नई दिल्ली। वर्ष 2026 के बजट को हर वर्ग की जरूरतों और अपेक्षाओं के अनुसार तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को दिल्ली सचिवालय में गिग वर्कर्स, किसानों, ग्रामीणों और के साथ अलग-अलग बैठकें कर व्यापक संवाद किया। इन बैठकों में सभी वर्गों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और अपनी समस्याएं, सुझाव व अपेक्षाएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं।
मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों से सीधे बातचीत कर उनकी बातों को ध्यान से सुना और भरोसा दिलाया कि उनके सुझावों को आगामी बजट में प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा बजट बनाना है, जो हर वर्ग की जरूरतों और उम्मीदों को पूरा करे। जनभागीदारी ही विकसित दिल्ली की सबसे बड़ी ताकत है। इस अवसर पर दिल्ली के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा व दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड के चेयरमैन श्री राजकुमार चौहान भी उपस्थित थे।
गिग वर्कर्स के सुझाव: सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था पर जोर
संवाद के दौरान गिग वर्कर्स और ड्राइवरों ने काम की स्थिति बेहतर बनाने और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीतियों की जरूरत बताई। उन्होंने खासतौर पर ड्राइवरों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित पार्किंग की व्यवस्था करने की मांग की। साथ ही उन्होंने ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने और महिलाओं को ई-वाहन खरीद पर सब्सिडी देने का सुझाव दिया।
सामाजिक सुरक्षा के लिए उन्होंने पीएफ से जोड़ने और स्वास्थ्य योजनाओं को एकीकृत करने की मांग की। कई प्रतिनिधियों ने गिग वर्कर्स को ‘पार्टनर’ की बजाय ‘कर्मचारी’ का दर्जा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने समस्याओं के समाधान और हितों की सुरक्षा के लिए एक अलग टास्क फोर्स बनाने का भी सुझाव दिया। इसके अलावा ड्राइवरों और वर्कर्स के लिए सुविधा केंद्र (रेस्टिंग पॉइंट) बनाने, पब्लिक टॉयलेट्स की संख्या बढ़ाने और ट्रैफिक नियमों में व्यावहारिक सुधार करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य के श्रम कानूनों में जो अंतर है, उसे खत्म किया जाए ताकि योजनाओं का फायदा जमीन तक पहुंच सके।
कृषि सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास पर बल

किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने कई अहम सुझाव और मांगें रखीं। उन्होंने कृषि ढांचे को मजबूत करने, सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने, ग्रामीण सड़कों का विकास करने और मंडी व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात कही। साथ ही गांवों में जल निकासी, सफाई, पीने का पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। किसानों ने मांग की कि दिल्ली में उन्हें औपचारिक रूप से किसान का दर्जा दिया जाए और कृषि से जुड़े कामों के लिए सब्सिडी व प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की जाएं। उन्होंने लैंड पूलिंग पॉलिसी और चकबंदी से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए इन नीतियों को किसान हित में और प्रभावी बनाने की बात कही।
किसानों ने कृषि भूमि के सर्किल रेट को संशोधित करने के लिए सर्वे कराने, उचित मुआवजा सुनिश्चित करने और जमीन के बेहतर विकास की मांग रखी। किसानों ने बिजली सब्सिडी और पीने के पानी की बेहतर व्यवस्था की मांग की, साथ ही कृषि मंडियों के पुनर्जीवन (रिवाइवल) पर जोर दिया, ताकि उन्हें अपनी फसल का सही दाम मिल सके। आर्थिक मजबूती के लिए किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा बढ़ाने, ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के लिए आसान बैंक लोन देने और लोन में आ रही दिक्कतों को दूर करने की बात कही। इसके साथ ही फसल बीमा योजना को सही तरीके से लागू करने और कृषि प्रशिक्षण के जरिए किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर उनकी उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। किसानों ने गांवों के शहरीकरण (अर्बनाइजेशन) को योजनाबद्ध तरीके से लागू करने, स्कूलों के ढांचे को मजबूत करने और शिक्षा समेत अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग रखी।
श्रमिकों के साथ बैठक: श्रमिक कल्याण और सुरक्षा पर चिंतन

