नई दिल्ली: असम का काजीरंगा (Kaziranga) नेशनल पार्क, जो अपनी अनोखी वन्यजीव संपदा के लिए वैश्विक पटल पर चमकता है, अब पक्षियों की दुनिया का भी नया चैंपियन बन गया है। यहां गैंडों और बाघों के अलावा सैकड़ों रंग-बिरंगे परिंदों का राज है, और ताजा सर्वे ने इसकी पुष्टि कर दी। 18 अक्टूबर को ‘काटी बिहू बर्ड काउंट 2025’ के तहत रिकॉर्ड 146 प्रजातियों के 1,919 पक्षियों की गिनती हुई, जो पार्क की जैव-विविधता को नई ऊंचाई देती है। असम बर्ड मॉनिटरिंग नेटवर्क और पार्क अथॉरिटी के संयुक्त प्रयास से हुआ यह इवेंट न सिर्फ वैज्ञानिक डेटा जुटाने का माध्यम बना, बल्कि स्थानीय लोगों को प्रकृति के संरक्षक के रूप में जोड़ने का भी।
आंकड़ों की कहानी: खतरे में प्रजातियां और सुरक्षित आशियाना
सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले हैं। कुल गिने गए पक्षियों में दो लुप्तप्राय प्रजातियां स्वैम्प ग्रास बबलर और पलास का फिश ईगल शामिल रहीं, जो पार्क की संरक्षण क्षमता का प्रमाण हैं। छह कमजोर (वल्नरेबल) प्रजातियां जैसे रिवर टर्न, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, स्लेंडर-बिल्ड बबलर, लेसर एडजुटेंट, ग्रेट हॉर्नबिल और स्वैम्प फ्रैंकोलिन ने अपनी मौजूदगी दर्ज की। वहीं, छह प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर हैं, जिनमें वूली-नेक्ड स्टॉर्क, नॉर्दर्न लैपविंग, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, स्पॉट-बिल्ड पेलिकन, ब्लॉसम-हेडेड पेराकीट और रिवर लैपविंग प्रमुख हैं। बाकी 132 प्रजातियां सुरक्षित श्रेणी में हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि काजीरंगा हर तरह के पक्षी प्रवासी हो या स्थानीय के लिए एक सुरक्षित ठिकाना है, जहां वे बिना डरे घोंसले बना सकें।
पांच जोन, पांच कहानियां
इस बार सर्वे पांच हॉटस्पॉट्स पर केंद्रित रहा, जहां हर जगह पक्षियों की अलग-अलग दुनिया नजर आई
- अगरातोली रेंज: 89 प्रजातियां—यहां विविधता का खजाना सबसे ज्यादा चमका।
- गामीरी रेंज: 59 प्रजातियां, घने जंगलों में छिपे राज।
- पानबारी रेंज: 59 प्रजातियां, नदी किनारों का पक्षी मेला।
- पानपुर (बिस्वनाथ डिवीजन): 55 प्रजातियां, वन्यजीवों का अनछुआ कोना।
- लाओखोवा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी: 37 प्रजातियां, जहां शांति पक्षियों को बुलाती है।
इन जोनल सर्वे से साफ हुआ कि काजीरंगा की हर सेंटीमीटर जमीन पक्षी-प्रेमियों के लिए जन्नत है, बस जरूरत है सतत निगरानी की।
लोग, महिलाएं और युवा, संरक्षण की नई ताकत
कुल 63 उत्साही लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर यह काउंट किया। स्कूल स्टूडेंट्स से लेकर बर्डवॉचर्स, रिसर्चर्स और फॉरेस्ट गार्ड्स तक। खास बात ये रही कि पानबारी और लाओखोवा में महिलाओं ने लीड लिया, जो वन संरक्षण में उनकी भूमिका को नई पहचान देता है। युवाओं को फोकस कर यह इवेंट ने उन्हें बर्डिंग का शौक सिखाया, ताकि वे कल के पर्यावरण योद्धा बनें। लोकल कम्युनिटी को शामिल कर हमने सिर्फ पक्षियों को नहीं, बल्कि लोगों के दिलों को भी जोड़ा अब वे खुद कहते हैं, ये परिंदे हमारी जिम्मेदारी हैं।
स्टार परिंदे जो चुरा लें नजरें
सर्वे में कई रेयर गेस्ट्स ने दर्शन दिए, जो फोटोग्राफर्स और वैज्ञानिकों के चहेते बने:
- ग्रेट हॉर्नबिल: जंगल का राजा, विशाल चोंच वाला।
- ब्लू-ईय्ड बारबेट: नीली आंखों का जादूगर।
- ब्लू-नेप्ड पिट्टा: रंगीन पंखों का राजकुमार।
- टाइगा फ्लाईकैचर: तेज उड़ान का शिकारी।
- ग्रे-हेडेड वुडपेकर: पेड़ों का लकड़ी काटने वाला।
- ग्रे-हेडेड फिश ईगल: पानी पर राज करने वाला।
- नॉर्दर्न लैपविंग: मैदानी घुमक्कड़।
- स्पॉट-बिल्ड पेलिकन: झुंड में मछली शिकार।
- जॉर्डन का बाज: दुर्लभ बाज प्रजाति।
- लेसर एडजुटेंट: ऊंचा उड़ने वाला सेंट्री।
- रूबी-चीक्ड सनबर्ड: छोटा लेकिन चमकीला।
- स्लेंडर-बिल्ड बबलर: पतली चोंच का गीतकार।
- स्वैम्प फ्रैंकोलिन: दलदली इलाकों का यायावर।
ये पक्षी सर्दियों के मेहमान हैं या साल भर के साथी, लेकिन सबका संदेश एक पर्यावरण बचाओ, तो ये लौटकर आएंगे।
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आगे की राह: डेटा से नीति तक
‘काटी बिहू बर्ड काउंट’ महज एक इवेंट नहीं, बल्कि संरक्षण का रोडमैप है। यहां जुटे डेटा से प्रजातियों की पॉपुलेशन ट्रैक होगी, खतरे वाली पर नजर रहेगी, और पॉलिसी में ये आइडिया काम आएंगे। महिलाओं-युवाओं की इन्वॉल्वमेंट ने दिखाया कि संरक्षण सबका है। काजीरंगा जैसी जगहें हमारी धरोहर हैं, इन्हें बचाना मतलब अपनी जड़ें मजबूत करना। अगले साल और बड़ा काउंट हो, ताकि पक्षियों की संख्या न सिर्फ बनी रहे, बल्कि बढ़े भी।



