आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन: भारत की डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) भारत की स्वास्थ्य प्रणालियों को पूरी तरह कागज़-रहित (Paperless), सुरक्षित और एकीकृत बनाने वाला एक ऐतिहासिक डिजिटल ढांचा है। 93 करोड़ से अधिक ABHA खातों और 104 करोड़ से अधिक जुड़े हुए डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स के साथ, यह मिशन देश के हर नागरिक को निर्बाध, सस्ती और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित कर रहा है।

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नई दिल्ली : भारत जैसे विशाल, विविध और अत्यधिक आबादी वाले देश में हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमेशा से एक बहुत बड़ी चुनौती रहा है। किसी भी व्यक्ति को इलाज के लिए अपनी जेब से अत्यधिक खर्च न करना पड़े और उसे सही समय पर सही डॉक्टर मिल सके, इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए भारत सरकार “यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज” (Universal Health Coverage) की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक बेहद मजबूत और आधुनिक डिजिटल रीढ़ (Digital Public Infrastructure) की आवश्यकता थी।

इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए सितंबर 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission – ABDM) की शुरुआत की गई थी। आज, वर्ष 2026 में, यह मिशन दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र (Digital Health Ecosystem) में बदल चुका है। यह नेटवर्क मरीजों, अस्पतालों, डॉक्टरों, प्रयोगशालाओं और बीमा कंपनियों को एक साथ एक ही प्लेटफॉर्म पर लाता है।

एक डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता क्यों?

एक आम नागरिक को अस्पताल जाने पर सबसे बड़ी परेशानी फाइलों, पुरानी पर्चियों और रिपोर्टों को संभालकर रखने में होती है। यदि कोई मरीज देश के एक कोने से दूसरे कोने में जाता है, तो उसे अपना पूरा मेडिकल इतिहास नए सिरे से समझाना पड़ता है। ABDM इसी समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर रहा है।

एक डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

  • सुरक्षित रिकॉर्ड प्रबंधन: मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित रहते हैं।
  • एकीकृत नेटवर्क: यह आम नागरिकों को स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं (अस्पतालों, डॉक्टरों) और बीमा कंपनियों से सीधे जोड़ता है।
  • रिकॉर्ड की सुवाह्यता (Portability): नागरिक पूरे देश में किसी भी ABDM-सक्षम अस्पताल या क्लिनिक में अपने पुराने मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से देख और साझा कर सकते हैं।
  • अनाम डेटा (Anonymised Data) का निर्माण: मरीजों की व्यक्तिगत पहचान को गुप्त रखकर जनरेट होने वाला यह डेटा देश में स्वास्थ्य योजनाओं को बेहतर बनाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास में मदद करता है। इससे महामारियों की निगरानी, सटीक निदान और स्वास्थ्य प्रबंधन में नए नवाचार संभव हो रहे हैं।

इतिहास और विकास: पारंपरिक बनाम आधुनिक डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियाँ (तुलनात्मक विश्लेषण)

यदि हम भारत के स्वास्थ्य इतिहास और वर्तमान रुझानों (Current Trends) का विश्लेषण करें, तो हमें समझ आता है कि ABDM ने कितनी बड़ी तकनीकी छलांग लगाई है। नीचे दी गई तालिका के माध्यम से इसके ऐतिहासिक विकास और आज की अत्याधुनिक व्यवस्था की तुलना को आसानी से समझा जा सकता है:

विशेषता / मापदंडपारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली (ऐतिहासिक ढांचा)वर्तमान डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली (ABDM युग – 2026)
रिकॉर्ड का स्वरूपपूरी तरह कागज़ी फाइलें, पर्चियां और भौतिक रिपोर्ट्स। इनके खोने या फटने का डर हमेशा रहता था।पूरी तरह डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड (EHR)। क्लाउड और सुरक्षित नेटवर्क पर हमेशा उपलब्ध।
अस्पताल में पंजीकरणलंबी लाइनें, फॉर्म भरने में घंटों की बर्बादी और मानसिक तनाव।Scan & Share सेवा के माध्यम से QR कोड स्कैन करके मात्र 2 से 5 मिनट में डिजिटल टोकन।
डेटा साझाकरणएक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में जाने पर सभी टेस्ट दोबारा कराने पड़ते थे, क्योंकि रिकॉर्ड ट्रांसफर की कोई व्यवस्था नहीं थी।मरीज की सहमति (Consent-based) से पूरे देश में कहीं भी तुरंत डिजिटल ट्रांसफर। कोई दोबारा टेस्ट कराने की जरूरत नहीं।
बीमा दावे (Insurance Claims)अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद दावों के निपटान में 8 से 24 घंटे का समय और भारी कागजी कार्रवाई।NHCX (National Health Claims Exchange) के माध्यम से पारदर्शी, तेज और त्वरित डिजिटल क्लेम प्रोसेसिंग।
डॉक्टरों की प्रामाणिकताडॉक्टरों या क्लीनिकों की डिग्री और वैधता की जांच करने का कोई केंद्रीय माध्यम नहीं था।HPR और HFR जैसी राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों के माध्यम से केवल सत्यापित (Verified) पेशेवरों तक पहुंच।
तकनीक और नवाचारडेटा अलग-अलग फाइलों में बिखरा होने के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति या रिसर्च में इसका कोई उपयोग नहीं था।अनाम (Anonymised) डेटा के माध्यम से SAHI और BODH जैसे प्लेटफॉर्म्स पर स्वास्थ्य क्षेत्र में AI का विकास।

