Blue Whale की गूंज में कमी, जलवायु परिवर्तन का असर

शोध के अनुसार, पिछले सात वर्षों में Blue Whale के गीतों की आवृत्ति और तीव्रता में लगभग 38% की कमी दर्ज की गई है। जिनमें गहरी कराह, सीटियां और क्लिक शामिल हैं।

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नई दिल्ली: धरती का सबसे विशाल समुद्री प्राणी ब्लू व्हेल (Blue Whale) जलवायु परिवर्तन के कारण गहरे संकट में है। हालिया शोध में खुलासा हुआ है कि बढ़ते समुद्री तापमान और भोजन की कमी के चलते ब्लू व्हेल ने अपनी मधुर ध्वनियों को कम कर दिया है। ये ध्वनियां, जिन्हें व्हेल अपने साथियों से संवाद करने और भोजन की उपलब्धता का संकेत देने के लिए उपयोग करती हैं, अब पहले की तुलना में कम सुनाई दे रही हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित मॉन्टेरी बे एक्वेरियम रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने इस बदलाव को रिकॉर्ड किया है।

गीतों में 38% की कमी

शोध के अनुसार, पिछले सात वर्षों (2018-2025) में ब्लू व्हेल के गीतों की आवृत्ति और तीव्रता में लगभग 38% की कमी दर्ज की गई है। ब्लू व्हेल की आवाजें, जिनमें गहरी कराह, सीटियां और क्लिक शामिल हैं, इतनी शक्तिशाली होती हैं कि ये 12 किलोमीटर तक की दूरी तक पहुंच सकती हैं। ये ध्वनियां न केवल संवाद का माध्यम हैं, बल्कि समुद्र में भोजन की खोज और प्रजनन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में इन ध्वनियों की तीव्रता में कमी देखी गई है, जो वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय है।

शोध में क्या सामने आया

वैज्ञानिकों ने 2018 से 2025 तक न्यूजीलैंड के समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोफोन की मदद से ब्लू व्हेल की ध्वनियों का अध्ययन किया। इस दौरान तीन प्रजातियों की व्हेलों पर नजर रखी गई, जिसमें ब्लू व्हेल प्रमुख थी। शोधकर्ता डॉ. सारा थॉमस के अनुसार, समुद्र के बढ़ते तापमान और भोजन की कमी ने व्हेल के व्यवहार में बदलाव लाया है। खास तौर पर गर्मियों में, जब समुद्री भोजन जैसे क्रिल (छोटी झींगा जैसी मछलियां) की मात्रा कम हो जाती है, व्हेल की ध्वनियां कमजोर पड़ जाती हैं।

भोजन की कमी है मुख्य वजह

अध्ययन में पाया गया कि 2015 से 2024 के बीच समुद्र में आई गर्म लहरों (मरीन हीटवेव्स) ने क्रिल जैसी छोटी मछलियों की आबादी को भारी नुकसान पहुंचाया। ये मछलियां ब्लू व्हेल का प्रमुख भोजन हैं। विशेष रूप से 2016, 2023 और 2024 में समुद्री तापमान में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई, जिसने क्रिल की संख्या को और कम कर दिया। नतीजतन, व्हेल ने ऊर्जा बचाने के लिए अपनी ध्वनियों का उपयोग कम किया।

वैज्ञानिकों की चिंता

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह बदलाव केवल ब्लू व्हेल तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। ब्लू व्हेल की आवाजें समुद्र में एक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं, और इनके कम होने से अन्य समुद्री जीवों पर भी असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह प्रजाति और अधिक खतरे में पड़ सकती है।

भविष्य के लिए कदम

वैज्ञानिक अब इस दिशा में काम कर रहे हैं कि ब्लू व्हेल की आबादी और उनके भोजन स्रोतों को कैसे संरक्षित किया जाए। इसके लिए समुद्री संरक्षित क्षेत्रों को बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की दिशा में वैश्विक सहयोग की जरूरत है। यह अध्ययन न केवल ब्लू व्हेल के संरक्षण के लिए, बल्कि समुद्री पर्यावरण के संतुलन के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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