ध करती हैं और मछलियों सहित कई जलीय जीवों के लिए निवास स्थान प्रदान करती हैं। हाल के एक शोध से पता चला है कि वैश्विक स्तर पर झीलें न केवल सतह पर, बल्कि अपनी गहराई में भी गर्म हो रही हैं। सतह के नीचे होने वाली तापमान वृद्धि, जिसे गहरे पानी की हीटवेव कहा जा सकता है, तेजी से बढ़ रही है। ये घटनाएं अब अधिक बार हो रही हैं और इनकी तीव्रता भी बढ़ रही है।
झीलों पर पड़ रहा गंभीर प्रभाव
ये गहरी हीटवेव झीलों के पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। फिर भी, इस मुद्दे पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है और इसे पूरी तरह समझा भी नहीं गया है। नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, झीलों में होने वाली ये गहरी हीटवेव वायुमंडल या समुद्र में होने वाली हीटवेव की तरह ही होती हैं, जो लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी की स्थिति पैदा करती हैं। अब तक के शोध मुख्य रूप से सतही तापमान पर केंद्रित रहे हैं, जहां जलवायु परिवर्तन के कारण हाल के दशकों में लू की घटनाएं अधिक बार और तीव्र हो रही हैं।
खाद्य श्रृंखला और जलीय जीवन पर खतरा
सतह के नीचे की गर्मी झीलों के रासायनिक और भौतिक संतुलन को बिगाड़ सकती है। इससे खाद्य श्रृंखला प्रभावित हो सकती है और कई मामलों में मछलियों की बड़े पैमाने पर मृत्यु हो सकती है। जलीय प्रजातियां इस गर्मी का अलग-अलग तरीके से सामना करती हैं। कुछ प्रजातियों को लाभ हो सकता है, अगर गर्मी उनके लिए अनुकूल तापमान की सीमा को बढ़ाती है। लेकिन कई प्रजातियां, खासकर वे जो पहले से ही अपनी तापमान सहनशीलता की सीमा पर हैं, गंभीर तनाव का सामना करती हैं। गर्मियों में सतह का पानी गर्म होकर ऊपरी परत में रहता है, जिसके कारण कुछ प्रजातियां ठंडे पानी की तलाश में गहरे पानी में चली जाती हैं। लेकिन जब गहरा पानी भी गर्म होने लगता है, तो उनके लिए सुरक्षित स्थान कम हो जाते हैं।
वैश्विक स्तर पर झीलों का अध्ययन
शोधकर्ताओं ने दुनिया भर की हजारों झीलों के तापमान डेटा का विश्लेषण किया। इसमें एक-आयामी मॉडल, उत्तरी अमेरिका की बड़ी झीलों के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन सिमुलेशन और स्थानीय झीलों की विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर मॉडल शामिल थे। तापमान में गहराई और समय के साथ होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करके, शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया कि सतह के नीचे का पानी कब और कहां सामान्य से अधिक गर्म हो रहा है। शोध में सतह के नीचे की हीटवेव को उन अवधियों के रूप में परिभाषित किया गया, जब किसी गहराई पर तापमान सामान्य मौसमी सीमा से अधिक हो जाता है।
बढ़ती हीटवेव की तीव्रता
शोध से पता चला कि 1980 के बाद से गहरे पानी में हीटवेव की आवृत्ति और अवधि बढ़ रही है। औसतन, प्रति दशक इनकी आवृत्ति सात दिन से अधिक और अवधि दो दिन से अधिक बढ़ी है। तापमान में भी प्रति दशक लगभग 0.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। गहरे पानी में ठंडे स्थानों की उपलब्धता, जो पहले सतही गर्मी के दौरान आश्रय प्रदान करते थे, अब कम हो रही है। कुछ झीलों में, मछलियों को ठंडा पानी ढूंढने के लिए हर दशक में लगभग एक मीटर गहराई तक जाना पड़ रहा है। सिमुलेशन के अनुसार, उच्च उत्सर्जन की स्थिति में ये रुझान और तेज होंगे। इस सदी के अंत तक, कुछ गहरी हीटवेव महीनों तक चल सकती हैं और तापमान ऐतिहासिक रिकॉर्ड से परे जा सकता है।
झीलों का पारिस्थितिक महत्व
झीलों का पारिस्थितिक तंत्र उनकी तापीय संरचना पर निर्भर करता है। जब गर्म पानी गहराई तक पहुंचता है, तो यह मछलियों के आवास, प्रजातियों के वितरण, पोषक तत्वों के चक्रण और शैवालों के विकास को प्रभावित करता है। यह मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को भी बढ़ा सकता है। गहरे पानी में रहने वाली प्रजातियां, जो कम गतिशील होती हैं या ठंडी परिस्थितियों के लिए अनुकूलित होती हैं, विशेष रूप से खतरे में हैं। सतही हीटवेव के दौरान गहरे पानी में आश्रय की कमी से ऐसी प्रजातियां भी प्रभावित होती हैं।
निगरानी और भविष्य के शोध की जरूरत
उपग्रहों ने सतही तापमान की वृद्धि को समझने में मदद की है, लेकिन वे गहरे पानी की स्थिति का आकलन नहीं कर सकते। शोध में सुझाव दिया गया है कि झीलों की निगरानी को सतह के नीचे के तापमान तक विस्तारित करना जरूरी है। भविष्य के शोध में यह समझना चाहिए कि विभिन्न प्रजातियां गहरे पानी की गर्मी और तापमान परिवर्तनों का सामना कैसे करती हैं। साथ ही, तापीय संरचना में बदलाव का पोषक चक्रण और मीथेन उत्पादन पर प्रभाव भी अध्ययन का विषय होना चाहिए।



