नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली को और अधिक आधुनिक, सुव्यवस्थित और रहने योग्य बनाने की दिशा में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने एक ऐतिहासिक शुरुआत की है। उपराज्यपाल (LG) सरदार तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में तैयार की गई नई संशोधित ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति पर अब जमीन पर काम शुरू हो गया है।
DDA ने इस नीति के अंतर्गत अपनी भूमि का विकास करने की इच्छुक डेवलपर इकाइयों (Developer Entity – DE) के लिए ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम (OBPS) का पोर्टल लाइव कर दिया है। इसके साथ ही, नीति से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को पूरी तरह पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए एक विशेष माइक्रोसाइट भी लॉन्च की गई है। DDA का यह कदम दिल्ली के रियल एस्टेट और शहरी नियोजन (Urban Planning) के इतिहास में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होने जा रहा है, जिससे न सिर्फ व्यापार करना आसान होगा बल्कि आम जनता को भी सीधा लाभ मिलेगा।
207 वर्ग किलोमीटर में फैलेगा आधुनिक विकास का जाल
नई संशोधित TOD नीति का दायरा पहले की तुलना में बेहद व्यापक और दूरदर्शी रखा गया है। यह नीति दिल्ली के मौजूदा और आगामी मेट्रो कॉरिडोर, RRTS (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) और रेलवे स्टेशनों के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे (गलियारा-आधारित दृष्टिकोण) में लागू की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इन प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब्स के आसपास योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों को बसाना है।
अगर इसके कुल क्षेत्रफल की बात करें, तो इसके अंतर्गत दिल्ली का कुल 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कवर होगा। इस नीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें लगभग 80 वर्ग किलोमीटर का ऐसा नया इलाका पहली बार शामिल किया गया है, जो पुरानी नीति के दायरे से पूरी तरह बाहर था। इस नए क्षेत्र में मुख्य रूप से दिल्ली के लैंड पूलिंग जोन, निम्न घनत्व आवासीय क्षेत्र (LDRA) और अनधिकृत कॉलोनियां शामिल हैं। इन क्षेत्रों को नीति में शामिल करने से अब वहां भी व्यवस्थित तरीके से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हो सकेगा।
यह नीति सिर्फ अभी चल रही मेट्रो और रेलवे लाइनों तक सीमित नहीं है। DDA ने इसे भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार किया है। यह नीति परिचालित (operational) और प्रस्तावित (proposed) दोनों प्रकार के मेट्रो कॉरिडोर और RRTS स्टेशनों के साथ विकास की सुविधा प्रदान करती है। इसका सीधा मतलब यह है कि जैसे-जैसे दिल्ली में नए मेट्रो रूट बनेंगे, वैसे-वैसे उनके साथ-साथ ही टीओडी के तहत नए किफायती आवास और संबंधित नागरिक अवसंरचना का निर्माण भी शुरू हो जाएगा। इससे भविष्य में मेट्रो में यात्रियों की संख्या भी बढ़ेगी और स्टेशनों के आसपास अव्यवस्थित ढंग से बस्तियां नहीं बसेंगी।
सिंगल विंडो क्लीयरेंस: खत्म होगी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की झंझट
DDA की इस ऑनलाइन पहल का सबसे बड़ा प्रशासनिक उद्देश्य ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है। अब तक किसी भी बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए डेवलपर्स को दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली जल बोर्ड (DJB), दिल्ली फायर सर्विस (DFS) जैसी कई अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के दफ्तरों और काउंटरों के चक्कर काटने पड़ते थे, जिसमें महीनों का समय बर्बाद होता था।
