नई दिल्ली: बेहतर बिजली संग्रह और वितरण के लिए दिल्ली सरकार 2029 तक एक पावर मास्टर प्लान लाने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद राजधानी में बिजली की मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटना है। इससे गर्मियों में बिजली कटौती को रोकना संभव होगा। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार ऊर्जा सचिव को इस दिशा में काम करने निर्देश दिये हैं।
ऊर्जा मंत्री ने शुक्रवार दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) और डिस्कॉम्स (टीपीडीडीएल, बीआरपीएल, बीवाईपीएल) के साथ समीक्षा बैठक की। इसमें बिजली की साल-दर-साल बढ़ती मांग को देखते हुए 2026-29 तक बिजली क्षमता बढ़ाने की संभावना पर विचार हुआ। डीटीएल ने मार्च 2029 तक बिजली क्षमता बढ़ाने की योजना पेश की। इससे अगले तीन साल में दिल्ली को बड़ी राहत मिलेगी। विभाग का मानना है कि 2028-29 तक कुल ट्रांसमिशन क्षमता 24,000 एमवीए (मेगावोल्ट-एम्पीयर) तक पहुंचेगी। जबकि मांग 11,000 एमवीए रहने का अनुमान है।
सब-स्टेशन बनने से 70 फीसदी कम होगा लोड
डीटीएल ने बताया कि अभी उनकी लाइनों पर 90 फीसदी लोड है। 2028-29 तक नए ट्रांसफार्मर और पुराने सब-स्टेशनों की मरम्मत से यह 70 फीसदी तक कम हो सकता है। इसी बीच गोपालपुर और टिकरी खुर्द में दो नए सब-स्टेशन बनेंगे। इनसे 4000 एमवीए बिजली पैदा करेंगे। मंत्री ने 2022-23 से हो रही देरी पर सवाल उठाया। इसका जवाब मिला कि पावर ग्रिड की समस्याओं और बोली न मिलने से ये देरी हुई है। अब योजना तैयार है और बोर्ड की मंजूरी का इंतजार है।
जमीन नहीं मिलने से ट्रांसफार्मर लगाने की योजना में देरी
डिस्कॉम्स ने सितंबर 2026 तक 1,937 करोड़ रुपये की लागत से 66 केवी, 33 केवी, 11 केवी और एलटी स्तर के ट्रांसफार्मर लगाने की योजना है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण में देरी की समस्या सामने आई। मंत्री ने जमीन के लिए ऊर्जा सचिव को डीडीए व एमसीडी और स्थानीय विधायकों के साथ बैठक कर इनका समाधान ढूढ़ने का निर्देश दिया।
आशीष सूद ने कहा कि पावर मास्टर प्लान से दिल्ली में बिजली की कमी नहीं होगी। यह योजना गर्मियों में पीक डिमांड को पूरा करने में मदद करेगी। उन्होंने सभी एजेंसियों को समय पर काम पूरा करने और बिजली आपूर्ति को निर्बाध बनाने के लिए समन्वय बढ़ाने को कहा।



