मुंबई। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का निधन हो गया है। वह 66 साल के थे। बुधवार सुबह 8:45 बजे बारामती में उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजीत पवार, उनके पर्सनल असिस्टेंट, सुरक्षाकर्मी और विमान के क्रू समेत पांच लोगों की जान चली गई। पवार चार्टर्ड प्लेन से मुंबई से बारामती गए थे। लैंडिंग के दौरान विमान रनवे से फिसल गया। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने इस हादसे में पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है।
राजनीति के रहे माहिर खिलाड़ी
अजीत पवार, जिन्हें अक्सर राजनीति का बेताज बादशाह कहा जाता था, उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से महाराष्ट्र में पार्टी को मजबूत किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की मदद से NCP के लिए एक मजबूत सपोर्ट बेस बनाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, 2022 में, उन्होंने शरद पवार से अलग होकर अपना राजनीतिक रास्ता चुना और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई।
चाचा की ऊंगली पकड़कर बढ़े आगे
अजीत पवार ने 1982 में अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति में कदम रखा था। जब अजीत पवार अभी अपनी शुरुआती पढ़ाई कर रहे थे, तब उनके चाचा शरद पवार पहले ही एक प्रमुख राजनीतिक नेता बन चुके थे। राजनीति में आने के बाद, उन्होंने सबसे पहले एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड के लिए चुनाव लड़ा। उन्हें पुणे कोऑपरेटिव बैंक का चेयरमैन चुना गया, जिस पद पर वह 16 साल तक रहे।
1991 में, वह पहली बार बारामती निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए यह सीट खाली कर दी। इसके बाद शरद पवार केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री बने। जब शरद पवार केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए, तो अजीत पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति की कमान संभाली।
शरद पवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी
अपनी कड़ी मेहनत और लगन से अजीत पवार ने महाराष्ट्र में खुद को शरद पवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित किया। अजीत पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत की, और 1995 में, वह पहली बार पुणे जिले के बारामती निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा सदस्य चुने गए। तब से वह लगातार इस निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए हैं, उन्होंने 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में जीत हासिल की। उन्होंने न केवल अपने राजनीतिक करियर में खुद को स्थापित किया, बल्कि अपनी स्थिति को भी मजबूत किया।
विधायक से उपमुख्यमंत्री तक का सफर
अपने 45 साल के राजनीतिक करियर में अजीत पवार एक बार सांसद और सात बार विधायक रहे हैं। उन्होंने मुख्य रूप से महाराष्ट्र की राजनीति पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्री पद संभाले हैं, जैसे कृषि, ऊर्जा और योजना राज्य मंत्री। उन्होंने सुधाकर नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में भी काम किया। बाद में, जब उनके चाचा शरद पवार 1992 और 1993 में मुख्यमंत्री बने, तो उन्हें मंत्री बनाया गया।
6 बार डिप्टी सीएम
2019 के बाद अजीत पवार के राजनीतिक करियर में एक खास मोड़ आया। 2019 में, उन्होंने दो अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के तहत उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 23 नवंबर की सुबह उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, फडणवीस विधानसभा में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए। इसके बाद जब उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो अजीत पवार को एक बार फिर उपमुख्यमंत्री बनाया गया। वह अब तक छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रह चुके।



