भागलपुर: कहलगांव पड़ाव संघ की ऐतिहासिक 113वीं कांवड़ यात्रा बुधवार किला दुर्गा स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट से कांवड में गंगा जल भरकर निकली। रिमझिम बारिश, कांवड़ों की झंकार, हर-हर महादेव, बोल बम के जयघोष से शहर गूंज उठा। कांवड़ यात्रा में करीब 3,000 से अधिक कांवड़िए शामिल हुए। शहर में कांवड़ियों का स्वागत करने भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने जमकर फूलों की बरसात की। इस दौरान विभिन्न संगठनों की ओर से कांवड़ियों को शर्बत, पानी, चाय तथा पान दिये गये।
कांवड़ियों ने शहर के राजघाट, चारोंधाम घाट, सतीघाट स्थित उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर जल भर वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संकल्प लिये। किला दुर्गा स्थान समेत शहर के विभिन्न मंदिरों में कांवड़ रख पूजा अर्चना की और यात्रा की शुरुआत की जिसमें 71, 51, 31 फिट की कांवड़ में जल लेकर कांवड़िए बाबा बासुकीनाथ धाम के लिए रवाना हुए।
तीनों कांवड़ आकर्षक रंग-बिरंगे फूल व लाइटिंग के अलावा थ्री-डी फ्लेक्स भगवान शिव और केदारनाथ की छवि उकेरी गई है। इसमें में सुसज्जित दस पीतल के बड़े-बड़े कलश में गंगा जल भरा है। जिसका वजन करीब पांच सौ किलो है। इसके साथ ही शहर स्थित विषहरी स्थान के शिव भक्तों की टोली 51 फिट का कांवड लेकर पड़ाव संघ के साथ चल रहे हैं। वहीं पहली बार बाबा बटेश्वर स्थान से करीब 100 की संख्या में 31 फिट कावड़ लेकर बजरंगबली सेवा संघ के कावड़ भी शामिल हुए।
इस कांवड यात्रा में करीब तीन हजार से अधिक शिव भक्त शामिल हुए। जगह-जगह विश्राम व प्रसाद ग्रहण करते हुए. संध्या आरती, प्रहर कांवड़ की भव्य पूजा अर्चना होती रही। यह जत्था 21 जुलाई यानी द्वितीय सोमवारी को फौजदारी बाबा बासुकीनाथ के दरबार में जलाभिषेक करेंगे।
संघ के अध्यक्ष अरबिंद सिंह व सचिव गौतम चौधरी ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य आकर्षण 71, 51 और 31 फिट लंबी कांवड़ है। इतना बड़ा जत्था देश के किसी कोने से नहीं निकलता है। यात्रा में करीब तीन हजार कांवडियां एक साथ चलते, आरती, विश्राम व प्रसाद ग्रहण करते। संध्या प्रहर कांवड की भव्य पूजा अर्चना होती है। इसलिए पड़ाव संघ की कांवड यात्रा को ऐतिहासिक कहा जाता है। यह जत्था 21 जुलाई यानी द्वितीय सोमवारी को फौजदारी बाबा बासुकीनाथ के दरबार में जलाभिषेक करेंगे।
पूर्व अध्यक्ष संतोष गुप्ता ने कहा कि पड़ाव संघ के साथ चलने वाले कांवडिय़ों के लिए जगह-जगह विशेष सेवा मुहैया कराई जाती है। दोनों प्रहर का भोजन, घुमंतू सेवा, मेडिकल सेवा, फलारी सेवा, नाश्ता, चाय, शिकंजी के साथ मेडिकल सेवा की व्यवस्था की गई है।
कांवड़ यात्रा एतिहासिक, जलाभिषेक का महत्व
बिहार जदयू प्रदेश महासचिव शुभानंद मुकेश ने कहा कि यह कांवड़ यात्रा ऐतिहासिक है। संघ का 113वां साल, शुरुआत से अब तक काफी कुछ बदल गया पहले कुछ लोग ही यहां से जल भरकर बाबा बासुकीनाथ धाम में जल अर्पण करते थे लेकिन अब हजारों की संख्या में कांवरिया शामिल हो रहे हैं, साथी जगह-जगह सभी कांवरियों के लिए सेवा शिविर का भी आयोजन किया गया है, सभी लोग सेवा भाव से कांवड़ियों की सेवा करते हैं, इस बार हम लोगों ने भी जगह-जगह का शिविर लगाया है।
स्व. घनश्याम दास शर्मा उर्फ घड़सी महाराज ने शुरू की थी यात्रा
पड़ाव संघ को मार्गदर्शन करने वाले वरिष्ठ सदस्य प्रदीप विद्रोही ने कहा कि शहर के ही एक मारवाड़ी ब्राह्मण परिवार के स्व. घनश्याम दास शर्मा उर्फ घड़सी महाराज ने अपने पांच मित्रों के साथ कहलगांव स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट से कमंडल में जल भरकर वर्षों पहले यह पहली पैदल यात्रा शुरू की थी। उस समय यह मार्ग घने जंगलों, पहाड़ों और पगडंडियों से होकर गुजरता था।



