नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 3 बड़े फैसले लिए गए हैं। पहला जनगणना के लिए 11718 करोड़ के बजट को मंजूरी, 28 फरवरी और 1 मार्च 2027 की मध्य रात्रि से जनगणना शुरू, 2027 में 2 चरणों में होगी जनगणना, वही केंद्रीय कैबिनेट में दूसरा बड़ा फैसला यह हुआ कोल लिंकेज पॉलिसी: ‘कोलसेतु’ में सुधार है, कोल लिंकेज की नीलामी के लिए कोलसेतु विंडो को मिली है मंजूरी, कोई भी घरेलू खरीदार लिंकेज नीलामी में ले सकता है हिस्सा, कोल लिंकेज होल्डर 50% तक मात्रा कर सकते हैं एक्सपोर्ट, मार्केट में गड़बड़ी रोकने के लिए ट्रेडर्स को हिस्सा लेने की नहीं होगी इजाजत, केंद्रीय कैबिनेट का तीसरा बड़ा फैसला 2026 सीजन के लिए कोपरा के मिनिमम सपोर्ट प्राइस को दी है मंजूरी, मिलिंग कोपरा के लिए 445 रुपए प्रति क्विंटलकी की है बढ़ोतरी, बॉल कोपरा के लिए 400 रुपए प्रति क्विंटलकी बढ़ोतरी की है।
Cabinet approved ₹11,718 crore for Census 2027
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) December 12, 2025
✅ First ever digital census
✅ Will include caste enumeration and option for self-enumeration
✅ Personal data to be protected as per the DPDP Act, 2023
✅ ~ 1 crore human-days of employment to be generated pic.twitter.com/1uGGXqD1Z1
नांगल बांध-दौलतपुर चौक खंड के चालू होने से रेल संपर्क में सुधार हुआ है
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि नांगल बांध-दौलतपुर चौक खंड के चालू होने से रेल संपर्क में सुधार हुआ है; दौलतपुर चौक-तलवारा और चंडीगढ़-बद्दी लाइनों पर काम प्रगति पर है; बद्दी-घनाउली नई लाइन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई। भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी (63 किमी) नई रेल लाइन परियोजना को लागत-साझाकरण के आधार पर स्वीकृत किया गया है। इसमें हिमाचल प्रदेश सरकार की 25 प्रतिशत और केंद्र सरकार की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा, 70 करोड़ रुपये से अधिक की भूमि की पूरी लागत हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वहन की जाएगी। 1617 करोड़ रुपये की भूमि लागत सहित परियोजना का विस्तृत अनुमान 6753 करोड़ रुपये की लागत पर स्वीकृत किया गया था।
हिमाचल प्रदेश में परियोजना के कार्यान्वयन के लिए 124 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। इस आवश्यकता के मुकाबले, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा केवल 82 हेक्टेयर भूमि ही उपलब्ध कराई गई है। परियोजना का कार्य शुरू कर दिया गया है। बिलासपुर से बेरी तक की भूमि अभी तक हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा नहीं सौंपी गई है। भूमि की अनुपलब्धता परियोजना को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रही है।
परियोजना पर अब तक कुल व्यय 5,252 करोड़ रुपये है।
परियोजना पर अब तक कुल व्यय 5,252 करोड़ रुपये है। लागत-साझाकरण व्यवस्था के अनुसार, हिमाचल प्रदेश सरकार को 2,711 करोड़ रुपये देने थे। हालांकि, उन्होंने केवल 2,711 करोड़ रुपये ही जमा किए हैं। उन्होंने लागत में अपना हिस्सा 847 करोड़ रुपये हिस्से के रूप में जमा कर दिया है। इस प्रकार, हिमाचल प्रदेश राज्य सरकार के पास 1,863 करोड़ रुपये शेष हैं और इस कारण परियोजना की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन न करने के कारण इस परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई है। परियोजना को गति देने के लिए राज्य सरकार के सहयोग की आवश्यकता है। केंद्र सरकार परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए तत्पर है, हालांकि सफलता हिमाचल प्रदेश सरकार के सहयोग पर निर्भर करती है।
हिमाचल प्रदेश में कनेक्टिविटी में सुधार के लिए काम शुरू
