Global Warming से ‘डे जीरो’ सूखा बढ़ा, 35% इलाकों पर खतरा

एक ताजा शोध ने Global Warming और गंभीर बताया है। अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो इस सदी के अंत तक करीब 75 करोड़ लोग पानी की भयानक किल्लत से जूझ रहे होंगे।

Share This Article:

नई दिल्ली: दुनिया भर में पानी की कमी अब एक दूर की बात नहीं रह गई है। जल संकट की यह समस्या तेजी से फैल रही है, और ‘डे जीरो’ जैसी स्थिति कई जगहों पर हकीकत बनने लगी है, वह दिन जब पानी पूरी तरह खत्म हो जाए और नल सूख जाएं। एक ताजा शोध ने इस खतरे को और गंभीर बताया है। अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो इस सदी के अंत तक करीब 75 करोड़ लोग पानी की भयानक किल्लत से जूझ रहे होंगे। यह संकट सिर्फ शहरों तक नहीं रुकेगा, गांवों और दूरदराज के इलाकों को भी अपनी चपेट में लेगा। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के चलते अगले 15 वर्षों में दुनिया के एक तिहाई से ज्यादा कमजोर इलाके इस तरह के घातक सूखे का शिकार हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ता वैश्विक तापमान लंबे समय तक चलने वाले सूखे को और तेज कर रहा है, जिसे ‘डे जीरो ड्राउट’ कहा जाता है। यह वह हालत है जब किसी इलाके में पानी की जरूरत बारिश, नदियों या जलाशयों से मिलने वाली सप्लाई से कहीं ज्यादा हो जाती है।

अगले 15 सालों में 35% कमजोर इलाकों पर ‘डे जीरो’ का साया

यह रिसर्च दक्षिण कोरिया की पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी के आईबीएस क्लाइमेट फिजिक्स सेंटर के विशेषज्ञों ने की है। उनके निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय पत्रिका नेचर कम्युनिकेशंस में छपे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि आने वाले 15 सालों में वैश्विक स्तर पर 35 प्रतिशत संवेदनशील क्षेत्र ‘डे जीरो’ जैसी आपदा से प्रभावित होंगे। सदी के अंत तक यह संख्या बढ़कर 75 करोड़ लोगों तक पहुंच सकती है, जिसमें शहरों में रहने वाले 47 करोड़ और ग्रामीण इलाकों के 29 करोड़ लोग शामिल होंगे। शोध में नवीनतम क्लाइमेट मॉडल्स का इस्तेमाल किया गया है, जिनसे यह पता लगाया गया कि कब पानी की डिमांड उपलब्ध संसाधनों से आगे निकल जाएगी। टीम ने SSP3-7.0 और SSP2-4.5 जैसे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के परिदृश्यों को ध्यान में रखा। फोकस लंबे सूखे, नदियों में कम पानी और बढ़ती खपत जैसी स्थितियों पर था, हालांकि भूजल को इसमें शामिल नहीं किया गया।

सावधान रहें, पानी की घड़ी टिक रही है

नतीजे बताते हैं कि भूमध्य सागर के आसपास, दक्षिणी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और एशिया के चुनिंदा हिस्सों में ‘डे जीरो ड्राउट’ के बड़े केंद्र बन रहे हैं। शहरों पर यह खतरा सबसे ज्यादा मंडरा रहा है, खासकर भूमध्य क्षेत्र में। वहीं, उत्तरी और दक्षिणी अफ्रीका के साथ एशिया के कुछ ग्रामीण इलाकों में इसका असर सबसे गहरा पड़ेगा। याद कीजिए, 2018 में दक्षिण अफ्रीका का केप टाउन और 2019 में भारत का चेन्नई इस स्थिति के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। इन शहरों में पीने का पानी और खेती के लिए जल सिस्टम कितने नाजुक हैं, यह साफ हो गया। बैंगलोर में भी हाल ही में ऐसी ही दिक्कतें आईं, जहां पानी की कमी ‘डे जीरो’ जैसी लगने लगी। दिल्ली में तो यह समस्या साल दर साल बढ़ती जा रही है।

जल प्रबंधन के लिए जरूरी है सही प्लानिंग

यह जानना कि यह संकट कब और कहां आएगा, शहरों और गांवों के लिए मजबूत जल नीतियां बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। शोध से साफ है कि ‘डे जीरो ड्राउट’ की घटनाएं आने वाले दशकों में तेजी से बढ़ेंगी और पहले से ज्यादा जल्दी आएंगी। मुख्य लेखक रवींद्रनद्रसाना कहते हैं, यह स्टडी साबित करती है कि ग्लोबल वार्मिंग ‘डे जीरो’ स्थितियों को और तेज कर रही है। उनके अनुसार, अगर 1.5 डिग्री सेल्सियस का लक्ष्य हासिल भी हो जाए, तो भी करोड़ों लोग पानी की गंभीर कमी से गुजरेंगे। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दुनिया के 14 प्रतिशत प्रमुख जलाशय पहली बार ‘डे जीरो’ आने पर पूरी तरह खाली हो सकते हैं, जिससे लोगों की जिंदगी और रोजगार पर भारी असर पड़ेगा। प्रेस रिलीज में शोधकर्ताओं ने कहा है कि ‘डे जीरो ड्राउट’ अब कल्पना नहीं, बल्कि वर्तमान है। अगर तुरंत अनुकूलन और टिकाऊ जल प्रबंधन पर काम न किया गया, तो करोड़ों लोग आने वाले समय में पानी की अभूतपूर्व तंगी से जूझेंगे।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

https://newgindia.com/author/usha/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.