ABDM के पांच मुख्य स्तंभ (Core Components)

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन केवल एक ऐप या वेबसाइट नहीं है, बल्कि यह पांच बड़े डिजिटल घटकों से मिलकर बना एक संपूर्ण इकोसिस्टम है:

1. ABHA नंबर (Ayushman Bharat Health Account)

यह प्रत्येक नागरिक के लिए 14-अंकों का एक विशिष्ट स्वास्थ्य पहचानकर्ता (Unique Health Identifier) है। यह व्यक्ति की मर्जी और सहमति से उसके सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स (अस्पताल की पर्चियां, लैब रिपोर्ट्स, बीमा विवरण) को एक सुरक्षित नेटवर्क में जोड़ता है। यह स्वास्थ्य प्रणाली में नागरिक की डिजिटल पहचान है।

2. हेल्थकेयर प्रोफेश्नल्स रजिस्ट्री (Healthcare Professionals Registry – HPR)

यह देश के सभी सत्यापित स्वास्थ्य पेशेवरों (जैसे एलोपैथिक डॉक्टर, नर्स, आयुष चिकित्सक आदि) का एक राष्ट्रीय डेटाबेस है। इससे देश के नागरिकों को यह विश्वास मिलता है कि वे जिस डॉक्टर से परामर्श ले रहे हैं, वह पूरी तरह प्रमाणित है।

3. हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (Health Facility Registry – HFR)

यह देश के सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों (अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं, डायग्नोस्टिक सेंटरों और फार्मेसियों) का एक केंद्रीकृत डेटाबेस है। इसके माध्यम से मरीज आसानी से अपने आस-पास की सत्यापित चिकित्सा सुविधाओं को खोज सकते हैं।

4. यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (Unified Health Interface – UHI)

जैसे पैसों के लेनदेन के लिए UPI ने देश में क्रांति ला दी, ठीक वैसे ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए UHI को विकसित किया गया है। यह एक ओपन नेटवर्क है, जिसके माध्यम से मरीज किसी भी ऐप का उपयोग करके डॉक्टरों की खोज कर सकते हैं, अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं, टेलीकंसल्टेशन ले सकते हैं और अन्य सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

5. आरोग्य सेतु 2.0 (Aarogya Setu 2.0)

कोविड-19 महामारी के दौरान कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले आरोग्य सेतु ऐप को अब सरकार ने पूरी तरह से बदलकर आरोग्य सेतु 2.0 के रूप में लॉन्च किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा 29 जून 2026 को लॉन्च किया गया यह ऐप अब देश के नागरिकों के लिए एक व्यापक पर्सनल हेल्थ रिकॉर्ड (PHR) और डिजिटल स्वास्थ्य गेटवे बन चुका है।

आरोग्य सेतु 2.0 की प्रमुख विशेषताएं

यह नया ऐप नागरिकों को अपने स्वास्थ्य पर पूर्ण नियंत्रण रखने की शक्ति देता है। इसके मुख्य फीचर्स इस प्रकार हैं:

