नई दिल्ली: वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर नई दिल्ली में 8-9 सिंतबर तक दो दिवसीय ‘डायलॉगनेक्स्ट’ सम्मेलन का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कन्वेंशन सेंटर में किया गया। सम्मेलन के पहले दिन देशभर से जुटे वरिष्ठ नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर गहन चिंतन-मंथन किया। इस दो दिवसीय उच्च स्तरीय कार्यक्रम का उद्देश्य विश्व के खाद्य भविष्य को सुरक्षित करने हेतु महत्वपूर्ण नवाचारों की खोज करना और उन्हें गति प्रदान करना है।
इसे किसान तक ले चलो है थीम
वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन की ओर से सीआईएमएमआईटी, बोरलॉग इंस्टीट्यूट फ़ॉर साउथ एशिया (बीआईएसए) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के साथ साझेदारी में सम्मेलन हुआ। इस वर्ष भी सम्मेलन का विषय पिछले वर्ष मेक्सिको में आयोजित डायलॉगनेक्स्ट के अनुरूप ही किसान उन्मुख है। डायलॉगनेक्स्ट की थीम “इसे किसान तक ले चलो” है
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा कि उभरते वैश्विक मेगाट्रेंड कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए जटिल चुनौतियां पेश कर रहे हैं, जिनके लिए छोटे किसानों को केन्द्र में रखकर, व्यवस्थित समाधानों और उनके त्वरित क्रियान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अत्याधुनिक विज्ञान, नवाचारों एवं खोज से लेकर वितरण तक की साझेदारियों में अधिक निवेश की आवश्यकता है। चूंकि भारत में कृषि परिवर्तन तीव्र गति से हो रहा है, ऐसी स्थिति में यह देश, वैश्विक दक्षिण के लिए लघु कृषि नवाचार के केन्द्र के रूप में कार्य कर सकता है।
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कार्य-योजना को मिलेगी गति
कार्य-योजना को मिलेगी गति सम्मेलन में वर्ल्ड फ़ूड प्राइज फाउंडेशन के वैश्विक कार्यक्रम तथा रणनीतिक संचार के वरिष्ठ निदेशक निकोल प्रेंगर ने कहा कि डॉ. नॉर्मन बोरलॉग की ओर से भारत को अर्ध-बौने गेहूं की खेती शुरू करने में मदद करने तथा एक दशक से भी कम समय में उत्पादन दोगुना करने के साथ-साथ संभावित अकाल की स्थिति को टालने के 60 साल बाद भारत में इस सम्मेलन का आयोजन एक सम्मान की बात है। उन्होंने आगे कहा कि डायलॉगनेक्स्ट को आने वाले दशकों में बढ़ती वैश्विक आबादी को स्थायी रूप से भोजन उपलब्ध कराने हेतु ‘मूनशॉट’ प्रयास के कार्य-योजना को गति देने के लिए डिजाइन किया गया था।