नई नीति ने इस पूरी प्रक्रिया को पलट कर रख दिया है। अब डेवलपर्स के लिए अप्रूवल की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत एक प्रभावी सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम लागू किया गया है। इसके अंतर्गत डेवलपर को किसी भी बाहरी एजेंसी के पास अलग से जाने की जरूरत नहीं होगी। वे सभी अनुमोदनों और संबंधित शुल्कों के भुगतान के लिए केवल एक ही स्थान (DDA के ऑनलाइन पोर्टल) पर आवेदन कर सकते हैं।
प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने के लिए DDA ने एक ‘एकल टीओडी प्रभार’ (Single TOD Charge) का प्रस्ताव रखा है। इस एकीकृत शुल्क व्यवस्था के अंतर्गत दिल्ली जल बोर्ड के जल एवं सीवर प्रभार, एमसीडी के संस्वीकृति प्रभार, भूमि उपयोग परिवर्तन प्रभार, कर वसूली, अतिरिक्त एफएआर प्रभार और लीज़-होल्ड से फ्री-होल्ड में परिवर्तन हेतु लगने वाले सभी शुल्कों को एक साथ जोड़ दिया गया है।
इस पूरी व्यवस्था की निगरानी और समयबद्ध मंजूरी सुनिश्चित करने के लिए DDA के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक विशेष टीओडी समिति का गठन किया गया है। इस समिति में सभी संबंधित सेवा प्रदाता और बुनियादी ढांचा एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे, ताकि किसी भी प्रोजेक्ट की फाइल बिना वजह न अटके और उसे समय पर क्लियरेंस मिल सके।
निर्माण के नए नियम: FAR और प्लॉट का गणित
मास्टर प्लान (MPD-2021) के अध्याय-20 और टीओडी विनियमों में किए गए संशोधनों के अनुसार, इस नीति का लाभ उठाने के लिए प्लॉट के आकार और सड़क की चौड़ाई को लेकर कुछ कड़े और व्यावहारिक मानक तय किए गए हैं। टीओडी नीति के तहत विकास की अनुमति न्यूनतम 2000 वर्ग मीटर या उससे अधिक आकार के बड़े प्लॉटों पर ही दी जाएगी, बशर्ते उस प्लॉट के सामने कम से कम 18 मीटर चौड़ी सड़क उपलब्ध हो। ऐसे योग्य भूखंडों पर सघन और वर्टिकल विकास को बढ़ावा देने के लिए अधिकतम 500 तक का एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) अनुमत किया गया है।
DDA ने इस बढ़े हुए एफएआर के उपयोग को लेकर एक बहुत ही संतुलित और समाज-उपयोगी फॉर्मूला तैयार किया है, जिसे तीन मुख्य हिस्सों में विभाजित किया गया है:
सबसे बड़ा हिस्सा, यानी कुल अनुमेय एफएआर का 65 प्रतिशत, अनिवार्य रूप से आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित किया गया है। इस आवासीय हिस्से के लिए यह शर्त रखी गई है कि इसमें बनने वाले फ्लैट्स का निर्मित क्षेत्रफल (Built-up Area) 100 वर्ग मीटर या उससे कम (यानी अधिकतम 99 वर्ग मीटर तक) होना चाहिए। इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के पास उच्च मध्यम वर्ग और कामकाजी वर्ग के लिए पर्याप्त मात्रा में किफायती आवास (Affordable Housing) उपलब्ध हो सकें।
इसके बाद, कुल एफएआर का 10 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से व्यावसायिक गतिविधियों और जन-सुविधाओं के प्रावधान के लिए निर्धारित किया गया है। इस हिस्से का उपयोग उसी आवासीय परिसर या ब्लॉक के भीतर निवासियों की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दुकानें, डिस्पेंसरी, डे-केयर सेंटर और अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित करने के लिए किया जाएगा।
शेष 25 प्रतिशत एफएआर के उपयोग में डेवलपर्स को काफी सुगमता और लचीलापन दिया गया है। डेवलपर बाजार की मांग और अपनी व्यावसायिक रणनीति के अनुसार इस हिस्से का उपयोग बड़े आकार के प्रीमियम आवास, आधुनिक कॉर्पोरेट कार्यालय स्थान (Office Spaces), गेस्ट हाउस या कामकाजी पेशेवरों के लिए स्टूडियो अपार्टमेंट बनाने के लिए स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे। इस प्रकार यह नीति अत्यधिक सघनता और मिश्रित-उपयोग वाले आधुनिक शहरी परिसरों की परिकल्पना को साकार करती है।
आम दिल्लीवासियों को इससे क्या मिलेंगे फायदे?
