नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के कटरा में माता वैष्णो देवी मंदिर (Vaishno Devi Landslide) के पुराने ट्रैक पर मंगलवार दोपहर हुए भयानक भूस्खलन ने अब तक 31 लोगों की जान ले ली है। यह हादसा अर्धकुमारी मंदिर के पास इंद्रप्रस्थ भोजनालय के नजदीक हुआ, जहां अचानक विशाल पत्थर, मलबा और पेड़ नीचे गिरने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सब कुछ पलक झपकते तबाह हो गया। प्रशासन के मुताबिक, 25 से ज्यादा लोग घायल हैं और कई अभी भी लापता हैं। मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है। भारी बारिश के कारण वैष्णो देवी यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। जम्मू में पिछले 24 घंटों में 250 मिमी से अधिक बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं, जिससे घर, खेत और सड़कें जलमग्न हो गई हैं। रेलवे ने भी कटरा से आने-जाने वाली 22 ट्रेनें रद्द कर दी हैं और 27 ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट किया है, हालांकि कटरा-श्रीनगर रूट पर सर्विस चल रही है।
चश्मदीदों की आपबीती: पल में सब कुछ खत्म हो गया
हादसे के दौरान मौजूद श्रद्धालुओं ने दिल दहला देने वाले अनुभव साझा किए।
- रमेश कुमार (अमृतसर, पंजाब): हम परिवार के साथ माता के दर्शन के लिए जा रहे थे। मेरी पत्नी और बेटा आगे थे। अचानक चट्टानें गिरीं और धूल का गुबार छा गया। अब मुझे उनके बारे में कुछ नहीं पता। मैं बस प्रार्थना कर रहा हूं।
- संगीता शर्मा (दिल्ली): मैं अपने तीन बच्चों के साथ थी। हम मंदिर की ओर बढ़ रहे थे कि अचानक पत्थरों की आवाज आई। मैंने बच्चों को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन दो बच्चे मलबे में दब गए। मेरे पास शब्द नहीं हैं।
- विक्रम सिंह (रोहतक, हरियाणा): मैं पीछे था, लेकिन मेरे ग्रुप के चार लोग आगे थे। सैकड़ों लोग उस रास्ते पर थे। अब तक कोई खबर नहीं मिली। मैं डर के मारे कांप रहा हूं।
- रीता देवी (मोहाली): मैं दर्शन कर लौट रही थी। अचानक लोग चिल्लाने लगे और मैंने देखा कि पहाड़ से पत्थर लुढ़क रहे हैं। मैं भागी, लेकिन मेरे पैर में चोट लगी। मेरे साथ आए दो लोग अभी भी लापता हैं।
जम्मू में रिकॉर्ड तोड़ बारिश, बाढ़ का खतरा
मंगलवार को जम्मू में 6 घंटे (सुबह 11:30 से शाम 5:30 तक) में 22 सेमी बारिश दर्ज की गई, जो इस सीजन की सबसे भारी वर्षा है। रात में और बारिश हुई, जिससे झेलम नदी का जलस्तर 22 फीट को पार कर गया। दक्षिण कश्मीर में बाढ़ का अलर्ट जारी है। जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर, आरएस पुरा, अखनूर और नगरोटा जैसे इलाकों में पानी भर गया है। रियासी, डोडा और बनिहाल में हल्की बारिश जारी है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
राहत और बचाव कार्य तेज, सेना भी जुटी
प्रशासन और सेना ने राहत कार्यों को तेज कर दिया है। जम्मू जिले में अब तक 3,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जम्मू के यूथ हॉस्टल में राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां लोगों को भोजन और मेडिकल सुविधाएं दी जा रही हैं। सेना ने इलाके को तीन हिस्सों—अर्धकुमारी, कटरा-ठक्कड़ कोट रोड और जौरियन—में बांटकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस भी दिन-रात काम कर रही है।
पर्यावरण और अवैज्ञानिक निर्माण पर सवाल
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के पीछे अवैज्ञानिक निर्माण भी जिम्मेदार है। जम्मू-कटरा रोड और आसपास के प्रोजेक्ट्स में भारी मशीनों और ब्लास्टिंग का इस्तेमाल पहाड़ों को कमजोर कर रहा है। जंगलों की कटाई ने भी मिट्टी के कटाव को बढ़ाया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर निर्माण कार्यों में सुधार नहीं हुआ तो ऐसी घटनाएं और बढ़ेंगी।
यात्रियों के लिए सलाह
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जब तक मौसम सामान्य न हो जाए, वैष्णो देवी यात्रा से बचें। कटरा और जम्मू में यात्रियों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। अगर आप यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मौसम की जानकारी और लोकल न्यूज जरूर चेक करें। यह हादसा हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने की जरूरत को फिर से याद दिलाता है।



