नई दिल्ली: पवित्र महीने रमजान के समापन के साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप में एक दुर्लभ ‘कैलेंडर स्प्लिट’ (तारीखों का अंतर) देखने को मिल रहा है।
शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को जहां केरल में ईद-उल-फितर का त्योहार हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया है, वहीं दिल्ली, मुंबई सहित शेष भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में आज रमजान का 30वां और अंतिम रोजा रखा जा रहा है। भौगोलिक स्थिति और स्थानीय मौसम के कारण चंद्रमा के दिखने के समय में आए इस अंतर ने उत्सव की तारीखों को दो हिस्सों में बांट दिया है।
केरल में धार्मिक अधिकारियों और स्थानीय हिलाल (चांद देखने वाली) समितियों ने पुष्टि की कि गुरुवार शाम को तटीय क्षेत्रों में शव्वाल का अर्धचंद्र देखा गया। इसके बाद वहां के उलेमाओं ने शुक्रवार को ईद मनाने का आधिकारिक ऐलान किया। केरल का यह फैसला सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों के साथ मेल खाता है, जहां 30 रोजे पूरे करने के बाद आज शुक्रवार को ही ईद मनाई जा रही है।
इसके विपरीत, उत्तर, पश्चिम और पूर्वी भारत की प्रमुख चांद समितियों ने गुरुवार शाम को चांद दिखने की कोई पुष्टि नहीं की। दिल्ली की जामा मस्जिद के नायब शाही इमाम, सैयद शाबान बुखारी ने घोषणा की कि चूंकि राजधानी और आसपास के इलाकों में चांद नजर नहीं आया है, इसलिए शेष भारत में ईद शनिवार, 21 मार्च को मनाई जाएगी। लखनऊ के मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली और हैदराबाद की समितियों ने भी इसी की पुष्टि करते हुए देश के अधिकांश हिस्सों के लिए 30 दिनों के रमजान का निर्धारण किया है।
यही स्थिति पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी बनी हुई है। पाकिस्तान की ‘सेंट्रल रुएत-ए-हिलाल कमेटी’ ने इस्लामाबाद में बैठक के बाद बताया कि आसमान में बादलों की वजह से चांद नहीं देखा जा सका, इसलिए वहां भी शनिवार को ही ईद होगी। बांग्लादेश के धार्मिक अधिकारियों ने भी शनिवार के जश्न की पुष्टि की है। इस बीच, भारत के अधिकांश हिस्सों में आज ‘चाँद रात’ की रौनक चरम पर होगी। दिल्ली के चांदनी चौक और मुंबई के मोहम्मद अली रोड जैसे बाजारों में अंतिम समय की खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।



