वोट बदलते रहे, पर नहीं बदली सिकटी की तकदीर

भारत-नेपाल सीमा पर बसा सिकटी विधानसभा क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बाढ़, कटाव और विस्थापन है। विकास के कई दावे किए जाते हैं, पर हर साल आने वाली बाढ़ चुनावी मुद्दा बनती है।

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पटना: बिहार में सिकटी विधानसभा के लोगों की कहानी, यहां की नदियों की तरह ही है। जिस तरह बकरा और नूना नदियां हर साल अपना रास्ता बदलती हैं, उसी तरह यहां के मतदाताओं ने भी अपनी सियासी पसंद को बदला है। लेकिन चाहे भाजपा हो, कांग्रेस हो या कोई निर्दलीय, कोई भी नेता इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बाढ़ और कटावका स्थायी समाधान नहीं कर पाया है। यह क्षेत्र आज भी विकास की राह देख रहा है।
1977 में अस्तित्व में आने के बाद से सिकटी में 11 चुनाव हुए, जिसमें चार बार भाजपा, तीन बार कांग्रेस और दो बार निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत मिली। इसके अलावा जनता दल और जदयू को एक-एक बार सफलता मिली।

वर्तमान और पिछले विधायक
वर्तमान में सिकटी से विजय कुमार मंडल (भाजपा) विधायक हैं, जो बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री भी हैं। वह लगातार दो बार से विधायक हैं। इससे पहले, वह 1995 (बिपीपा), 2000 (निर्दलीय), और 2009 (उपचुनाव- लोजपा) में अररिया सदर सीट से भी चुनाव जीत चुके हैं। इस तरह, विजय मंडल कुल 5 बार विधायक रहे हैं। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी शत्रुघ्न प्रसाद 2015 में जदयू और 2020 में राजद से चुनाव लड़े थे।

विकास और समस्याएं
पिछले 5 वर्षों में, सिकटी में स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली के क्षेत्र में कई काम हुए हैं। सड़कों और पुल-पुलियों का भी निर्माण हुआ है। हालांकि, सबसे बड़ी समस्या, बाढ़ और कटाव, अब तक दूर नहीं हो पाई है। विधानसभा क्षेत्र में परमान, बकरा, नूना जैसी कई नदियां बहती हैं, जो नेपाल से आने वाले पानी से हर साल तबाही मचाती हैं।

विपक्ष का आरोप
निकटतम प्रतिद्वंद्वी शत्रुघ्न प्रसाद मंडल (राजद) का आरोप है कि बाढ़ और विस्थापन की समस्या अभी तक हल नहीं हुई है। उन्होंने पिछले साल बकरा नदी पर बने पुल के ध्वस्त होने को भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया। वे कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में सड़कों और पुलों की कमी है, सरकारी कार्यालयों में अफसरशाही हावी है और भ्रष्टाचार चरम पर है। साथ ही, क्षेत्र में कोई सरकारी डिग्री कॉलेज भी नहीं है।

सत्ता पक्ष का दावा
विधायक विजय कुमार मंडल ने विकास के कई काम गिनाए। उन्होंने एबीएम-सिकटी पथ के जीर्णोद्धार, पलासी में पावर ग्रिड की स्थापना, 400 सड़कों और 125 छोटी-बड़ी पुल-पुलियों के निर्माण की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि बॉर्डर सड़क और अररिया-गललिया रेल लाइन का निर्माण भी विकास को दर्शाता है। इसके अलावा, ऐतिहासिक सुंदरनाथ धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

सुंदरनाथ धाम का इतिहास
कुर्साकांटा प्रखंड में स्थित ऐतिहासिक सुंदरनाथ धाम का एक पुराना इतिहास है। पौराणिक कथा के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर भीम यहां 108 कमल पुष्प लेकर आए थे, जिनसे माता कुंती ने पांडवों के साथ बाबा सुंदरनाथ और माता पार्वती की पूजा की थी।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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