CM रेखा गुप्ता ने न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के दिए निर्देश

सीएम ने विधि, न्याय और विधायी कार्य विभाग के साथ शुक्रवार उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इसमें अदालती मामलों में अनावश्यक मुकदमों को कम करने पर मंथन हुआ। सीएम ने न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का निर्देश दिया।

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नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधि, न्याय एवं विधायी कार्य विभाग के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इसमें उन्होंने सरकारी मुकदमों को सुव्यवस्थित करने और न्यायपालिका पर अनावश्यक बोझ कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सीएम ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया जाए। यह लंबित मामलों की प्रकृति की समीक्षा कर यह सुझाव दे कि कौन-कौन से मुकदमे गैर-आवश्यक हैं और उन्हें किस प्रकार कम किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजधानी में 11 न्यायिक जिले कार्यरत हैं। यह राजस्व जिलों के अनुरूप हैं। अदालतें सात न्यायालय परिसर में लगती हैं। दिल्ली सरकार से संबंधित लगभग 4,000 मुकदमे विभिन्न न्यायालयों और अधिकरणों में लंबित हैं। सीएम ने निर्देश दिया कि सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों की एक पैनल गठित की जाए, जो लंबित मामलों की प्रकृति की समीक्षा कर यह सुझाव दे कि कौन-कौन से मुकदमे गैर-आवश्यक हैं और उन्हें किस प्रकार कम किया जा सकता है। यह पैनल बेहतर मुकदमा प्रबंधन और त्वरित निपटान के लिए प्रणालीगत समाधान भी सुझाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट के लिए विशेष अधिवक्ता पैनल
बैठक में यह उल्लेख किया गया कि अन्य राज्यों की भांति दिल्ली सरकार का सुप्रीम कोर्ट में कोई विशेष अधिवक्ता पैनल नहीं है। इस पर मुख्यमंत्री ने विधि विभाग को निर्देश दिए कि दिल्ली उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न अधिकरणों में महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी के लिए पूर्व निर्धारित शर्तों के साथ वरिष्ठ अधिवक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित किया जाए। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार के लिए एक स्थायी पैनल गठित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए।

अदालत परिसर में जगह की समस्या जल्द होगी दूर
बैठक के दौरान न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या के मुकाबले कमी और कार्यालयों की सीमित स्थान की समस्या पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि शास्त्री पार्क, कडक़डड़ूमा और रोहिणी में तीन नए न्यायालय परिसर निर्माणाधीन हैं और इनके पूर्ण होते ही इस कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित एजेंसियों को इन परियोजनाओं को समयबद्ध और शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

कानूनी नजरिए से हो सुधार
सीएम ने प्रशासनिक ही नहीं, कानूनी दृष्टि से भी सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप नए अधिनियमों और कानूनों की संभावना तलाशी जाए और पुराने, संविधान पूर्व कानूनों जैसे कि पंजाब कोर्ट अधिनियम, न्याय शुल्क अधिनियम और वाद मूल्यांकन अधिनियम को प्रतिस्थापित किया।
विवाद समाधान से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री ने दिल्ली विवाद समाधान समिति द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। यह समिति विधि विभाग के अंतर्गत कार्यरत एक स्वायत्त संस्था है जो वैकल्पिक विवाद समाधान के माध्यम से मामलों का निपटान करती है।

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