  • ABDM सेवाओं तक पहुंच: नागरिक आसानी से अपना ABHA खाता बना सकते हैं और स्वास्थ्य रिकॉर्ड का प्रबंधन कर सकते हैं।
  • स्मार्ट रिपोर्ट्स (OCR तकनीक): इस ऐप में ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) तकनीक दी गई है, जो कागजी दस्तावेजों को पढ़कर उन्हें डिजिटल रूप में बदल सकती है।
  • बीमा विवरण का एकीकरण: मरीज राष्ट्रीय स्वास्थ्य दावा एक्सचेंज (NHCX) के माध्यम से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के वॉलेट और अपनी निजी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों की लाइव कवरेज देख सकते हैं।
  • ई-रक्तकोष (e-RaktKosh) एकीकरण: मरीज नजदीकी अस्पतालों में उपलब्ध ब्लड यूनिट्स की वास्तविक समय (Real-time) में उपलब्धता की जांच कर सकते हैं।
  • AI-संचालित स्वास्थ्य अंतर्दृष्टि (Insights): ऐप मरीज के अपलोडेड रिकॉर्ड्स और लिंक्ड डेटा का विश्लेषण करके वेलनेस ट्रेंड्स और बायोमार्कर की जानकारी देता है।
  • UHI के माध्यम से बुकिंग: घर बैठे वीडियो कॉल (टेलीकंसल्टेशन) या अस्पताल जाकर डॉक्टर से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट बुक करने की सुविधा।
  • हेल्थ मॉनिटरिंग: इसके अंदर मरीज अपने शारीरिक विटल्स (Vitals) को ट्रैक कर सकते हैं, लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं और पहनने योग्य उपकरणों (Wearable Devices) जैसे स्मार्टवॉच को सिंक करके कदम (Steps), कैलोरी, हृदय गति और ग्लूकोज स्तर की निगरानी कर सकते हैं।
  • स्वास्थ्य साक्षरता: इसमें स्वास्थ्य ब्लॉग, सूचनात्मक वीडियो और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) का एक बड़ा भंडार है।

अस्पतालों की लंबी लाइनों से मुक्ति: ‘स्कैन एंड शेयर’ तकनीक

अस्पतालों के ओपीडी (OPD) काउंटरों पर पर्ची बनवाने के लिए घंटों खड़े रहना मरीजों के लिए सबसे थकाऊ काम होता है। इस समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने 2022 में ‘स्कैन एंड शेयर’ (Scan and Share) सेवा की शुरुआत की थी।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च (IIHMR) द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में इस सेवा के चमत्कारी परिणाम सामने आए हैं:

अध्ययन का निष्कर्ष: ‘स्कैन एंड शेयर’ तकनीक ने अस्पतालों में मरीजों के प्रतीक्षा समय (Waiting Time) को 1 घंटे से घटाकर मात्र 2 से 5 मिनट कर दिया है।

इस तकनीक में मरीज को अस्पताल के काउंटर पर लगे क्यूआर (QR) कोड को बस अपने मोबाइल से स्कैन करना होता है। ऐसा करते ही मरीज के ABHA खाते से उसकी बुनियादी जनसांख्यिकीय जानकारी (नाम, उम्र, लिंग आदि) अस्पताल के कंप्यूटर सिस्टम में सुरक्षित रूप से ट्रांसफर हो जाती है और एक डिजिटल कतार टोकन जनरेट हो जाता है। 18 जून 2026 तक पूरे देश में इस सेवा के माध्यम से 23.21 करोड़ से अधिक ABHA-लिंक्ड टोकन जारी किए जा चुके हैं।

स्वास्थ्य पेशेवरों और सुविधाओं को जोड़ना तथा वित्तीय प्रोत्साहन (DHIS)

ABDM नेटवर्क का लाभ तभी मिल सकता है जब देश के छोटे-बड़े सभी अस्पताल, क्लीनिक और डायग्नोस्टिक लैब इससे जुड़े हों। सरकार ने इसके लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया है।

निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों के चिकित्सा केंद्रों को इस नेटवर्क से जोड़ने के लिए सरकार डिजिटल हेल्थ इंसेंटिव स्कीम (Digital Health Incentive Scheme – DHIS) चला रही है। इस योजना के तहत वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाते हैं:

  1. डिजिटलीकरण खर्चों की प्रतिपूर्ति (Reimbursement): अस्पतालों द्वारा रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने में जो भी खर्च आता है, सरकार उसकी भरपाई करती है।
  2. नकद प्रोत्साहन (Cash Incentives): अस्पताल, प्रयोगशालाएं और डिजिटल समाधान प्रदाता कंपनियां (DSCs) प्रत्येक इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाने पर नकद प्रोत्साहन राशि कमा सकती हैं।

18 जून 2026 तक वितरित की जा चुकी प्रोत्साहन राशि का विवरण:

  • अस्पतालों को: 107+ करोड़ रुपये
  • डायग्नोस्टिक्स / लैब्स / फार्मेसियों को: 2.95 करोड़ रुपये
  • डिजिटल सॉल्यूशन कंपनियों (DSCs) को: 26+ करोड़ रुपये

