नई दिल्ली: भारत सरकार ने नशीले पदार्थों के सेवन और तस्करी को एक गंभीर सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में पहचाना है। यह संकट केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे परिवारों की नींव को खोखला कर रहा है, समुदायों को प्रभावित कर रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक चुनौती पेश कर रहा है। इसी व्यापक चुनौती से निपटने और एक सुरक्षित समाज के निर्माण हेतु, सरकार ने एक अभूतपूर्व डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘मानस’ (मादक पदार्थ निषेध आसूचना केंद्र) की शुरुआत की है।
मानस की आधारशिला: क्यों पड़ी इसकी आवश्यकता?
आज के समय में नशे का प्रसार जिस तेजी से हुआ है, उसने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है। पहले के समय में, जब कोई व्यक्ति किसी संदिग्ध गतिविधि को देखता था, तो उसे रिपोर्ट करने का कोई स्पष्ट और सुरक्षित माध्यम नहीं होता था। नागरिक अक्सर ‘मौन प्रेक्षक’ बनकर रह जाते थे। इस समस्या को जड़ से मिटाने और नागरिकों को ‘नशा मुक्त भारत’ के अभियान में एक सक्रिय साझीदार बनाने के लिए, गृह मंत्रालय के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के सहयोग से 18 जुलाई 2024 को मानस लॉन्च किया।
मानस की कार्यप्रणाली: तकनीक और सुरक्षा का संगम
MANAS का उद्देश्य सूचना देने की प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित और प्रभावी बनाना है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख आयाम शामिल हैं:
- गोपनीयता और सुरक्षा: मानस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। इससे आम नागरिक बिना किसी डर के नशे के सौदागरों के खिलाफ जानकारी दे सकते हैं।
- बहुआयामी पहुँच: इसे केवल एक हेल्पलाइन नंबर तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे 1933 हेल्पलाइन नंबर, आधिकारिक पोर्टल, ईमेल और उमंग ऐप जैसे विविध माध्यमों से जोड़ा गया है।
- एकीकृत रिस्पांस सिस्टम: जैसे ही कोई सूचना प्राप्त होती है, सिस्टम डिजिटल टिकट जनरेट करता है। यह सूचना तुरंत संबंधित एनसीबीज़ोनल यूनिट और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की नशीले पदार्थों के विरुद्ध कार्य बल (एएनटीएफ) तक पहुँचती है।
- परामर्श और पुनर्वास: मानस केवल रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है। नशे से पीड़ित लोगों के लिए, यह प्लेटफॉर्म सीधे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन 14446 के साथ जुड़ा हुआ है, जिससे उन्हें तुरंत काउंसलिंग और पुनर्वास सहायता मिल सके।
नशे की भयानक तस्वीर: भारत का वर्तमान डेटा
‘भारत में नशीले पदार्थों के सेवन का स्तर (2019)’ की व्यापक रिपोर्ट ने इस संकट की गंभीरता को उजागर किया था:
- शराब: लगभग 16 करोड़ लोग सेवन करते हैं, जिनमें से 5.7 करोड़ लोग गंभीर व्यसनी हैं।
- कैनबिस और ओपिओइड्स: 3.1 करोड़ लोग कैनबिस और 2.26 करोड़ लोग ओपिओइड्स का शिकार हैं।
- ओपिओइड निर्भरता: करीब 2.8 करोड़ लोग ओपिओइड्स पर निर्भर हैं, और उनमें से 28 लाख लोगों को जीवन बचाने के लिए तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
मानवीय दृष्टिकोण: नशे के पीड़ित को कैसे देखें?
नशे का शिकार व्यक्ति एक अपराधी नहीं, बल्कि एक ‘पीड़ित’ है। हमें इस कलंक को मिटाना होगा। मानस न केवल कानून लागू करने पर जोर देता है, बल्कि यह जागरूकता फैलाता है कि नशे के शिकार व्यक्ति को समाज से तिरस्कृत करने के बजाय, उसे सम्मान के साथ सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में ले जाना चाहिए। काउंसलिंग और थेरेपी उसका जन्मसिद्ध अधिकार है।
इतिहास और वर्तमान प्रवृत्तियों का तुलनात्मक विश्लेषण
- ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: दशकों तक नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई सूचना के अभाव और समन्वय की कमी से जूझ रही थी। नागरिक और कानून लागू करने वाली एजेंसियां एक-दूसरे से कटे हुए थे। डेटा एकत्र करना कागजी कार्रवाई तक सीमित था, जिससे रुझानों को पहचानना कठिन था।
- वर्तमान डिजिटल क्रांति: आज ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (डीपीआई) के युग में, मानस ने सब कुछ बदल दिया है। डेटा अब रीयल-टाइम में उपलब्ध है। एजेंसियां पैटर्न देख सकती हैं—जैसे कि कौन सा इलाका हॉटस्पॉट बन रहा है। अब कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से सूचना दे सकता है, जिससे प्रतिक्रिया समय घंटों से घटकर मिनटों में आ गया है। यह डेटा-संचालित शासन का बेहतरीन उदाहरण है।
डिजिटल इंडिया और मानस का विजन
मन , भारत के डिजिटल इंडिया मिशन का एक जीवंत उदाहरण है। यह न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाता है बल्कि:
- यह 30 एनसीबी ज़ोनल यूनिट्स को सीधे जनता से जोड़ता है।
- यह माईगवके माध्यम से युवाओं के लिए क्विज़, पोस्टर और रील-मेकिंग प्रतियोगिताएं आयोजित करता है, ताकि युवाओं में नशे के खिलाफ एक ‘जन-आंदोलन’ खड़ा हो सके।
- यह एक ‘स्मार्ट आईवीआरएस’ और चैटबॉट विकसित कर रहा है ताकि भाषा की बाधा दूर हो सके और हर क्षेत्र का नागरिक इसका लाभ उठा सके।
निष्कर्ष: एक सुरक्षित कल की ओर
मानस केवल एक सरकारी पोर्टल नहीं है, यह करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा के लिए एक ‘डिजिटल ढाल’ है। जिस तरह से यह तकनीक, नागरिक भागीदारी और सरकारी संवेदनाओं को एक साथ जोड़ता है, वह विश्व स्तर पर भी एक मॉडल हो सकता है। यह ‘नशा मुक्त भारत’ का संकल्प है—हर एक कॉल, हर एक रिपोर्ट और हर एक नागरिक के साहस के साथ।



