नई दिल्ली : नासा के ऐतिहासिक आर्टेमिस-II मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के करीब पहुंचने के बाद अपना पहला अनुभव साझा किया है। ओरियन कैप्सूल में सवार चालक दल के सदस्यों ने बताया कि अंतरिक्ष की खिड़की से चंद्रमा को देखना पृथ्वी से दिखने वाले नजारे से बिल्कुल अलग और मंत्रमुग्ध कर देने वाला है।
अंधेरे वाला हिस्सा भी दिखता है अलग
अमेरिकी मीडिया से बातचीत के दौरान मिशन की महत्वपूर्ण सदस्य क्रिस्टीना कोच ने बताया कि अंतरिक्ष से चांद वैसा नहीं दिखता जैसा हम धरती से देखने के अभ्यस्त हैं। कोच ने कहा, “जब आप यहां से चांद को देखते हैं, तो आपकी समझ बदल जाती है। चांद का अंधेरे वाला हिस्सा यहां से बिल्कुल अलग और कुछ ऐसी जगह पर महसूस होता है जिसकी हम कल्पना नहीं करते।”
चालक दल के सदस्य रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और जेरेमी हैनसेन इस अनजान और नए नजारे को समझने के लिए अपनी ट्रेनिंग के दौरान मिले मानचित्रों और जानकारी से लगातार इसकी तुलना कर रहे हैं।
कैंपर वैन जितना छोटा है आशियाना
अंतरिक्ष यात्रियों ने ओरियन कैप्सूल के अंदर के जीवन के बारे में भी दिलचस्प बातें साझा की। लगभग 16.5 फीट चौड़े इस कैप्सूल में रहने की जगह एक ‘कैंपर वैन’ के बराबर है।
इतने चुनौतीपूर्ण मिशन पर होने के बावजूद अंतरिक्ष यात्री सामान्य इंसानों की तरह अपनी दिनचर्या बिता रहे हैं।
क्रिस्टीना कोच ने मजाक में कहा, “यह बेहद रोमांचक है कि एक पल हम चांद के दूसरी तरफ की भव्यता देख रहे होते हैं और अगले ही पल हमें अपने मोजे बदलने की चिंता होती है और हम मोजों की जोड़ी ढूंढने लगते हैं।”
मिशन का लक्ष्य और वापसी
नासा का यह मिशन चंद्रमा के रहस्यों को सुलझाने और भविष्य के अभियानों की नींव रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
यह मिशन 10 अप्रैल, 2026 को प्रशांत महासागर में कैप्सूल के गिरने (स्प्लैशडाउन) के साथ समाप्त होगा। नासा का लक्ष्य साल 2028 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर दो अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना और वहां एक स्थायी बेस स्थापित करना है।