जमीनी प्रभाव: एक उदाहरण

गुरुग्राम में फार्मेसी चलाने वाले डॉ. प्रवीण सिक्का ने अपनी दुकान को ABDM पर पंजीकृत किया, जिसमें उन्हें मात्र 2 घंटे का समय लगा। अब उनके मरीज ABHA ऐप के जरिए अपनी दवाओं के रिकॉर्ड सुरक्षित रख सकते हैं। इसके साथ ही, डॉ. सिक्का को DHIS योजना के तहत हर एक रिकॉर्ड लिंक करने पर सरकार की तरफ से सीधा आर्थिक मुआवजा भी मिल रहा है।

छोटे क्लीनिकों के लिए गेम-चेंजर: ‘eSushrut@Clinic’

बड़े अस्पतालों के पास तो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर होता है, लेकिन देश के छोटे क्लीनिकों के लिए महंगे सॉफ्टवेयर खरीदना संभव नहीं था। इस खाई को पाटने के लिए सरकार ने जून 2026 में eSushrut@Clinic नाम का एक हल्का और ‘प्लग एंड प्ले’ हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) लॉन्च किया है।

  • डेवलपर: इसे उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र (C-DAC) द्वारा विकसित किया गया है।
  • कार्य: यह छोटे डॉक्टरों और क्लीनिकों को बेहद किफायती और मानकीकृत तरीके से मरीजों का पंजीकरण करने, बिलिंग संभालने और उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की सुविधा देता है।
  • सुरक्षा: इस सॉफ्टवेयर का उपयोग केवल वही डॉक्टर या क्लीनिक कर सकते हैं जो HPR और HFR रजिस्ट्रियों के माध्यम से सत्यापित हैं।
  • वर्तमान स्थिति: लॉन्च के कुछ ही समय के भीतर 2200 से अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं इस पर ऑनबोर्ड हो चुकी हैं और 1633 से अधिक डिजिटल रिकॉर्ड बनाए जा चुके हैं।

नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX): बीमा दावों का त्वरित निपटान

जब कोई मरीज अस्पताल में भर्ती होता है, तो इलाज के बाद सबसे ज्यादा मानसिक तनाव हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों से क्लेम (दावा) पास कराने में होता है। कई बार अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी मरीज को डिस्चार्ज पेपर और क्लेम अप्रूवल के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।

इस प्रक्रिया को पूरी तरह सुव्यवस्थित करने के लिए नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (NHCX) को एक डिजिटल हाईवे के रूप में विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म बीमा प्रदाताओं (Payers), अस्पतालों (Providers), आम नागरिकों (Beneficiaries) और नियामकों (Regulators) के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान करता है।

NHCX के प्रमुख लाभ:

  • समय की बचत: यह बीमा दावों के प्रसंस्करण (Processing) को तेज करता है, जिससे अस्पतालों से छुट्टी मिलने का समय (Discharge Time) बहुत कम हो जाता है।
  • पारदर्शिता: मरीज अपने सभी वित्तीय लाभों, क्लेम की स्थिति और बीमा पात्रता को एक ही स्थान पर लाइव ट्रैक कर सकते हैं।
  • बेहतर चिकित्सा निर्णय: मरीज की सहमति से डॉक्टर उसके पिछले सभी उपचारों का इतिहास देख सकते हैं, जिससे अनावश्यक दोबारा टेस्ट कराने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • गैर-संचारी रोग (NCDs) वाले मरीजों के लिए वरदान: ऐसे मरीज जिन्हें कैंसर, मधुमेह या हृदय रोग जैसी बीमारियों के लिए नियमित और निरंतर इलाज की आवश्यकता होती है, उनके लिए वित्तीय योजना बनाना और क्लेम प्रोसेस करना बेहद आसान हो जाता है।

यूनीफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI): खुली और निष्पक्ष स्वास्थ्य सेवाएं

पहले के समय में, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए यह जरूरी होता था कि मरीज और डॉक्टर दोनों एक ही विशिष्ट मोबाइल एप्लीकेशन या प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हों। लेकिन UHI ने इस बाधा को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।

अब मरीज अपने पसंदीदा UHI-सक्षम ऐप का उपयोग करके देश के किसी भी कोने में बैठे सत्यापित डॉक्टर से संपर्क कर सकता है। इसके सभी अनुरोध राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के सुरक्षित गेटवे के माध्यम से रूट होते हैं।

UHI के चार मार्गदर्शक सिद्धांत:

  1. इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability): विभिन्न ऐप्स और सॉफ्टवेयर का आपस में सहजता से काम करना।
  2. निष्पक्ष खोज योग्यता (Fair Discoverability): छोटे और बड़े सभी डॉक्टरों/अस्पतालों को मरीजों के सामने आने का समान अवसर मिलना।
  3. सत्यापन (Verification): केवल पंजीकृत और योग्य डॉक्टरों को ही इस नेटवर्क पर सेवा देने की अनुमति।
  4. ओपन प्रोटोकॉल: कोई भी सॉफ्टवेयर डेवलपर इस खुले तकनीकी ढांचे पर अपने नए ऐप्स बना सकता है।

