DU में FYUP का चौथा साल पहली बार, एक अगस्त से लगेंगी कक्षाएं

दिल्ली विश्वविद्यालय में इस बार FYUP का चौथा साल पहली बार शुरू होने जा रहा है। एक अगस्त से कक्षाएं लगेंगी 50,000 इसमें से ज्यादा छात्र शामिल होंगे।

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लागू फोर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) में प्रवेश लेने वाले पहले बैच के छात्रों के लिए चौथे वर्ष की कक्षाएं 1 अगस्त से शुरू होंगी। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के कुलपति योगेश सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं ओर साथ ही अब तक 72,000 से अधिक तीसरे वर्ष के छात्रों में से 20,221 छात्रों ने FYUP से बाहर निकलने का विकल्प चुना है, यानी 50,000 से अधिक छात्र चौथे वर्ष में पढ़ाई जारी रखेंगे।

शिक्षकों और अधोसंरचना को लेकर जताई जा रही चिंताएं
हालांकि कुछ शिक्षकों का कहना है कि कॉलेजों के पास न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही चौथे वर्ष के छात्रों के लिए अधोसंरचना। राजधानी कॉलेज के प्रोफेसर राजेश झा ने कहा, “कक्षाओं की तैयारी चल रही है लेकिन न तो नए कमरे हैं और न ही अतिरिक्त शिक्षक। हमें या तो सुबह जल्दी या देर शाम कक्षाएं लेनी पड़ेंगी।”

DU प्रशासन का दावा
इन चिंताओं के जवाब में DU प्रमुख योगेश सिंह ने आश्वस्त किया कि सभी कॉलेजों के प्रिंसिपल तैयारियों में लगे हुए हैं और वरिष्ठ शिक्षक चौथे वर्ष की कक्षाएं लेंगे।इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने यह भी उल्लेख किया है कि किसी भी तरह की अधोसंरचना या स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की योजना बनाई जा रही है। कॉलेजों को बेहतर कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रशासनिक स्तर पर जल्द कदम उठाए जा रहे हैं।

इस तरह, विश्वविद्यालय का मानना है कि आगामी चौथा वर्ष FYUP के लिए सफलता का मील का पत्थर साबित होगा और छात्रों के लिए गुणवत्ता युक्त शिक्षा की गारंटी देगा।
FYUP क्या है?

  • FYUP की शुरुआत DU में वर्ष 2022 में की गई थी। इस कार्यक्रम के तहत:
  • एक वर्ष के बाद सर्टिफिकेट।
  • दो वर्ष के बाद डिप्लोमा।
  • तीन वर्ष के बाद स्नातक डिग्री।
  • चार वर्ष के बाद अनुसंधान विशेषज्ञता के साथ स्नातक डिग्री प्राप्त की जा सकती है।

निष्कर्ष
दिल्ली विश्वविद्यालय का यह नया शैक्षणिक ढांचा अब अपने महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहा है। जहां एक ओर विश्वविद्यालय प्रशासन इसे सफल बनाने के लिए आश्वस्त नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर कॉलेज स्तर पर संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि यह चौथा वर्ष छात्रों और शिक्षकों के लिए किस तरह का अनुभव लेकर आता है।

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