नई दिल्ली: दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री आशीष सूद का मानना है कि एक देश-एक चुनाव मौजूदा वक्त की जरूरत है। बार-बार चुनाव होने से समय की ही नहीं, धन और संसाधन की भी बर्बादी होती है। आशीष सूद बुधवार दिल्ली में लोकतांत्रिक अध्यापक मंच की तरफ से आयोजित एक राष्ट्र, एक चुनाव कार्यक्रम में बोल रहे थे।
आशीष सूद के मुताबिक, भारत का मतदाता इस वक्त समझदार है। वह राज्य और केंद्र के मुद्दों को अलग-अलग समझता है और सही फैसला लेता है। विचार करिए अगर हर 6 महीने में कहीं न कहीं चुनाव की बजाय, हर 5 साल में एक चुनाव हो, तो युवा पीढ़ी को सिर्फ प्रचार देखने की जगह नीति निर्माण और देश की दिशा में हिस्सा लेने का समय मिलेगा। यह केवल खर्च बचाने की बात नहीं बल्कि यह देश की विकास यात्रा को रोकने से बचाने की सोच है।
शिक्षक इस मिशन में अहम भूमिका निभाएंगे
आशीष सूद ने शिक्षकों को याद दिलाया कि वह सिर्फ स्कूल में पढ़ाने वाले नहीं हैं, देश की नींव रखने वाले रचानाकार हैं। वन नेशन, वन इलेक्शन से शिक्षा का रास्ता और साफ होगा। शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण के काम में और वक्त और ऊर्जा देने का मौका मिलेगा। आज बदलाव की जरूरत है, और बदलाव की शुरुआत शिक्षा से होती है।
आशीष सूद के मुताबिक, एक नेशन, एक इलेक्शन से न केवल शिक्षकों का कार्यभार कम होगा, बल्कि वह पढ़ाने और देश का भविष्य संवारने जैसे असली कार्यों पर ध्यान भी दे सकेंगे। वन नेशन, वन इलेक्शन लागू होने से चुनाव प्रक्रिया सरल और आसान होगी। शिक्षकों को बार-बार चुनाव ड्यूटी पर नहीं लगाया जाएगा। वह शिक्षा पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। इसके साथ ही हर 5 साल में केवल एक बार चुनाव होने से 12,000 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है। इसका उपयोग स्कॉलरशिप देने में, स्मार्ट क्लासरूम बनाने में, शोध को बढ़ावा देने में किया जा सकता है।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से मतदान प्रतिशत बढ़ता है। जैसे 1999 में एक साथ चुनाव करवाने से कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश में मतदान में 11.5 फीसदी की वृद्धि हुई। इसी प्रकार आरुणाचल प्रदेश में 21 प्रतिशत, केरल में 20 फीसदी की वृद्धि हुई।