यह नई नीति केवल रियल एस्टेट डेवलपर्स और सरकार के फायदे के लिए नहीं है, बल्कि इसका अंतिम और सबसे बड़ा लाभ दिल्ली के आम नागरिकों और यहां की पर्यावरण व्यवस्था को मिलेगा।
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट के पास घर: इस नीति के पूरी तरह लागू होने के बाद लाखों कामकाजी लोगों को अपने दफ्तर या मेट्रो स्टेशन के बिल्कुल नजदीक रहने के लिए घर मिल सकेंगे। इससे लोगों का रोजाना का ट्रैवल टाइम बचेगा और वे अपने परिवार को अधिक समय दे पाएंगे।
- बेहतर फुटपाथ और वॉकैबिलिटी: टीओडी प्लॉटों के डिजाइन में वॉकैबिलिटी (पैदल चलने की सुविधा) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। निवासियों और मेट्रो यात्रियों की सुविधा के लिए परिवहन हब्स और सोसायटियों को जोड़ने वाले नए भूमिगत (Underground) या ऊपरगामी (Overhead) पैदल मार्ग (Skywalks) विकसित किए जा सकते हैं, जिससे लोगों को सड़कों के ट्रैफिक के बीच से होकर न गुजरना पड़े।
- प्रदूषण और ट्रैफिक जाम से मुक्ति: जब लोगों के रहने, काम करने और मनोरंजन की जगहें मेट्रो स्टेशनों के पैदल दायरे में होंगी, तो वे निजी वाहनों (कारों और बाइकों) का इस्तेमाल बेहद कम करेंगे। सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कम होने से दिल्ली के सबसे बड़े नासूर—ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण—से बहुत हद तक राहत मिलेगी।
- नागरिक सुविधाओं का विस्तार: टीओडी ज़ोन में आने वाले सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक (PSP) प्लॉटों में भी एफएआर बढ़ाया जा रहा है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि इन क्षेत्रों में नए और बड़े अस्पताल, कम्युनिटी सेंटर, स्कूल और अन्य सामाजिक बुनियादी ढांचों का तेजी से विस्तार होगा।
आवेदन कैसे करें? (महत्वपूर्ण आधिकारिक लिंक्स)
यदि आप एक डेवलपर इकाई (DE) हैं और इस दूरगामी योजना के तहत अपनी भूमि का विकास करना चाहते हैं, तो आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और दो चरणों में व्यवस्थित किया गया है:
- चरण 1 (टीओडी प्लॉट की स्वीकृति): डेवलपर को सबसे पहले टीओडी समिति द्वारा अपने प्लॉट के ले-आउट और पात्रता की संस्वीकृति प्राप्त करने के लिए DDA के आधिकारिक ओबीपीएस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन दर्ज करना होगा। पोर्टल लिंक: DDA OBPS Portal
- चरण 2 (भवन योजना का अनुमोदन): टीओडी समिति से प्राथमिक मंजूरी मिलने के बाद, परियोजना के विस्तृत बिल्डिंग प्लान (भवन योजना) का फाइनल अप्रूवल प्राप्त करने के लिए भी इसी ओबीपीएस पोर्टल के माध्यम से डिजिटल दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
इस नीति से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों, अधिसूचनाओं, प्रभारों की सूची और विस्तृत नियमों को पढ़ने के लिए DDA द्वारा शुरू की गई समर्पित माइक्रोसाइट पर विजिट किया जा सकता है:
माइक्रोसाइट लिंक: DDA TOD Site
निष्कर्ष:
6 अप्रैल 2026 को अधिसूचित किए गए इन ऐतिहासिक संशोधनों के बाद, DDA का यह ऑनलाइन पोर्टल और सिंगल-विंडो सिस्टम शुरू करना दिल्ली के सतत शहरी विकास (Sustainable Urban Development) की दिशा में एक मील का पत्थर है। यह कदम न केवल दिल्ली में घरों की भारी मांग और कमी को पूरा करेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी को वैश्विक स्तर के एक स्मार्ट, वॉकेबल और प्रदूषण-मुक्त शहर में बदलने का काम करेगा।



