नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में 18 सितंबर को होने वाले छात्र संघ (DUSU) चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 2 दिन बाद चुनाव होने हैं और सभी छात्र संगठन चुनावी प्रचार में जुड़ गए हैं। वही NSUI में अंदरूनी संघर्ष और CYSS का अंतिम समय पर चुनाव से पीछे हटना चुनावी समीकरणों को प्री तरह बदल रहा है।
NSUI में गुटबाजी और विवाद
NSUI के AICC इंचार्ज कन्हैया कुमार और अध्यक्ष वरुण चौधरी के बीच बैठक के बाद पार्टी में दो गुट बन गए। कुमार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की नई प्रक्रिया लागू की, जिसे कई सूत्रों ने नेताओं के व्यक्तिगत अहंकार और संघर्ष का परिणाम बताया।
क्या NSUI के लिए मुसीबत बनेंगी उमांशी लांबा
उमांशी लांबा DUSU चुनाव में एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में उभर कर सामने आ रही हैं। यूनिवर्सिटी में भारी मात्रा में उन्हें छात्रो का समर्थन भी मिल रहा हैं। लेकिन उनकी ये लोकप्रियता NSUI के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती हैं। दरअसल उमांशी लांबा शुरुवात से ही NSUI के साथ ही चुनाव कैंपेन में सक्रीय रूप से शामिल थी ऐसा माना जा रहा था की छात्र संघ द्वारा उन्हें चुनाव में उतारा जाएगा लेकिन जब NSUI ने आधिकारिक रूप से उम्मीदवारों के नामो की घोषणा की तो पार्टी की तरफ से उमांशी लांबा को टिकट नहीं दिया गया जिसके बाद वह और उनके समर्थक इस बात से बहुत नाराज भी नजर आए। हालाकि उमांशी अब निर्दलीय चुनाव लड़ने जा रही हैं जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा हैं की आगामी चुनाव में वह NSUI के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
CYSS का चुनाव से पीछे हटना
CYSS ने DUSU चुनाव से पीछे हटने का निर्णय ले लिया हैं। दिल्ली स्टेट सेक्रेटरी कमल तिवारी के अनुसार, कॉलेजों में पकड़ की कमी और पंजाब यूनिवर्सिटी में पिछली हार के कारण संघ द्वारा यह फैसला लिया गया। हलाकि CYSS ने यह स्पष्ट किया की पार्टी कॉलेज यूनियन चुनाव जरूर लड़ेगी और सालभर छात्र मुद्दों को उठाएगी।
विवादों से किसका होगा फायदा और नुकसान
इन विवादों से कही न कही ABVP को फायदा हो सकता है क्योंकि NSUI के अंदरूनी संघर्ष और उमांशी लांबा के स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतरने से संगठन की चुनावी ताकत घट गई हैं। CYSS चुनाव से पीछे हटने के कारण उसका वोट बैंक भी इस बार सक्रिय नहीं होगा। ऐसे में छात्रों को भी नुकसान हो सकता है क्योंकि चुनावी विकल्प सीमित होंगे और प्रतिस्पर्धा कम होने से छात्र मुद्दों पर गंभीर बहस की संभावना घट सकती है।



