बिहार: वोटर लिस्ट रिवीजन पर ओवैसी ने उठाए सवाल, कहा-अगर जल्दबाजी में 15-20% लोगों के भी नाम छूट गए…

असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग के साथ अपनी चिंताओं को साझा करते हुए कहा कि एसआईआर अभ्यास बहुत ही कम समय में किया जा रहा है।

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पटना: असदुद्दीन ओवैसी कहा कि निर्वाचन आयोग का इतना बड़ा अभ्यास राजनीतिक दलों से परामर्श के बिना किया जा रहा है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन है, जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है। निर्वाचन आयोग में अपनी बैठक के बाद ओवैसी ने कहा, हमने जो पहला मुद्दा उठाया वह यह था कि एसआईआर के संचालन के लिए राजनीतिक दलों से परामर्श नहीं किया गया था। हमने चुनाव आयोग से पूछा है कि वे 2024 की मतदाता सूची को अर्हक क्यों नहीं मानते हैं। हमने 2024 में मतदान किया है, और अब 2025 में, आप दस्तावेज मांग रहे हैं, आप मतदाताओं की दो श्रेणियां बना रहे हैं, जो अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। आप कोई उचित औचित्य नहीं दे सकते।

ओवैसी ने खड़े किये कई सवाल, जताई चिंता
असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग के साथ अपनी चिंताओं को साझा करते हुए कहा कि एसआईआर (Special Intensive Revision) अभ्यास बहुत ही कम समय में किया जा रहा है, यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाता है, तो यह केवल मतदान के अधिकार को खोने के बारे में नहीं है, बल्कि यह उनकी आजीविका को भी प्रभावित करता है। हमारी मुख्य चिंता यह है कि चुनाव आयोग इतने कम समय में इस तरह की कवायद को कैसे अंजाम देने की योजना बना रहा है। इसका सीधा असर लोगों पर पड़ेगा। जो लोग अपना पता बदलते हैं। आप जन्म प्रमाण पत्र मांग रहे हैं। ओवैसी ने कहा अगर जल्दबाजी में 15-20 प्रतिशत लोगों के नाम छूट गए तो यह नागरिकता का मुद्दा बन जाएगा। यह असम डी-वोटर (संदिग्ध मतदाता) जैसा होगा। यह आशंका है और यह वास्तविक है।

जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह के नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल 8 जुलाई, मंगलवार चुनाव आयोग से मिला। जनसुराज पार्टी ने इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुलाकात के बाद उदय सिंह ने कहा िक चुनाव आयोग की तरफ से मांगे जा रहे दस्तावेजों की संख्या 11 है। जबकि इनमें से कई ऐसे दस्तावेज हैं, जिन्हें एक साधारण व्यक्ति के लिए जुटा पाना बेहद मुश्किल है। इससे बड़े पैमाने पर लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया को जटिल, गैर-जरूरी और जनविरोधी बताते हुए कहा कि इससे आम मतदाता भ्रम में पड़ सकता है और चुनावी पारदर्शिता पर असर पड़ सकता है।

उदय सिंह ने आरोप लगाया कि हम लोग हमेशा यह कहते रहे हैं कि चुनाव आयोग ने खुद को बहुत हद तक समझौते की स्थिति में डाल दिया है। वह भाजपा के एक विभाग की तरह काम कर रहा है। चुनाव आयोग अपनी स्वतंत्रता खोता जा रहा है और जो विश्वास जनता को था, वह धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।

मतदाता गहन पुनर्निरीक्षण का कोई औचित्य ही नहीं है
उदय सिंह ने आगे कहा कि बिहार में विधानसभा चुनाव होने में 2-3 महीना ही बाकी है। ऐसे में इसका कोई औचित्य नहीं है। लेकिन यदि चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है, तो हम औपचारिक रूप से अपनी बात आगे रखेंगे। उदय सिंह ने बताया कि जन सुराज ने इस मुद्दे को उच्चतम न्यायालय में भी चुनौती दी है। उम्मीदन उच्चतम न्यायालय से 2-3 दिनों में इस मुद्दे पर कोई महत्वपूर्ण फैसला आएगा और यह सारा विवाद समाप्त हो जाएगा।

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