लखनऊ। प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन बैरियर तोड़ने और बिना अनुमति पालकी के साथ भीड़ में प्रवेश करने के आरोप लगाते हुए सवाल किया गया है कि क्यों न उन्हें हमेशा के लिए माघ मेले से प्रतिबंधित कर दिया जाए।
48 घंटे में दूसरा नोटिस
प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन इमरजेंसी के लिए आरक्षित पांटून पुल पर लगे बैरियर को तोड़कर अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना अनुमति संगम जाने की कोशिश की। इससे भगदड़ की स्थिति बन सकती थी और सुरक्षा व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हुई। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संस्था को दी गई जमीन और अन्य सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं।
प्रशासन ने उठाए दो प्रमुख सवाल
दूसरे नोटिस में मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद से दो बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इमरजेंसी पांटून पुल का बैरियर तोड़कर बग्घी के साथ संगम जाने की कोशिश करने से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। इससे श्रद्धालुओं को वापस भेजने में कठिनाई हुई और मेले की व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई। मेले में स्वयं को शंकराचार्य बताते हुए बोर्ड लगाए गए हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश के अनुसार उनके शंकराचार्य होने पर रोक है।
बदले की भावना से कार्रवाई
अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नोटिस को पंडाल के पीछे गुपचुप तरीके से चस्पा किया गया और इसकी जानकारी जानबूझकर नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि नोटिस पर 18 जनवरी की तारीख अंकित है, जिससे यह बैकडेट में जारी किया गया प्रतीत होता है। उनका कहना है कि नोटिस का जवाब तैयार कर लिया गया है और जल्द ही मेला प्रशासन को सौंपा जाएगा।

पहले नोटिस का भी दिया जा चुका है जवाब
इससे पहले सोमवार देर रात मेला प्रशासन की ओर से पहला नोटिस दिया गया था, जिसे शिष्यों ने रात में लेने से मना कर दिया। इसके बाद मंगलवार सुबह शिविर के गेट पर नोटिस चस्पा किया गया। इसमें स्वयं को शंकराचार्य घोषित करने को लेकर सवाल उठाए गए थे। करीब 12 घंटे बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन को आठ पन्नों का जवाब भेजते हुए नोटिस वापस न लेने पर मानहानि का केस करने की चेतावनी दी थी।
मौनी अमावस्या पर हुआ था टकराव
18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकते हुए पैदल जाने को कहा, जिस पर विवाद बढ़ गया और शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई। इससे नाराज होकर अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे।