श्रमिक वर्ग के प्रतिनिधियों ने श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, बेहतर काम की स्थिति, समय पर वेतन, स्वास्थ्य सुविधाएं और आवास से जुड़ी कई मांगें रखीं। उन्होंने श्रमिकों के कल्याण और कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए अहम सुझाव भी दिए। श्रमिकों ने हर जिले में श्रमिक कार्यालय खोलने की मांग की। उन्होंने श्रम विभाग में स्टाफ बढ़ाने पर जोर दिया। श्रमिकों ने ईएसआईसी और पीपीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को ज्यादा व्यापक रूप से लागू करने की जरूरत बताई। इसके अलावा, उन्होंने लेबर वेलफेयर बोर्ड बनाने की मांग की। महिला श्रमिकों के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र बनाने का सुझाव दिया गया। वहीं कुशल श्रमिकों के लिए तकनीक आधारित प्रशिक्षण शुरू करने की मांग भी उठी, ताकि वे बदलते समय के अनुसार अपनी दक्षता बढ़ा सकें। श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए आवास और पानी, सफाई व बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने किसानों व गिग वर्कर्स को दिया भरोसा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि किसानों की समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से लेकर समाधान के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। बजट 2026 में किसानों व ग्रामीण विकास को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों की समृद्धि के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सर्किल रेट पर पिछले छह महीनों से अध्ययन चल रहा है और जल्द निर्णय लिया जाएगा, जबकि मास्टर प्लान पर भी काम जारी है। उन्होंने बताया कि करीब एक साल में सरकार ने समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं सुधारने के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू किया गया है, जिसके लिए बजट भी बढ़ाया गया है। ट्रैक्टर लोन, किसान क्रेडिट कार्ड और चकबंदी जैसे मुद्दों पर काम जारी है, साथ ही केंद्र की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। गांवों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर शहरी-ग्रामीण अंतर कम करने, हर नागरिक तक सुविधाएं पहुंचाने और लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर जोर है।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार सभी वर्गों से संवाद कर रही है और उनके सुझावों के आधार पर संतुलित, समावेशी और विकासोन्मुख बजट तैयार किया जाएगा, जिसकी झलक बजट 2026 में साफ दिखाई देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था में गिग वर्कर्स एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनके अधिकारों एवं सुरक्षा को सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गिग वर्कर्स की जो भी समस्याएं हैं, सरकार उन पर ध्यान देगी। मुख्यमंत्री के अनुसार गिग वर्कर्स अब एक जरूरत बन गए हैं, इसलिए उन्हें भी पर्याप्त सुविधाएं मिलनी चाहिएं।
किसानों और गरीबों के हित में हो रहे हैं कार्य: श्रमं मंत्री कपिल मिश्रा
दिल्ली के श्रम और विकास मंत्री श्री कपिल मिश्रा ने कहा कि पहले की सरकारों में किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी हुई, लेकिन मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी के नेतृत्व में गांव, गरीब और किसान के लिए बड़े स्तर पर काम हो रहे हैं। बजट से पहले हर वर्ग से सीधा संवाद भी इसी दिशा में अहम कदम है। उन्होंने बताया कि ‘विकसित दिल्ली’ के लक्ष्य के तहत दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड और ग्रामोदय अभियान के जरिए 13 जिलों के 366 गांवों में विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे उनकी तस्वीर बदल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 2000 करोड़ रुपये के विकास कार्य भी किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पहली बार श्रमिकों और गिग वर्कर्स के हितों की रक्षा के लिए गंभीर प्रयास हो रहे हैं। दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी सबसे ज्यादा है और श्रम कानूनों को सरल बनाकर चार नए कानून लाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईवी को बढ़ावा मिलने से होम डिलीवरी की लागत घटी है और मुनाफा बढ़ने से रोजगार के अवसर बढ़े हैं। साथ ही गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा को कंपनियों के साथ मिलकर और मजबूत किया जाएगा।



