पटना/बाढ़: मोकामा में जनसुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के काफिले पर हुए हमले में दुलारचंद यादव की दर्दनाक मौत की असली वजह अब सामने आ गई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस सनसनीखेज हत्या की बर्बरता को उजागर कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, दुलारचंद यादव के सीने पर गाड़ी चढ़ाई गई थी, जिससे उनकी कई पसलियां टूट गईं और दोनों फेफड़े फट गए। इसी गंभीर चोट से उनकी मौत हुई।

शुक्रवार को बाढ़ अनुमंडल अस्पताल में मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तीन डॉक्टरों की टीम ने करीब दो घंटे तक पोस्टमॉर्टम किया। डॉक्टरों ने बताया कि मौत का कारण ‘कार्डियो-पल्मोनरी फेल्योर विद ब्लंट इंजरी टू चेस्ट एंड हेड’ है, यानी छाती और सिर पर जोरदार प्रहार या भारी दबाव से हृदय और सांस प्रणाली ने काम करना बंद कर दिया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या मिला?
रिपोर्ट के मुताबिक, छाती पर कई गहरे घाव और खून जमने के निशान पाए गए। फेफड़े फटे हुए थे, जिससे भीतरूनी खून बहाव (इंटरनल ब्लीडिंग) हुई। दाहिनी ओर रीढ़ की हड्डी के पास चोटों के निशान मिले। सिर, पीठ, घुटने और टखनों पर गहरे जख्म पाए गए। दाहिने पैर पर गोली लगने (फायरआर्म इंजरी) का उल्लेख भी रिपोर्ट में दर्ज है। शरीर पर घर्षण (अब्रेशन) और फटे घाव (लैसेरेटेड वूंड्स) के कई निशान मौजूद थे।
डॉक्टरों ने बताया कि यादव के सीने पर भारी दबाव या वाहन का वजन पड़ा, जिससे पसलियां चटक गईं और फेफड़ों में गंभीर चोट पहुंची। यही आंतरिक रक्तस्राव अंततः मौत का कारण बना।
तीन FIR दर्ज, अनंत सिंह पर आरोप
इस हत्या मामले में पुलिस ने तीन FIR दर्ज की हैं।
- 1️⃣भदौर थाना में दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने दर्ज कराया।
- 2️⃣ अनंत सिंह के समर्थक जितेंद्र कुमार ने दर्ज कराया।
- 3️⃣ पुलिस ने स्वप्रेरणा से (on its own statement) दर्ज किया है।
दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने दर्ज कराया केस
नीरज कुमार ने अपनी FIR में अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नीरज का कहना है कि अनंत सिंह और उनके गुर्गों ने मेरे दादा को गाली दी, फिर गाड़ी से खींचकर बाहर निकाला। अनंत ने कमर से पिस्टल निकाली और फायर किया, जो मेरे दादा के बाएं पैर के तलवे में लगी। वे गिर गए। फिर छोटन सिंह ने लोहे की रॉड से पैर, सिर और पीठ पर बेरहमी से वार किया। इसके बाद थार गाड़ी से उन्हें 2-3 बार आगे-पीछे करके कुचल दिया। दादा को जांचने के बाद वे भाग निकले। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दादा की मौत हो गई।
हत्या के 29 घंटे बाद हुआ अंतिम संस्कार
पोस्टमॉर्टम के बाद शुक्रवार देर रात 76 वर्षीय RJD नेता दुलारचंद यादव का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया। लेकिन अंतिम यात्रा भी हिंसा से अछूती नहीं रही। मोकामा-बाढ़ के बीच पंडारक में पथराव और तोड़फोड़ की घटना हुई। इस दौरान RJD प्रत्याशी वीणा देवी की गाड़ी पर भी हमला हुआ और कई लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन मूकदर्शक बनी रही।
चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट
घटना के बाद चुनाव आयोग ने बिहार के DGP विनय कुमार से रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी माहौल में किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, RJD सांसद मनोज झा ने इस मामले को ओपन एंड शट केस बताया। उन्होंने कहा कि ये पहली बार नहीं है जब हमारे नेताओं पर हमला हुआ। प्रधानमंत्री किस मुंह से जंगलराज की बात करते हैं? अगर कानून-व्यवस्था सही है तो ऐसी वारदात कैसे हो रही है? यह हत्या राजनीतिक साजिश का नतीजा है।
मोकामा में बढ़ाई गई सुरक्षा
दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा और बाढ़ में तनाव बढ़ गया है। प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। भीड़ नियंत्रण के लिए RAF और SSB की टीमों को भी लगाया गया है। इधर, जनसुराज और RJD दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह चुनावी रंजिश की आग है जो अब हिंसा में बदल चुकी है।
कौन थे दुलारचंद यादव?
दुलारचंद यादव एक समय मोकामा इलाके के बाहुबली चेहरे माने जाते थे। उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और RJD से जुड़कर पार्टी के वरिष्ठ नेता बने। अपनी सादगी और जनसंपर्क के लिए इलाके में लोकप्रिय थे। उनकी हत्या ने मोकामा की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है।



