तेहरान: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। गैस सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच अमेरिका से LPG (रसोई गैस) लेकर एक बड़ा जहाज कर्नाटक के मंगलुरु पोर्ट पर पहुंच गया है। इससे देश में संभावित गैस संकट को टालने में मदद मिलेगी।
संकट के समय पहुंची अहम खेप
रविवार को अमेरिका से रवाना हुआ LPG जहाज मंगलुरु के न्यू पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंचा। यह खेप ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने के कारण तेल और गैस सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्लाई से घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता बनी रहेगी और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
क्यों बढ़ी थी गैस संकट की आशंका?
ईरान से जुड़े तनाव के कारण दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा बढ़ गया है।
- यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा संभालता है
- युद्ध के चलते जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई
- कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका गहरा गई
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इस स्थिति से अछूता नहीं रहा।
भारत पर क्या पड़ा असर?
हाल के दिनों में भारत में LPG सप्लाई पर असर दिखने लगा था।
- कई जगहों पर डिलीवरी में देरी
- सप्लाई चेन में बाधाएं
- आयातित गैस पर दबाव
हालांकि, सरकार ने समय रहते वैकल्पिक इंतजाम शुरू कर दिए थे।
अमेरिका से सप्लाई क्यों है गेमचेंजर?
अमेरिका से LPG की यह खेप भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।
- मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम
- आपात स्थिति में वैकल्पिक सप्लाई लाइन मजबूत
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती
यह कदम भारत की “डाइवर्सिफाइड एनर्जी स्ट्रैटेजी” को भी दर्शाता है।
आगे की रणनीति क्या है?
सरकार और तेल कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
- जरूरत पड़ने पर अन्य देशों से भी आयात बढ़ाया जा सकता है
- समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास जारी हैं
- घरेलू सप्लाई को स्थिर रखने पर फोकस
कुल मिलाकर, ईरान युद्ध के बीच अमेरिका से LPG लेकर आया यह जहाज भारत के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इससे साफ है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय और तैयार है।




