नई दिल्ली। देश के पहाड़ी राज्यों में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ से कई खेत तबाह हो गए और एक सड़क बह गई। वहीं उत्तराखंड के विकासनगर क्षेत्र में भारी बारिश के कारण लखवाड़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास भूस्खलन हो गया, जिससे कई वाहन और मशीनें मलबे में दब गईं।
मानसून कमजोर
दूसरी ओर, देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं। मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल फिलहाल हट चुके हैं। राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में अगले पांच दिनों तक व्यापक बारिश की संभावना कम है।
उत्तर भारत में बढ़ा तापमान
बारिश में कमी के कारण उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान बढ़ने लगा है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मध्य प्रदेश, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित कई इलाकों में भी गर्मी और उमस में इजाफा हुआ है। आईएमडी के मुताबिक मानसून के कमजोर पड़ने की सबसे बड़ी वजह इसे सक्रिय रखने वाले मौसम तंत्र का कमजोर होना है। 9 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में कोई नया मजबूत निम्न दबाव (लो-प्रेशर) क्षेत्र विकसित नहीं हुआ, जिससे मानसूनी हवाओं को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी।
कब होगी बारिश?
इसके अलावा मानसून ट्रफ भी अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। इसके कारण मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के बड़े हिस्सों में बादलों और वर्षा की गतिविधियों में कमी आई है। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल बारिश मुख्य रूप से उत्तर भारत, पूर्वी राज्यों और पूर्वोत्तर क्षेत्रों तक सीमित है। अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के दोबारा पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना कम दिखाई दे रही है।



