नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता को ₹6 करोड़ की राशि जमा करने के लिए 30 दिनों का अतिरिक्त समय देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने राजपाल यादव के ढुलमुल रवैये और बार-बार बदलते बयानों पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राजपाल यादव की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पैसे जुटाने के लिए एक महीने की मोहलत मांगी थी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जज ने सख्त लहजे में कहा, “नहीं मतलब नहीं। मैं अब और समय नहीं दूंगी और फैसला सुरक्षित रख रही हूं।” अदालत ने अभिनेता की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ वह भुगतान करने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके वकील दलील दे रहे हैं कि चूंकि वह पहले ही जेल जा चुके हैं, इसलिए अब भुगतान नहीं करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद साल 2024 का है, जब एक सेशन कोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में राजपाल यादव को दोषी करार देते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने इस शर्त पर सजा पर रोक लगा दी थी कि राजपाल यादव संबंधित राशि का भुगतान करेंगे और मामले को मध्यस्थता (Mediation) के जरिए सुलझाएंगे। हालांकि, अभिनेता ने अदालत में कई बार आश्वासन दिए, लेकिन तय राशि जमा करने में विफल रहे। किस्तों में भुगतान करने के वादे भी पूरे नहीं किए गए, जिससे अदालत का धैर्य जवाब दे गया।
अब आगे क्या?
अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल ठोस कार्रवाई और भुगतान ही इस मामले का हल हो सकता है, खोखले आश्वासनों के लिए कोई जगह नहीं है। जज ने कहा, “अगर आप भुगतान करने के इच्छुक हैं, तो मैं यह मामला क्यों सुन रही हूं? सीधे भुगतान कीजिए।” अब कोर्ट के सुरक्षित फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यदि राजपाल यादव वित्तीय देनदारियों को पूरा नहीं करते हैं, तो उन्हें दोबारा जेल की सजा काटनी पड़ सकती है।



