नालंदा: बिहार चुनाव के पहले चरण के नामांकन की समय सीमा शुक्रवार को खत्म हो गई, लेकिन महागठबंधन का सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सामने नहीं आ सका। जिसके चलते नालंदा में महागठबंधन के नेताओं में फूट स्पष्ट देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां नालंदा के 7 विधानसभा सीटों में से महागठबंधन ने राजगीर सीट CPIML नेता ई. विश्वनाथ चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं अस्थावां विधानसभा से राजद के रविरंजन कुमार उर्फ छोटू मुखिया, हिलसा विधानसभा से शक्ति यादव, इस्लामपुर विधानसभा राकेश रोशन, हरनौत विधानसभा से कांग्रेस ने अरुण कुमार बिंद, नालंदा विधानसभा से कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया तो वहीं, बिहार शरीफ कांग्रेस की ओर से गया के उमैर खान को उम्मीदवार बनाया। लेकिन पेंच तब फंस गया जब महागठबंधन की ओर से कांग्रेस का टिकट फाइनल कर दिया गया।
महागठबंधन की ओर से बिहार शरीफ से सीपीआई नेता शिव कुमार यादव ने अपना नामांकन कर महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर चल रहे विवाद में आग में घी डालने का काम किया है। नामांकन पर्चा दाखिल करने के बाद सीपीआई के उम्मीदवार शिव कुमार यादव ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि उनकी भलाई इसी में है कि वह नामांकन वापस ले लें। इसके अलावा दो तीन अन्य विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस ने मनमाने ढंग से अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं, जो बिल्कुल गलत और बेबुनियाद है। हम लोग हमेशा से किसान, मजदूर, अल्पसंख्यक से जुड़े हर मुद्दों को लेकर सड़क से सदन तक खड़े होकर आवाज उठाते हैं। यहां पैराशूट वाले उम्मीदवार की जरुरत नहीं है। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी उमैर खान ने नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में कहा महागठबंधन की ओर से हमें बिहारशरीफ विधानसभा क्षेत्र का उम्मीदवार बनाया गया है। इसलिए उन्हें नामांकन वापस ले लेना चाहिए। बाकी चीजें पार्टी के शीर्ष नेता इस पर आगे फैसला लेंगे।