वर्तमान में UHI पर पांच लाइव सेवाएं उपलब्ध हैं:

  1. नजदीकी ब्लड बैंक की खोज करना।
  2. PM-JAY (आयुष्मान भारत योजना) के तहत आने वाले उन अस्पतालों को खोजना जहां ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है।
  3. जन औषधि केंद्रों की खोज, जहां जेनेरिक दवाएं बाजार से 50% से 90% तक सस्ती मिलती हैं।
  4. आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस की बुकिंग।
  5. डॉक्टरों के साथ ऑनलाइन परामर्श (Doctor Consultation)।

पब्लिक हेल्थ डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का संगम

ABDM के तहत बनने वाले करोड़ों डिजिटल रिकॉर्ड्स केवल इलाज तक सीमित नहीं हैं; ये भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति (Public Health Policy) और अनुसंधान के लिए एक ऐतिहासिक ‘गोल्डमाइन’ (खजाना) साबित हो रहे हैं।

गोपनीयता और सुरक्षा (Privacy-by-Design)

अक्सर लोगों के मन में यह शंका होती है कि उनका संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा सरकार या हैकर्स के हाथ में तो नहीं चला जाएगा? सरकार ने इसे “प्राइवेसी-बाय-डिजाइन” सिद्धांत पर बनाया है:

  • कोई केंद्रीय सर्वर नहीं: सरकार का कोई केंद्रीय सर्वर आपके मेडिकल रिकॉर्ड को स्टोर नहीं करता। आपका डेटा उसी अस्पताल, लैब या डॉक्टर के पास रहता है जिसने इसे बनाया है।
  • मरीज की पूर्ण सहमति: आपका डेटा नेटवर्क पर तभी शेयर किया जा सकता है जब आप अपने मोबाइल पर आने वाली ‘रेवोकेबल’ (कभी भी वापस ली जा सकने वाली) और समय-बाध्य सहमति (Consent) को मंजूरी देते हैं।
  • सैंडबॉक्स टेस्टिंग: किसी भी नए ऐप या प्लेटफॉर्म को इस मिशन से जुड़ने से पहले एक सुरक्षित नकली वातावरण (Sandbox) में कड़े सुरक्षा ऑडिट से गुजरना पड़ता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की शुरुआत (SAHI और BODH)

फरवरी 2026 में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में सरकार ने दो ऐतिहासिक प्रणालियों को पेश किया:

  1. SAHI (Strategy for Artificial Intelligence in Healthcare for India): यह स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआई (AI) के नैतिक, सुरक्षित, जवाबदेह और जन-केंद्रित उपयोग के लिए एक मार्गदर्शिका है।
  2. BODH (Benchmarking Open Data Platform for Health AI): यह एक बेहद सुरक्षित, संघीकृत (Federated) इकोसिस्टम है। यहाँ डेवलपर्स एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित (Train) कर सकते हैं, लेकिन वे मरीजों के मूल या कच्चे डेटा (Raw Data) को देख या छू नहीं सकते। वे केवल परिष्कृत मॉडल वेट्स (Model Weights) को ही बाहर ले जा सकते हैं, जिससे मरीजों की गोपनीयता 100% सुरक्षित रहती है।

निष्कर्ष: डिजिटल भारत, स्वस्थ भारत

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन आज दुनिया का सबसे महत्वाकांक्षी और सफल डिजिटल स्वास्थ्य कार्यक्रम बन चुका है। मई 2026 में 100 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स को 90 करोड़ से अधिक ABHA खातों से जोड़ने का ऐतिहासिक मील का पत्थर पार करने के बाद, आज जुलाई 2026 में यह आंकड़ा 104 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स और 93 करोड़ ABHA खातों तक पहुंच चुका है।

अस्पतालों की लंबी लाइनों से मुक्ति, कागजरहित इलाज, बीमा के पैसों का तुरंत निपटान और एआई-आधारित उन्नत चिकित्सा अनुसंधान की बदौलत भारत अपने हर एक नागरिक को सुरक्षित, सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवा देने के संकल्प को तेजी से साकार कर रहा है। सरकार का अगला लक्ष्य देश के हर छोटे-बड़े चिकित्सा केंद्र और प्रत्येक नागरिक को इस नेटवर्क के दायरे में लाना है ताकि आने वाले समय में देश का कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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