हिमाचल प्रदेश में कनेक्टिविटी में सुधार के लिए, नांगल बांध – ऊना – अंब अंदौरा – दौलतपुर चौक (60 किमी) खंड के नांगल बांध – तलवारा – मुकेरियां नई लाइन परियोजना का काम शुरू कर दिया गया है। दौलतपुर चौक – करतोली पंजाब – तलवारा (52 किमी) खंड का काम भी शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा, चंडीगढ़-बद्दी नई लाइन (28 किमी) का काम भी 1540 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया है। हिमाचल प्रदेश में रेल संपर्क को बेहतर बनाने के लिए, बद्दी-घानाउली नई रेल लाइन (25 किमी) का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा बिलासपुर-मनाली-लेह नई रेल लाइन की रणनीतिक लाइन के रूप में पहचान की गई है। इसका सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। यह परियोजना भूवैज्ञानिक आश्चर्यों और अनेक समस्याओं से भरे हिमालय के दुर्गम भू-भाग से होकर गुजरती है। 270 किमी लंबी सुरंगों सहित परियोजना की कुल लंबाई 489 किमी है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार परियोजना की अनुमानित लागत 1,31,000 करोड़ रूपए है।
प्रस्तावित मार्ग का अनुमानित यातायात और इससे होने वाले लाभ
परियोजना द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रथम और अंतिम मील कनेक्टिविटी। छूटे हुए लिंक को जोड़ना और अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध कराना। भीड़भाड़ वाली/संतृप्त लाइनों का विस्तार। राज्य सरकारों/केंद्रीय मंत्रालयों/जन प्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई मांगें। रेलवे की अपनी परिचालन आवश्यकताएं। सामाजिक-आर्थिक पहलू। कुल मिलाकर उपलब्ध धनराशि। रेलवे परियोजनाओं का पूरा होना कई कारकों पर निर्भर करता
खोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमण्डलीय समिति (सीसीईए) ने 2026 सीजन के लिए खोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दे दी है। किसानों को लाभकारी कीमतें देने हेतु, सरकार ने 2018-19 के केन्द्रीय बजट में घोषणा की थी कि सभी अनिवार्य फसलों का एमएसपी पूरे भारत में उत्पादन की औसत लागत के कम से कम 1.5 गुना स्तर पर तय किया जाएगा। वर्ष 2026 सीजन के लिए मिलिंग खोपरा के उचित औसत गुणवत्ता (फेयर एवरेज क्वालिटी) का एमएसपी 12,027 रुपये प्रति क्विंटल और बॉल खोपरा का एमएसपी 12,500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
वर्ष 2026 सीजन के लिए एमएसपी पिछले सीजन की तुलना में मिलिंग खोपरा के लिए 445 रुपये प्रति क्विंटल और बॉल खोपरा के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। सरकार ने विपणन सीजन 2014 के लिए मिलिंग खोपरा और बॉल खोपरा का एमएसपी क्रमशः 5,250 रुपये प्रति क्विंटल और 5,500 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर विपणन सीजन 2026 के लिए क्रमशः 12,027 रुपये प्रति क्विंटल और 12,500 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जिसमें क्रमशः 129 प्रतिशत और 127 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
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अधिक एमएसपी नारियल उगाने वालों को बेहतर मुनाफा दिलाएगा
अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी न सिर्फ नारियल उगाने वालों को बेहतर मुनाफा दिलाएगा, बल्कि किसानों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नारियल के उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए खोपरा का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित भी करेगा। नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नाफेड) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (एनसीसीएफ) मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत खोपरा की खरीद के लिए केन्द्रीय नोडल एजेंसियों (सीएनए) के तौर पर काम करते रहेंगे।



